अहमद हुसैन - मोहम्मद हुसैन

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अहमद हुसैन मोहम्मद हसैन साहब की जोड़ी कमाल की है, गायकी में गज़ब की हारमनी पैदा करते हैं, दोनों की आवाज़ का सुरूर ही कुछ ऐसा है कि इनकी कुछ गज़लों को बार बार सुनने का मन करता है।.. 'मैं हवा हूँ कहाँ वतन मेरा', 'चल मेरे साथ ही चल', 'दो जवां दिलों का ग़म', 'आया तेरे दर पर दीवाना; नजर मुझ्से मिलाती हो तो तुम शरमा सी जाती हो'... आदि गजलों में अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरने वाले उस्ताद अहमद हुसैन और उस्ताद मोहम्मद हुसैन की जोड़ी का नाम गजल प्रेमियों की पसंदीदा जोड़ियों में शुमार है। दोनों भाई अपनी गायकी से ऐसा समा बांधते हैं कि हर कोई मंत्रमुग्ध 'वाह-वाह' कह उठता है।

जयपुर [राजस्थान] में जन्मे और इंदौर [मध्य प्रदेश] को भी अपना घर मानने वाले इन दोनों भाईयों का संगीत की दुनिया में बहुत नाम है। प्रसिद्द ग़ज़ल और ठुमरी गायक उस्ताद अफज़ल हुसैन जयपुरी के पुत्र होने के कारण इन्हें संगीत में रूचि रही और शस्त्रीय संगीत में बहुत ही अच्छे तालीम दी गयी। इन्हें इनके गीत, कव्वाली, ग़ज़लों, भजन और शबद के लिए भी जाना जाता है। उनके भजनों में सरस्वती और गणेश वंदना अत्यंत गहन एवं हृदयस्पर्शी हैं।

1980 में इनका पहला एल्बम- 'गुलदस्ता' आया था, जिसे बहुत पसदं किया गया था। अब तक दोनों भाइयों के लगभग 65 एल्बमें बाजार में आ चुके है। इनमें कुछ अन्य एल्बमों के नाम- हमख्याल, मेरी मोहब्बत, द ग्रेट गजल्स, कृष्ण जनम भयो आज, कशिश, रिफाकत, याद करते रहे, नूर-ए-इस्लाम, रहनुमा, राहत, मेरी मोहब्बत, दसम ग्रन्थ आदि प्रमुख है।

इनके श्रद्धा और भावना नाम के दो प्रारम्भिक एल्बम आज भी संगीत रसिकों को बहुत प्रिय है और शिद्दत से सुने जाते हैं। हाल ही में यश चोपड़ा की फिल्म वीर-ज़ारा में हिट गीत 'आया तेरे दर पे दीवाना' भी इन्ही हुसैन बंधुओं ने गाया था! 'सारेगामा' कार्यक्रम से प्रसिद्धि प्राप्त मोहमद वकील इन्हीं बंधुओं के भतीजे हैं और उन्होंने ही उसे संगीत शिक्षा दी है !

राजस्थान सरकार द्वारा स्टेट अवार्ड, राजस्थान संगीत नाटक अकेडमी अवार्ड, 'बेगम अख्तर अवार्ड', नईदिल्ली, उ.प्र. सरकार द्वारा 'मिर्जा गालिब अवार्ड', महाराष्ट्र सरकार द्वारा 'अपना उत्सव अवार्ड' आदि अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

सन्दर्भ[संपादित करें]