आधे अधूरे

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मोहन राकेश द्वारा लिखित हिंदी का प्रसिद्ध नाटक पुस्तकीय रूप में
आधे अधूरे  
[[चित्र:|]]
लेखक मोहन राकेश
देश भारत
भाषा हिंदी
विषय साहित्य - नाटक

आधे अधूरे मोहन राकेश द्वारा लिखित हिंदी का प्रसिद्ध नाटक है। यह मध्यवर्गीय जीवन पर आधारित नाटक है। इसमें तीन स्त्री पात्र हैं तथा पाँच पुरुष पात्र। इनमें से चार पुरुषों की भूमिका एक ही पुरुष पात्र निभाता है। हिंदी नाटक में यह अलग ढंग का प्रयोग है। इस नाटक का प्रकाशन १९६९ ई. में हुआ था। यह पूर्णता की तलाश का नाटक है।

कथानक[संपादित करें]

नाटक में कहानी एक परिवार के इर्द गिर्द घूमती नजर आती है जिसमे सावित्री जो कि काम काजी औरत की भूमिका में नजर आती है उसका पति महेंद्रनाथ जो कि बहुत दिन से काम काज नही कर रहा और बहुत दिन से यू ही निठल्ला पड़ा रहता है बस अपनी कमाई कमाई से घर का कुछ सामान खरीद के बहुत दिन बैठा है , घर की बड़ी लड़की बिन्नी है जो शादी शुदा है जिसने मनोज के साथ भाग कर शादी कर ली थी , छोटी लड़की किन्नी है और घर का सब से आलसी पुरुष अशोक-घर का लड़का ।

सावित्री:- एक कामकाजी मध्यवर्गीय शहरी स्त्री

  1. काले कपड़ों वाला पुरुष चार रूपों में १-महेंद्रनाथ(सावित्री का पति),२-सिंघानिया(सावित्री का बॉस),३-जगमोहन,४-जुनेजा
  2. बिन्नी :- सावित्री की बड़ी बेटी
  3. अशोक:- सावित्री का बेटा
  4. किन्नी:- सावित्री की छोटी बेटी
  5. मनोज:- बिन्नी का पति (मात्र संवादों में उल्लेखनीय)

विशेषताएं[संपादित करें]

इस नाटक में मध्यवर्गीय परिवार के वैवाहिक जीवन की विडंबनाओं का चित्रण किया गया है।[1] इसमें परिवार का प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने ढंग के संत्रास का भोग करता है। यह आम बोलचाल की भाषा में लिखा गया नाटक है।

मंचन[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. सं. डॉ. नगेन्द्र (2016). हिंदी साहित्य का इतिहास. नई दिल्ली: मयूर पेपरबैक्स.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]