असोथर

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असोथर उत्तर प्रदेश का एक कस्बा है जो फतेहपुर जनपद मुख्यालय से ३० किलोमीटर और नेशनल हाईवे थरियांव से १२ किलोमीटर कि दूरी पर यमुना नदी में किनारे पर फतेहपुर जनपद के मुख्यालय के दक्षिणी सीमा पर स्थित है। १७वी शताब्दी के मध्य राजा भगवंत राय खींची जी ने इसे बसाया था।

किंवदन्ति है कि गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वस्थामा ने महाभारत काल में ब्रम्हास्त्र पाने के लिए यहीं पर आकर तपस्या की थी , तभी से इस बस्ती का नाम असुफल हो गया जो कालान्तर में असोथर के नाम से जाने जाना लगा । खीची वंश के राजाओं में राजा भगवंत राय ने अश्वस्थामा का मन्दिर बनवाया । ऐसी मान्यता है कि अश्वस्थामा आज भी अजर-अमर है और अपनी तपोस्थली व मोटे महादेव मंदिर में आज भी पूजा अर्चना करने आते हैं । तभी तो समूचे क्षेत्र को अश्वस्थामा का मन्दिर आस्था और विश्वास में समेटे हुए है । कहते हैं कि महाभारत काल में पांडव अज्ञातवास के दौरान यहाँ टिके थे। जनपद फतेहपुर के मुख्य पर्यटक स्थलों के रूप में विख्यात पांडवकालीन प्राचीन मंदिर बाबा अश्वस्थामा धाम , सिद्ध पीठ मोटे महादेव मंदिर असोथर के दक्षिण में स्थित है।

असोथर के उत्तर में लगभग 3 किमी दूरी पर स्थिति बौंडर ग्राम से प्राचीन कालीन भगवान बलराम जी जिनके प्रति स्थानीय निवासी बलभद्र स्वामी महाराज तथा भात बाबा के नाम से आस्था प्रकट करते है के मंदिर के अवशेष प्राप्त हुए हैं। जिसे संभवतः मध्यकाल में ध्वस्त कर दिया गया था। जिनके अवशेष के रूप में खंडित मूर्तियां, खंडित कालकृतियों अभी भी वहां मौजूद हैं जो आज भी इस क्षेत्र के लोगों के आस्था का प्रमुख केंद्र है।