आईएनएस कलवरी (एस50)

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First torpedo firing trials of INS Kalvari (S50) - 3.jpg
आईएनएस कलवरी अपनी पहली टारपीडो फायरिंग ट्रायल के दौरान, मई 2017
देश (भारत)
नाम: आईएनएस कलवरी
Namesake: आईएनएस कलवरी (एस23)
Ordered: 2005
निर्माता: माज़गन डॉक लिमिटेड, मुंबई
निर्दिष्ट: 1 अप्रैल 2009
लांच: 6 अप्रैल 2015
Completed: 30 अक्टूबर 2015
Acquired: 21 सितंबर 2017
विनियुक्त: 14 दिसंबर 2017 [1]
Identification: एस50
Motto: हमेशा आगे
स्थिति: सक्रिय सेवा में
सामान्य विशेषताएँ
वर्ग एवं प्रकार: कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियाँ
विस्थापन: 1,565 टन (1,725 लघु टन) (CM-2000)
लम्बाई: 61.7 मी॰ (202 फीट) (CM-2000)
बीम: 6.2 मी॰ (20 फीट)
Draught: 5.4 मी॰ (18 फीट)
प्रारूप: 5.8 मी॰ (19 फीट)
प्रणोदन: डीजल-इलेक्ट्रिक, बैटरी
चाल:
  • 20 नॉट (37 किमी/घंटा) (जलमग्न पर)
  • 12 नॉट (22 किमी/घंटा) (सतह पर)
परास:
  • 6,500 समुद्री मील (12,000 कि॰मी॰), 8 नॉट (15 किमी/घंटा; 9.2 मील/घंटा) गाति से (जलमग्न पर)
  • 550 समुद्री मील (1,020 कि॰मी॰), 5 नॉट (9.3 किमी/घंटा; 5.8 मील/घंटा) गाति से (सतह पर)
  • धारिता:
  • 40 दिन (सघन)
  • 50 दिन (साधारण)
  • परख गहराई: >350 मीटर (1,150 फीट)[2]
    पूरक: 31
    अस्र-शस्र: 6 x 533 मि॰मी॰ (21 इंच) टारपीडो ट्यूब 18 काले शार्क हेवीवेट टारपेडो के लिए/वरुणस्त्र टारपीडो या एसएम.3 9 एक्सोकेट एन्टी शिप मिसाइलें, 30 नौसेना माईन टारपीडो के स्थान पर।

    आईएनएस कलवरी एस50 (INS Kalvari S50) भारतीय नौसेना के छह कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों में पहली पनडुब्बी है जिसका निर्माण भारत में हो रहा है। यह एक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक वाली पनडुब्बी है जिसे डीसीएनएस (फ्रांसीसी नौसैनिक रक्षा और ऊर्जा कंपनी) द्वारा डिजाइन किया गया है और इसे मुंबई में माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में निर्मित किया गया है।[3] सितम्बर २०१७ में पहली कलवरी नौसेना को मिली।

    स्थिति[संपादित करें]

    तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की उपस्थिति में पनडुब्बी 6 अप्रैल 2015 को अनडॉक किया गया था। निर्वात (वैक्यूम) परीक्षण और बैटरी लोडिंग के महत्वपूर्ण मील पत्थर को पूरा करने के बाद, पनडुब्बी को 28 अक्टूबर 2015 को नौसेना डॉकयार्ड में लॉन्च किया गया था और उसके बाद बेसिन ट्रायल और हार्बर स्वीकाटन ट्रायल चरण के पूरा होने के लिए माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड पर वापस लाया गया था। कठोर हार्बर परीक्षणों और अन्य परीक्षणों के दौरान कई चुनौतियों पर विजय प्राप्त करने के बाद, 1 मई 2016 को पनडुब्बी ने समुद्री परीक्षण शुरू किए।[4][5]

    सितंबर 2016 तक इसकी भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने की उम्मीद थी, लेकिन इसमे देरी होने की वजह से इसे 14 दिसंबर 2017 बेड़े में शामिल किया गया।[6][7][8][9]

    विशेषताएं[संपादित करें]

    आईएनएस कलवरी में पिछली डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में बेहतर छुपने वाली प्रौद्योगिकी है। यह सटीक निर्देशित हथियारों के माध्यम से बड़े पैमाने पर हमले भी शुरू कर सकती हैं। इस पनडुब्बी के माध्यम से टारपीडो के साथ एक हमले शुरू किए जा सकते है। और पानी की सतह पर या नीचे की सतह से एंटी शिप मिसाइल लांच की जा सकती है। वह उष्णकटिबंधीय समेत सभी सेटिंग्स में काम कर सकती हैं जिसमें नौसेना टास्क फोर्स के विभिन्न घटकों के साथ अंतर-क्षमता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न माध्यमों और संचार जगहें हैं। माइन बिछाने, क्षेत्र निगरानी, विरोधी-पनडुब्बी युद्ध, खुफिया जानकारी और बहुविध युद्ध गतिविधियों सहित इस गुप्तता वाली पनडुब्बी के माध्यम से कई रक्षा गतिविधियों का संचालन किया जा सकता है। कलवारी को विशेष इस्पात से बनाया जा रहा है और यह उच्च उपज तनाव का सामना कर सकता है क्योंकि इसमे तन्यता ताकत है, इसके अलावा यह उच्च तीव्रता के हाइड्रोस्टाटिक बल का सामना कर सकती है और महासागरों में गहराई से गोता लगा सकती है।

    ये अटैक पनडुब्बियाँ डीजल प्रणोदन और अतिरिक्त हवा स्वतंत्र प्रणोदन से सुसज्जित हैं। नए डीजल इलेक्ट्रॉनिक स्कॉर्पीन पनडुब्बियों का नाम 10 साल पहले पुराने फॉक्सट्रॉट श्रेणी की पनडुब्बियाँ के अनुसार रखा गया है; फॉक्सट्रॉट श्रेणी की पनडुब्बियाँ भारतीय नौसेना की पहली पनडुब्बियाँ थीं। आईएनएस कलवरी उन छः पनडुब्बियों में से एक है, जिनका सतह और पानी के नीचे सख्ती से डेढ़ साल तक परीक्षण किया गया है। इस पनडुब्बी पर तंत्र को सुरक्षा का अनुकूलन करने के लिए डिजाइन किया गया है; डीआरडीओ विकासाधीन परमाणु पनडुब्बियों के साथ-साथ भविष्य में पारंपरिक नौसेना पनडुब्बियों के संरचित स्वास्थ्य निगरानी के लिए एक प्रणाली स्थापित करने की प्रक्रिया में है।[10]

    अस्त्र-शस्त्र[संपादित करें]

    आईएनएस कलवारी और इस श्रेणी में अन्य पनडुब्बियाँ को भी हथियार लॉन्चिंग ट्यूबों के साथ सुसज्जित हैं और यह अपने साथ बोर्ड पर हथियार ले सकते हैं जो प्रभावी रूप से समुद्र में पुनः लोड हो सकते हैं।

    पनडुब्बी 6 x 533 मिमी टॉर्पेडो ट्यूबों से लैस है जिसमे18 व्हाइटहेड एलनिया सुस्तमी सुबैक्की ब्लैक शार्क हेवीवेट टॉर्पेडोज या एसएम.39 एक्सॉकेट एंटी शिप मिसाइल लोड की जा सकती है।

    कलवरी को केवल एमबीडीए की ट्यूब-लॉन्च एक्सोकेट एसएम-39 एंटी शिप मिसाइलों के साथ हथियारों से लैस किया जाएगा। भारतीय नौसेना की USD300 मिलियन की खरीद WASS (एक फिनमेक्निक / लियोनार्डो कंपनी) से 98 टॉर्पेडोओं की खरीद निलंबित कर दी गई है, चूंकि यह अगस्टा वेस्टलैंड से जुडा है जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।

    इन्हें भी देखें[संपादित करें]

    बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

    सन्दर्भ[संपादित करें]

    1. http://indiatoday.intoday.in/story/indian-navy-scorpene-submarines-france/1/905375.html
    2. [1]
    3. "Scorpene Submarine, Built at Mumbai Docks, Launched Into Water". NDTV. अभिगमन तिथि 2015-04-06.
    4. "Maiden Sea Trial of Kalvari - First Scorpene Class Submarine | Indian Navy". indiannavy.nic.in. अभिगमन तिथि 2016-05-05.
    5. "India's first Scorpene boat begins sea trials without primary weapons | IHS Jane's 360". www.janes.com. अभिगमन तिथि 2016-05-05.
    6. "INS Kalvari sea trials begin today: All you need to know about the attack submarine". Indian Express. अभिगमन तिथि 2015-10-29.
    7. "New India submarine enters water". BBC. अभिगमन तिथि 2015-04-06.
    8. "Commissioning of INS Kalvari delayed | The Asian Age". The Asian Age. अभिगमन तिथि 2016-10-16.
    9. "Scorpenes no more". अभिगमन तिथि 2017-03-20.
    10. "Features of INS Kalvari Scorpene submarine". CareerRide.com. अभिगमन तिथि 4 October 2015.