आदि शंकराचार्य की कृतियाँ

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आदि शंकराचार्य ने बहुत से गर्न्थों की रचना की जो अद्वैत वेदान्त के आधार स्तम्भ हैं। उनकी कृतियों में अद्वैत वेदान्त की तर्कपूर्ण स्थापना हुई है।

परम्परागत रूप से आदि शंकराचार्य की कृतियों को तीन समूहों में रखा जाता है-

  1. भाष्य,
  2. प्रकरण ग्रन्थ (दार्शनिक ग्रन्थ)
  3. स्तोत्र (स्तुति के लिए श्लोक)

भाष्य[संपादित करें]

शंकराचार्य ने निम्नलिखित ग्रंथों पर भाष्य लिखा है-

प्रकरण ग्रन्थ[संपादित करें]

स्तोत्र[संपादित करें]

आदि शंकर ने शिव, विष्णु, देवी, गणेश एवं सुब्रमण्य की स्तुति के लिए बहुत सी रचनाएँ कीं।

  • गणेशपंचरत्नम्
  • अन्नपूर्णाष्टकम्
  • कालभैरवाष्टकम्
  • Dakshinamurthy Stotram
  • Krishnashtakam
  • Bhaja Govindaṃ, also known as Mohamuḍgara
  • Śivānandalahari
  • Saundaryalahari
  • Śrī Lakṣmīnṛsiṃha Karāvalamba Stotraṃ
  • Śāradā Bhujangaṃ
  • Kanakadhāra Stotraṃ
  • Bhavāni Aṣṭakaṃ
  • Śiva Mānasa Pūja
  • Pandurangashtakam
  • Subramanya Bhujangam