असिक्नी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

स्रोत :- नंद मौर्य राजवंश असिक्नी पंचजन्य,वीरण, प्रजापति की कन्या थी। उसका विवाह दक्ष से हुआ था। यह शिवपुराण मेंं एक पात्र है ।


कथा[संपादित करें]

प्रजापति दक्ष ने मानसिक सृष्टि की उत्पत्ति की। लेकिन अनेक वर्ष बीत जाने के बाद भी उसमें कोई वृद्धि नहीं हुई तो दक्ष ने अपने पिता ब्रह्मा से कहा कि सृष्टि की वर्द्धि नही हो रही है। इस पर ब्रह्मा जी ने कहा कि अब तुम मैथुनजनित सृष्टि की रचना करो। इसके लिए तुम वीरण प्रजापति की पुत्री असिक्नी से विवाह करो। उस परम सुंदरी से सृष्टि का विस्तार करो। इस तरह दक्ष ने उससे विवाह किया व उससे मैथुनजनित सृष्टि प्रारम्भ की। असिक्नी के गर्भ से दस हजार पुत्र उत्पन्न हुए। वे हर्यश्व कहलाए।

प्रसंग[संपादित करें]

यह प्रसंग शिवपुराण के रूद्र संहिता के सती खण्ड के अध्याय तेरह में है, जहाँ इसका विस्तार से वर्णन है।

यह भी देखो[संपादित करें]

गुणनिधि

यज्ञदत्त

संदर्भ[संपादित करें]

1. "संक्षिप्त शिवपुराण", गीताप्रेस गोरखपुर