आंबेडकरवाद

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आंबेडकरवाद भीमराव आंबेडकर के आदर्शों, विश्वासों एवं दर्शन से उदभूत विचारों के संग्रह को कहा जाता है, जो भारत के सामाजिक आन्दोलन के सबसे बड़े नेता थे। यह ऐसे उन सभी विचारों का एक समेकित रूप है जो आंबेडकर ने जीवन पर्यंत जिया एवं किया था। जब किसी व्यक्ति या संस्थान को आंबेडकरवादी कहकर संबोधित करते हैं तो उसका तात्पर्य होता है भीमराव आंबेडकर द्वारा स्थापित मानवी मूल्यों एवं आदर्शों का अनुपालन करनेवाला होता है। आंबेडकरवाद भीमराव आंबेडकर का दर्शन है।[1][2][3][4]

भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी विचारों से प्रभावित होकर लोग बौद्ध बन रहे हैं। आज देश के समस्त शोषित, पिछडो एवं पुरोगामी आधुनिक विचारों के लोग आंबेडकरवाद से प्रभावित हो रहे हैं।

जातिप्रथा का विरोध[संपादित करें]

बाबा सहाब ने जातीयो का विरोध किया क्योंकी जब हम सब ईश्वर कि संतान है तो फिर यह भेद भाव किस काम का । धर्म इंसान को सिर्फ खोकला करता है। इससे जयादा वह इंसान को कुछ नहीं दै सकता है औऱ नाहीं कुछ बना सकता हैं।

समानता[संपादित करें]

भारत में अनेक जातियों के लोग रहते हे प्राचीन काल में मनु स्मृति के अनुसार जो वर्ण व्यवस्था थी उसे जन्म के अधार पर कर दिया जो पहले कर्म पर था सबसे नीचे का जो वर्ण जो शुद्र के नाम से जाना गया उसे बाद में भी नीचा हि माना गया बाबा साहब ने जब संविधान का निर्माण किया तो उन्होंने जाति व्यवस्था के आधार पर दलितों का जो शोषण हो रहा हे उस को खत्म करने के संविधान में समानता का अधिकार दिया

स्वतंत्र्यता[संपादित करें]

भारतीय संविधान के निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के द्वारा स्वतंत्रता के संबंध में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 से 32 के अंतर्गत मानव के मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया है जहां भारतीय संविधान में महिला पुरुष को समान माना जाता है वहीं महिला और पुरुष के मध्य समता का भाव रखना जरूरी है क्योंकि देश की आधी आबादी महिला और पुरुष दोनों के संयोजन से मिलकर बनती है जब महिला और पुरुष को स्वतंत्रता का भाव होगा तभी वह अपने जीवन में निष्पक्ष की आगे प्रगतिशील समाज की स्थापना कर सकते हैं भारतीय संविधान में व्यक्ति को जाति मूल लिंग नस्ल एवं भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर किसी भी व्यक्ति विशेष में कोई भी विवाद नहीं होना भारतीय संविधान की एकता और अखंडता को प्रदर्शित करता है लोगों को रोजगार के संबंध में भी भारत में कहीं पर भी अपना रोजगार करने की स्वतंत्रता है साथ ही अशोक पार्क एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है समाचार पत्र प्रकाशित करने की एवं देश के खिलाफ किसी भी प्रकार का गलत आचरण करने वाले व्यक्ति को संविधान द्वारा प्रतिबंधित किया जा सकता है और उसको धर्म को स्वीकार करने की स्वतंत्रता है और समाजवादी नीतियों को लागू करने का भी स्वतंत्रता का भाव है साथ ही वे अपने धर्म अपने रीति रिवाजों को प्रचार-प्रसार करने और अपने शिक्षा के क्षेत्र में विकास करने का अकोट

भाईचारा[संपादित करें]

अहिंसा[संपादित करें]

बुद्ध धम्म[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Tripathi, Arun Kumar. "The BJP Has Swept UP But It Does Not Know the Way Ahead From Here". thewire.in (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2017-03-31.
  2. "KCR's 125-feet Ambedkar statue is a mockery of the very spirit of Ambedkarism". The News Minute. 2016-04-15. अभिगमन तिथि 2017-03-31.
  3. "Kabali is boring, but its socio-political depths make it a blockbuster that wasn't". The News Minute. 2016-07-23. अभिगमन तिथि 2017-03-31.
  4. The rise of Ambedkarism