आर॰ श्रीलेखा

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आर.श्रीलेखा
जन्म १९६०\१२\25
राष्ट्रीयता भारतीय
पुरस्कार उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक, प्रतिष्ठित सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक

आर.श्रीलेखा (जन्म-२५ दिसम्बर, १९६०) भारतीय पुलिस सेवा में अधिकारी है, और केरल की आईपीएस बनने वाली पहली महिला पुलिस अधिकारी हैं।[1] वह एक समर्पित पुलिस अधिकारी, व लेखक हैं और साथ ही में केरल के सार्वजानिक क्षेत्र के संघठनो में प्रबंध निदेशक के रूप में भी काम कर चुकी हैं। सीबीआई में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने लिंगभेद का अनुभव किया। उन्हें "रेड श्रीलेखा" नाम से भी जाना जाता हैं।[2]

प्रारंभिक जीवन और परिवार[संपादित करें]

श्रीलेखा का जन्म २५ दिसम्बर, १९६०[3] में प्रोफेसर एन.वेलायुधन और बी.राधाम्मा[4] के घर में हुआ था। उनका विवाह डॉ.सेतुनाथ जों की तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बाल चिकित्सा सर्जरी के प्रोएस्सर हैं। उनका एक पुत्र भी हैं, गोकुल जों कि एमबीऐ का छात्र हैं।[5]

शिक्षा[संपादित करें]

श्रीलेखा ने अपनी स्कूली शिक्षा कॉटन हिल गर्ल्स स्कूल, तिरुवनंतपुरम[6] से की हैं जहाँ उन्होंने संगीत, एनसीसी, एनएसएस, जैसी गतिविधियों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। फिर उसके बाद उन्होंने महिला कॉलेज, तिरुवनंतपुरम से अंग्रेज़ी साहित्य में अपनी स्नातक की डिग्री हासिल की। उसके बाद उन्होंने केरल के विश्वविद्यालय कैंपस[7] से युनिवेर्सिटी इंस्टीटूट ऑफ़ इंग्लिश से अपनी मास्टर डिग्री हासिल की। २००५ में उन्होंने "मानव संसाधन प्रबंधन" में इगनू से एमबीऐ की डिग्री ली। उन्हें यूनाइटेड किंगडम की सरकार द्वारा प्रतिष्ठित चेवनिंग फैलोशिप से सम्मानित किया गया था, उन्होंने सितंबर से दिसंबर २०१५ तक किंग्स कॉलेज, लंदन, साइंस पो, पेरिस, एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी, जेनेवा और ऑक्सफ़ोर्ड में संयुक्त राष्ट्र कार्यालयों में फेलोशिप अध्ययन किया।

करियर[संपादित करें]

पुलिस सेवा ने शामिल होने से पहले वह विध्याधि राजा कॉलेज में अध्यापक थी। उन्होंने भर्ती रिज़र्व बैंक में भी "ग्रेड बी" अधिकारी के तौर पर काम किया हैं।[8] जनवरी १९८७ में २६ वर्ष की आयु में श्रीलेखा केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनी। पुलिस सेवा में शामिल होने के बाद उन्होंने ३ जिलो में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम किया।[9] श्रीलेखा ने केंद्रीय जांच ब्यूरो में ४ साल काम किया (केरल में बतौर एसपी और दिल्ली में बतौर डीआईजी[10])। उन्हें एर्नाकुलम रेंज के उप महानिरीक्षक के रूप में पदोन्नित किया गया। १५ फ़रवरी २०१४ को उन्हें ऐडीजीपी के रूप में नियुक्त किया गया।

पदक और मान्यता[संपादित करें]

श्रीलेखा को यूनाइटेड किंगडम की सरकार द्वारा प्रतिष्ठित चेवनिंग फैलोशिप के लिए चुना गया था। वह ब्रिटेन के स्कॉलैंड यार्ड में महानगरीय पुलिस में विशेष प्रशिक्षण भी हासिल कर चुकी हैं। 2004 में, डीआईजी सतर्कता और भ्रष्टाचार के खिलाफ, श्रीलेखा को राष्ट्रपति द्वारा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था।

चुनिन्दा काम[संपादित करें]

श्रीलेखा ने ९ पुस्तके लिखी व प्रकाशित की हैं-

  1. चेरू मर्मरंगल[11]
  2. नीराझाकिपुरम[12]
  3. जागरूकन

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "President's medal for R.Sreelekha". The Hindu. 26 January 2013. Retrieved 26 February 2014.
  2. Ullas, A S (3 December 2013). "Sreelekha IPS @ 25". Malayala Manorama. Retrieved 28 February 2014.[dead link]
  3. "IPS (Kerala Cadre) Civil List as on 01-01-2012" (PDF). General Administration Department, Government of Kerala. Retrieved 26 February 2014.
  4. "IPS (Kerala Cadre) Civil List as on 01-01-2012" (PDF). General Administration Department, Government of Kerala. Retrieved 26 February 2014.
  5. "President's medal for R.Sreelekha". The Hindu. 26 January 2013. Retrieved 26 February 2014.
  6. "Back to school". Cotton Hill Government Girls' Higher Secondary School celebrates its platinum jubilee this year. The Hindu. Retrieved 26 February 2014.
  7. "R.Sreelekha, IPS". Kerala.com. Retrieved 26 February 2014.
  8. "Sreelekha IPS". Who am I?. Sreelekha R. Retrieved 26 February 2014.
  9. "An officer and a writer". The Hindu. Retrieved 26 February 2014.
  10. "Failure to curb abkari-official nexus". The Hindu. 8 November 2000. Retrieved 27 February 2014.
  11. "IPS officer authors third book". Whispers in the corridors. Retrieved 27 February 2014.
  12. "Neerazhikapuram". Amazon. Retrieved 27 February 2014.