आंजना

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आंजना जाट

आंजना जाटजाति का एक गोत्र है, जो भारत के राजस्थान, हरियाणा और मध्यप्रदेश प्रांत में पाये जाते हैं। राजस्थान के चित्तौडगढ़, प्रतापगढ़, नागौर, राजसमंद जिलों में, हरियाणा के गुडगाँव जिले में एवं मध्यप्रदेश के भोपाल जिलों में बसते हैं।

राजा वीरभद्र इन्हें जाटों का प्रथम राजा कहा जाता है ।

वीरभद्र से जाट गोत्रों की उत्पत्ति

शिवपुराण में लिखा है कि वीरभद्र की संतान से बड़े-बड़े जाट गोत्र प्रचलित हुए । वीरभद्र की वंशावली राणा धौलपुर जाट नरेश के राजवंश इतिहास से ली गई है जो निम्नलिखित हैं ।

राजा वीरभद्र के 5 पुत्र और 2 पौत्रों से जो जाटवंश चले (जाट इतिहास पृ० 83 लेखक लेफ्टिनेंट रामसरूप जून) -


(1) पौनभद्र (पौनिया या पूनिया गोत्र) (2) कल्हनभद्र (कल्हन गोत्र) (3) अतिसुरभद्र (अंजना / आंजना गोत्र) (4) जखभद्र (जाखड़ गोत्र) (5) ब्रह्मभद्र (भिमरौलिया गोत्र) (6) दहीभद्र (दहिया गोत्र)

आंजना जाटवंश

कैप्टन दलीपसिंह अहलावत लिखते हैं कि चन्द्रवंशी जाट राजा वीरभद्र के पुत्र अतिसुरभद्र के नाम से आंजना जाटवंश (गोत्र) का प्रचलन हुआ । इस गोत्र के जाट अधिकतर पाकिस्तान में शाहपुर , मियांवाली और जेहलम जिलों में हैं जो कि मुसलमान हैं । सिख जाटों में भी यह गोत्र बड़ी संख्या में है । इस गोत्र के जाट गुजरात , मालवाऔर मेवाड़ में भी हैं ।

इतिहास

ठाकुर देशराज ने लिखा है .... जाटों में आंजना जाट जयपुरराज्य में पाए जाते हैं । जो वास्तव में किसी समय अराजण (अराजक) रहे हैं । इनका भी एक समूह बहुत समय तक अजरी नदी के किनारे रहा है । जाटाली प्रांत जाटों के नाम से ईरान में काफी प्रसिद्धि पा गया था ।

उत्तर गुजरात मे जाटलैंड से दूर जो आबादी गुजरात आकर बसी ह वो पहले हरियाणा , भरतपुर , राजस्थान से आकर बसे हुए चौधरी हैं जो अंजना गोत्री जाट हैं ।