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अवधेश प्रताप सिंह

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कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह (1888 - 1967) भारत के एक राजनेता एवं भारतीय स्वतन्त्रता सेनानी थे। स्वतंत्रता के बाद उन्होंने विंध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में का नेतृत्व किया। बाद में वह संविधान सभा के लिए मनोनीत किए गए थे।

परिचय एवं राजनैतिक सफर[संपादित करें]

कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह का जन्म 1888 ई. को मध्य प्रदेश के सतना ज़िले में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद से कानून की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे रीवा रियासत की सेना में भर्ती हो गए। वहां वे कैप्टन और कुछ समय तक मेजर भी रहे।

शीघ्र ही रियासत की नौकरी त्यागकर उन्होंने राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जैसे क्रान्तिकारियों से संपर्क किया और कुछ रियासतों के नरेशों से मिलकर अंग्रेज़ों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह की योजना बनाई। परंतु समय से पहले भेद खुल जाने पर इसमें सफलता नहीं मिली।

अवधेश प्रताप सिंह इसके बाद कांग्रेस में सम्मिलित हो गए और 1921 से 1942 तक के आंदोलनों में लगभग चार वर्ष जेलों में बंद रहे। उन्होंने देशी रियासतों में जनतंत्र की स्थापना और समाज उत्थान के लिए निरंतर काम किया।

स्वतंत्रता के बाद 1948 वह विंध्य प्रदेश की स्थापना पर, उन्होंने (1948 से 1949) तक पहले मुख्यमंत्री के रूप में नेतृत्व किया, और बाद में वह विंध्य प्रदेश राज्य से भारतीय संविधान सभा के सदस्य मनोनीत किए गए। उन्हें (1952 से 1960) तक राज्यसभा के सदस्य चुना गया था।

17 जून 1967 को उनका निधन हो गया। उनकी राजनीतिक विरासत उनके पुत्र गोविन्द नारायण सिंह, ने संभाली, जिन्होंने मध्य प्रदेश के 5वें मुख्यमंत्री के रूप में नेतृत्व किया।

उनके सम्मान स्वरूप में रीवा विश्वविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया ग्या हैं।