आंबेडकरवाद

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आंबेडकरवाद भीमराव आंबेडकर के आदर्शों, विश्वासों एवं दर्शन से उदभूत विचारों के संग्रह को कहा जाता है, जो भारत के सामाजिक आन्दोलन के सबसे बड़े नेता थे। यह ऐसे उन सभी विचारों का एक समेकित रूप है जो आंबेडकर ने जीवन पर्यंत जिया एवं किया था। जब किसी व्यक्ति या संस्थान को आंबेडकरवादी कहकर संबोधित करते हैं तो उसका तात्पर्य होता है भीमराव आंबेडकर द्वारा स्थापित मानवी मूल्यों एवं आदर्शों का अनुपालन करनेवाला होता है। आंबेडकरवाद भीमराव आंबेडकर का दर्शन है। संक्षेप में कहा जाए तो समतामूलक समाज की स्थापना हेतु किए गए प्रयासों का नाम ही अंबेडकरवाद है |

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भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी विचारों से प्रभावित होकर लोग बौद्ध बन रहे हैं। आज देश के समस्त शोषित, पिछडो एवं पुरोगामी आधुनिक विचारों के लोग आंबेडकरवाद से प्रभावित हो रहे हैं।

जातिप्रथा का विरोध[संपादित करें]

बाबा सहाब ने जातीयो का विरोध किया क्योंकी जब हम सब ईश्वर कि संतान है तो फिर यह भेद भाव किस काम का । धर्म इंसान को सिर्फ खोकला करता है। इससे जयादा वह इंसान को कुछ नहीं दै सकता है औऱ नाहीं कुछ बना सकता हैं।

समानता[संपादित करें]

स्वतंत्र्यता[संपादित करें]

भाईचारा[संपादित करें]

अहिंसा[संपादित करें]

बुद्ध धम्म[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • Tripathi, Arun Kumar. "The BJP Has Swept UP But It Does Not Know the Way Ahead From Here" (en-GB में). https://thewire.in/116168/bjp-up-fears-elections/. 
  • "KCR’s 125-feet Ambedkar statue is a mockery of the very spirit of Ambedkarism". The News Minute. 2016-04-15. http://www.thenewsminute.com/article/kcrs-125-feet-ambedkar-statue-mockery-very-spirit-ambedkrism-41663. 
  • "Kabali is boring, but its socio-political depths make it a blockbuster that wasn’t". The News Minute. 2016-07-23. http://www.thenewsminute.com/article/kabali-boring-its-socio-political-depths-make-it-blockbuster-wasnt-46965. 
  • The rise of Ambedkarism