असोथर

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

असोथर कस्बा असोथर जनपद फतेहपुर मुख्यालय से ३० किलोमीटर और नेशनल हाईवे थरियांव से १२ किलोमीटर कि दूरी पर यमुना नदी में किनारे पर फतेहपुर जनपद के मुख्यालय के दक्षिणी सीमा पर स्थित है। ११वी शताब्दी के मध्य राजा भगवंत राय खींची जी ने इसे बसाया था। गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वस्थामा ने महाभारत काल में ब्रम्हास्त्र पाने के लिए यहीं पर आकर तपस्या की थी , तभी से इस बस्ती का नाम असुफल हो गया जो कालान्तर में असोथर के नाम से जाने जाना लगा । खीची वंश के राजाओं में राजा भगवंत राय ने अश्वस्थामा का मन्दिर बनवाया । ऐसी मान्यता है कि अश्वस्थामा आज भी अजर - अमर है और अपनी तपोस्थली व मोटे महादेव मंदिर में आज भी पूजा अर्चना करने आते हैं । तभी तो समूचे क्षेत्र को अश्वस्थामा का मन्दिर आस्था और विश्वास में समेटे हुए है । कहते हैं कि महाभारत काल में पांडव अज्ञातवास के दौरान यहाँ टिके थे। जनपद फतेहपुर के मुख्य पर्यटक स्थलों के रूप में विख्यात पांडवकालीन प्राचीन मंदिर बाबा अश्वस्थामा धाम , सिद्ध पीठ मोटे महादेव मंदिर असोथर के दक्षिण में स्थित है।