अवटु अल्पक्रियता

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
Hypothyroidism
वर्गीकरण एवं बाह्य साधन
Thyroxine-2D-skeletal.png
Thyroxine (T4) normally produced in 20:1 ratio to triiodothyronine (T3)
आईसीडी-१० E03.9
आईसीडी- 244.9
डिज़ीज़-डीबी 6558
ईमेडिसिन med/1145 
एम.ईएसएच D007037

हाइपोथायरायडिज्म या अवटु अल्पक्रियता या "जड़मानवता" मनुष्य और जानवरों में एक रोग की स्थिति है जो थायरॉयड ग्रंथि से थायरॉयड हॉर्मोन के अपर्याप्त उत्पादन के कारण होती है। अवटुवामनता (Cretinism) हाइपोथायरायडिज्म का ही एक रूप है जो छोटे बच्चों में पाया जाता है।

कारण[संपादित करें]

सामान्य जनसंख्या का लगभग तीन प्रतिशत भाग हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित है।[1] कुछ कारक जैसे आयोडीन की कमी या आयोडीन-131 के संपर्क में आने से इसका ख़तरा बढ़ जाता है।

हाइपोथायरायडिज्म के कई कारण हैं। इतिहास में और वर्तमान में कई विकसित देशों में, आयोडीन की कमी दुनिया भर में हाइपोथायरायडिज्म का सबसे आम कारण है। जिन व्यक्तियों में आयोडीन पर्याप्त मात्रा में होता है, उनमें हाइपोथायरायडिज्म अधिकतर हाशिमोटो थायरोडिटिस के कारण होता है, या थायरॉयड ग्रंथि की कमी के कारण या हाइपोथेलेमस या पीयूष ग्रंथि में से किसी एक के हॉर्मोन की कमी के कारण होता है।

हाइपोथायरायडिज्म प्रसव पश्चात थायरोडिटिस (postpartum thyroiditis) के परिणामस्वरूप भी हो सकता है, यह एक ऐसी स्थिति है जो लगभग 5% महिलाओं को बच्चे को जन्म देने के बाद एक वर्ष के भीतर प्रभावित करती है।

पहली प्रावस्था प्रारूपिक रूप से हाइपोथायरायडिज्म होती है। इसके बाद या तो थायरॉयड अपनी सामान्य अवस्था में लौट जाती है या महिला में हाइपोथायरायडिज्म विकसित हो जाता है। वे महिलाएं जिनमें प्रसव पश्चात थायरोडिटिस से सम्बंधित हाइपोथायरायडिज्म होता है, ऐसी महिलाओं में प्रत्येक पांच में से एक महिला स्थायी रूप से हाइपोथायरायडिज्म का शिकार हो जाती है जिसे जिन्दगी भर इसके उपचार की जरुरत होती है।

हाइपोथायरायडिज्म कभी कभी आनुवंशिकी के परिणामस्वरूप भी होता है, कभी कभी यह अलिंग गुणसूत्र (autosomal) पर अप्रभावी लक्षण (recessive) के रूप में उपस्थित होता है।

हाइपोथायरायडिज्म पालतू कुत्तों में एक अधिक सामान्य यौन रोग है, कुछ विशिष्ट नस्लों में इसकी निश्चित पूर्व प्रवृति पायी जाती है।[2]

अस्थायी हाइपोथायरायडिज्म वोल्फ-शैकोफ़ प्रभाव (Wolff-Chaikoff effect) के कारण हो सकता है। आयोडीन की बहुत उच्च मात्रा का उपयोग अस्थायी रूप से हाइपोथायरायडिज्म के इलाज के लिए किया जा सकता है, विशेष रूप से ऐसा आपातकालीन स्थिति में किया जाता है।

हालांकि आयोडीन थायरॉयड होरमोन के लिए एक सबस्ट्रेट है, इसके उच्च स्तर थायरॉयड ग्रंथि को भोजन के साथ कम मात्रा में आयोडीन लेने के संकेत देते हैं, जिससे हॉर्मोन का उत्पादन कम हो जाता है।

हाइपोथायरायडिज्म को अक्सर इसकी उत्पत्ति के अंग के द्वारा वर्गीकृत किया जाता है:[3][4]

प्रकार उत्पत्ति विवरण
प्राथमिक थाइरॉयड ग्रंथि सबसे सामान्य प्रकारों में शामिल हैं हाशिमोटो थायरोडिटिस (एक स्वप्रतिरोधी रोग) और हाइपरथायरायडिज्म के ईलाज के लिए रेडियोआयोडीन थेरेपी.
द्वितीयक पीयूष ग्रंथि यह तब होता है जब पीयूष ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में थायरॉयड उद्दीपक हॉर्मोन (thyroid stimulating hormone (TSH)) का निर्माण नहीं करती है, यह हॉर्मोन थायरॉयड ग्रंथि को पर्याप्त थायरोक्सिन और ट्राईआयोडोथायरोनिन (thyroxine and triiodothyronine) के उत्पादन के लिए प्रेरित करता है। यद्यपि द्वितीयक हाइपोथायरायडिज्म के प्रत्येक मामले में स्पष्ट कारण नहीं होता है, यह आमतौर पर पीयूष ग्रंथि (pituitary gland) की क्षति के कारण होता है, साथ ही किसी गांठ, विकिरण, या शल्य चिकित्सा के कारण भी हो सकता है।[5]
तृतीयक हाइपोथेलेमस यह तब होता है जब हाइपोथेलेमस पर्याप्त मात्रा में थायरोट्रोपिन -रिलीजिंग हॉर्मोन (thyrotropin-releasing hormone (TRH)) का उत्पादन नहीं कर पाती है। TRH पीयूष ग्रंथि को थायरोट्रोपिन (thyrotropin) (TSH) के उत्पादन के लिए उद्दीप्त करता है। इसलिए इसे हाइपोथेलेमिक-पिट्युट्री-एक्सिस हाइपोथायरायडिज्म (hypothalamic-pituitary-axis hypothyroidism) भी कहा जा सकता है।

सामान्य मनोवैज्ञानिक संघ (General psychological associations)[संपादित करें]

हाइपोथायरायडिज्म लिथियम आधारित मूड स्थिरीकारकों (lithium-based mood stabilizers) के कारण हो सकता है, जिनका उपयोग आमतौर पर द्विध्रुवीय विकार (bipolar disorder) के उपचार के लिए किया जाता है (जिसे पहले मेनियक अवसाद (manic depression) के रूप में जाना जाता था)।

इसके अतिरिक्त, हाइपोथायरायडिज्म और मनोरोग के लक्षणों से युक्त रोगियों का निदान निम्न के साथ भी किया जा सकता है:[6]

लक्षण[संपादित करें]

वयस्कों में, हाइपोथायरायडिज्म निम्नलिखित लक्षणों से सम्बंधित होता है:[5][7][8]

प्रारम्भिक लक्षण[संपादित करें]

बाद में दिखाई देने वाले लक्षण[संपादित करें]

कम सामान्य लक्षण[संपादित करें]

नैदानिक परीक्षण[संपादित करें]

प्राथमिक हाइपोथायरायडिज्म के निदान के लिए, कई डॉक्टर पीयूष ग्रंथि के द्वारा उत्पन्न साधारण रूप से थायरॉयड उद्दीपक हॉर्मोन (TSH) का माप करते हैं। TSH के उच्च स्तर इंगित करते हैं कि थायरॉयड ग्रंथि थायरॉयड हॉर्मोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर रही है (मुख्य रूप से थायरोक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3)) की कम मात्रा। हालांकि, TSH का मापन द्वितीयक और तृतीयक हाइपोथायरायडिज्म का पता लगाने में असफल रहता है, इस प्रकार से यदि TSH सामान्य है और फिर भी हाइपोथायरायडिज्म का संदेह है तो निम्न परीक्षणों की सलाह दी जाती है:

  • मुक्त ट्राईआयोडोथायरोनिन (fT3)
  • मुक्त लेवोथायरोक्सिन (fT4)
  • कुल T3
  • कुल T4

इसके अतिरिक्त, निम्नलिखित मापन की आवश्यकता भी हो सकती है:

  • 24 घंटे यूरीन मुक्त T3[17]
  • एंटीथायरॉयड प्रतिरक्षी-स्व प्रतिरोधी रोगों के प्रमाण के लिए जो संभवतया थायरॉयड ग्रंथि को क्षति पहुंचा रहें हैं।
  • सीरम कोलेस्ट्रॉल - जिसकी मात्रा हाइपोथायरायडिज्म में बढ़ सकती है।
  • प्रोलेक्टिन -पीयूष के कार्य के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध परीक्षण के रूप में.
  • एनीमिया के लिए परीक्षण, फेरीटिन सहित
  • शरीर का आधारभूत तापमान

उपचार[संपादित करें]

हाइपोथायरायडिज्म का उपचार थायरोक्सिन (L-T4) ट्राईआयोडोथायरोनिन (L-T3) के लेवोरोटेटरी रूपों के साथ किया जाता है। कृत्रिम रूप से संश्लेषित और जंतुओं से व्युत्पन्न दोनों प्रकार की गोलियां उपलब्ध हैं और अतिरिक्त थायरॉयड हॉर्मोन की आवश्यकता के समय मरीजों को इनकी सलाह दी जाती है। थायरॉयड हार्मोन को दैनिक रूप से लिया जाता है और डॉक्टर सही खुराक को बनाये रखने के लिए रक्त के स्तर पर नियंत्रण रखते हैं। थायरॉयड प्रतिस्थापन थेरेपी में कई भिन्न उपचार प्रोटोकॉल हैं:

T4 Only
इस उपचार में केवल कृत्रिम लेवोथायरोक्सिन को पूरक के रूप में दिया जाता है।

यह वर्तमान में मुख्यधारा चिकित्सा में मानक उपचार है।[18]

T4 and T3 संयोजन में
इस उपचार प्रोटोकॉल में कृत्रिम L-T4 और L-T3 दोनों का एक साथ संयोजन में नियंत्रण किया जाता है।[19]
निर्जलीकृत थायरॉयड निष्कर्ष
निर्जलीकृत थायरॉयड निष्कर्ष एक जंतु आधारित थायरॉयड निष्कर्ष है, ज्यादातर इसे सूअर से निष्कर्षित किया जाता है। यह एक संयोजन चिकित्सा भी है, जिसमें L-T4 and L-T3 के प्राकृतिक रूप शामिल हैं।[20]

उपचार को लेकर विवाद[संपादित करें]

थायरॉयड थेरेपी में वर्तमान मानक उपचार केवल लेवोथायरोक्सिन है और अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ़ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलोजिस्ट (AACE) के अनुसार निर्जलीकृत थायरॉयड हॉर्मोन, थायरॉयड हॉर्मोन के संयोजन, या ट्राईआयोडोथायरोनिन का उपयोग सामान्य रूप से प्रतिस्थापन थेरेपी के लिए नहीं किया जाना चाहिए.[18] फिर भी, इस बात पर कुछ विवाद है कि यह उपचार प्रोटोकॉल अनुकूल है या नहीं और हाल ही अध्ययनों ने कुछ विरोधी परिणाम प्रस्तुत किये हैं।

हाल ही में किये गए दो अध्ययन जिनमें संश्लेषित T4 की तुलना संश्लेषित T4 + T3 से की गयी है, दर्शाते हैं कि " संयोजन थेरेपी से अनुभूति और मूड दोनों में सुधार हुए हैं।[19][21]एक और अध्ययन जिसमें संश्लेषित T4 और निर्जलीकृत थायरॉयड निष्कर्ष की तुलना की गयी, दर्शाते हैं कि जब विशिष्ट मरीजों को संश्लेषित T4 से बदल कर निर्जलीकृत थायरॉयड निष्कर्ष दिया गया तब सभी लक्षणों की श्रेणियों में सुधार देखा गया.[20]

हालांकि, अन्य अध्ययनों में देखा गया कि जिन लोगों को संयोजन थेरेपी दी गयी और संभवतया अनैदानिक हाइपोथायरायडिज्म से बीमार व्यक्ति में, मानसिक क्षमता और मूड में किसी भी प्रकार का सुधार नहीं देखा गया.[22] साथ ही, 2007 में नौ नियंत्रित अध्ययनों के विश्लेषण, जिन्हें बाद में प्रकाशित किया गया, उनमें मनोवैज्ञानिक लक्षणों पर प्रभाव में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया.[23]

कई चिकित्सक T3 के उपयोग के बारे में मुद्दे उठाते हैं क्योंकि इसका अर्द्ध आयु काल कम होता है।

खुद T3 को जब उपचार के रूप में प्रयुक्त किया जाता है, थायरॉयड हॉर्मोन के स्तर में एक दिन में बार बार उतार चढ़ाव आते हैं और संयुक्त T3/T4 थेरेपी के साथ हर दिन बहुत अधिक परिवर्तन निरंतर होता रहता है।[24]

उपनैदानिक हाइपोथायरायडिज्म[संपादित करें]

उपनैदानिक हाइपोथायरायडिज्म तब होता है जब थायरोट्रोपिन (TSH) के स्तर बढ़ जाते हैं लेकिन थायरोक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) के स्तर सामान्य रहते हैं।[1] इसकी व्यापकता की रेंज का अनुमान 3-8% लगाया गया है जो उम्र के साथ बढ़ता है; यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक सामान्य है।[25]

प्राथमिक हाइपोथायरायडिज्म में, TSH का स्तर उंचा होता है और T4 और T3 का स्तर नीचा होता है।

अन्तः स्रावी वैज्ञानिक हैरान हैं क्योंकि TSH आमतौर पर बढ़ता है जब T4 और T3 के स्तर गिर जाते हैं। TSH थायरॉयड ग्रंथि को और अधिक हार्मोन बनाने के लिए के लिए प्रेरित करता है। अन्तः स्रावी वैज्ञानिक इस बात के लिए सुनिश्चित नहीं हैं कि उपनैदानिक थायरायडिज्म कोशिकाओं की उपापचय दर को कैसे प्रभावित करता है (और अंततः शरीर के अंगों को) क्योंकि सक्रिय हॉर्मोनों के स्तर उपयुक्त होते हैं। कुछ लोगों ने प्रस्तावित किया कि उपनैदानिक हाइपोथायरायडिज्म का ईलाज लेवोथायरोक्सिन से किया जा सकता है, यह हाइपोथायरायडिज्म के लिए प्रारूपिक उपचार हो सकता है, लेकिन इसके लाभ या नुकसान स्पष्ट नहीं हैं। संदर्भ की रेंज पर भी विवाद उठे हैं। अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ़ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलोजिस्ट (ACEE) 0.45–4.5 mIU/L की सलाह देते हैं, जब इसकी रेंज नीचे 0.1 तक और ऊपर 10 mIU/L तक हो, इसके लिए नियंत्रण की आवश्यकता होती है लेकिन उपचार की नहीं.[26] हाइपोथायरायडिज्म और जरुरत से ज्यादा उपचार में हमेशा जोखिम रहता है।

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि उपनैदानिक हाइपोथायरायडिज्म की उपचार की जरुरत नहीं होती है।

कोकरेन कोलाब्रेशन के द्वारा मेटा-विश्लेषण में पाया गया कि "लिपिड प्रोफाइल के कुछ मानकों और बाएं निलय के कार्यों" के अलावा थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट का कोई लाभ नहीं है।[27]

हाल ही में किये गए एक और अध्ययन में यह जांच की गयी कि क्या उपनैदानिक हाइपोथायरायडिज्म हृद-संवहनी रोग के जोखिम को भी बढ़ा सकता है, जैसा कि पहले कहा गया है,[28] इस दौरान एक संभव मामूली वृद्धि पाई गयी और सुझाव दिया गया कि कोरोनरी ह्रदय रोग के सम्बन्ध में आगे ऐसे अध्ययन किये जाने चाहिए, "इससे पहले कि इस विषय में कोई निर्णय दिया जाये."[29]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Jack DeRuiter (2002). Thyroid Pathology (PDF). पृ॰ 30. मूल (PDF) से 7 अक्तूबर 2009 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 24 फ़रवरी 2010. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> अमान्य टैग है; "Auburn University" नाम कई बार विभिन्न सामग्रियों में परिभाषित हो चुका है
  2. Brooks W (1 जून 2008). "Hypothyroidism in Dogs". The Pet Health Library. VetinaryPartner.com. मूल से 15 फ़रवरी 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 28 फ़रवरी 2008.
  3. Simon H (19 अप्रैल 2006). "Hypothyroidism". University of Maryland Medical Center. मूल से 24 अप्रैल 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 28 फ़रवरी 2008.
  4. Department of Pathology (13 जून 2005). "Pituitary Gland -- Diseases/Syndromes". Virginia Commonwealth University (VCU). मूल से 6 फ़रवरी 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 28 फ़रवरी 2008.
  5. American Thyroid Association (ATA) (2003). Hypothyroidism Booklet (PDF). पृ॰ 6. मूल (PDF) से 26 जून 2003 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 24 फ़रवरी 2010.
  6. Heinrich TW, Grahm G (2003). "Hypothyroidism Presenting as Psychosis: Myxedema Madness Revisited". Primary care companion to the Journal of clinical psychiatry. 5 (6): 260–266. PMC 419396. PMID 15213796.
  7. साँचा:MedlinePlus - लक्षणों की सूची देखें
  8. हाइपोथायरायडिज्म- इन-डेप्थ रिपोर्ट." Archived 20 दिसम्बर 2009 at the वेबैक मशीन.दी न्यूयॉर्क टाइम्स. Archived 20 दिसम्बर 2009 at the वेबैक मशीन.कॉपीराइट 2008 Archived 20 दिसम्बर 2009 at the वेबैक मशीन.
  9. "Hypothyroidism" (PDF). American Association of Clinical Endocrinologists. मूल (PDF) से 24 दिसंबर 2005 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 24 फ़रवरी 2010.
  10. Yeum CH, Kim SW, Kim NH, Choi KC, Lee J (2002). "Increased expression of aquaporin water channels in hypothyroid rat kidney". Pharmacol. Res।. 46 (1): 85–8. PMID 12208125. डीओआइ:10.1016/S1043-6618(02)00036-1. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद)सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  11. थायराइड और वजन. Archived 10 अप्रैल 2012 at the वेबैक मशीन.डी अमेरिकन थायरोइड एसोसिएशन Archived 10 अप्रैल 2012 at the वेबैक मशीन.
  12. हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म का उपचार नहीं किये जाने पर संज्ञानात्मक क्रिया
  13. Hofeldt FD, Dippe S, Forsham PH (1972). "Diagnosis and classification of reactive hypoglycemia based on hormonal changes in response to oral and intravenous glucose administration" (PDF). Am. J. Clin. Nutr. 25 (11): 1193–201. PMID 5086042. मूल से 30 जून 2007 को पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि 24 फ़रवरी 2010.सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  14. प्राथमिक हाइपोथायरायडिज्म में विटामिन बी 12 की कमी आम है।
  15. क्रेकिंग द मेटाबोलिक कोड (खंड 2 का 1) जेम्स बी लवाले के द्वारा R.Ph C.C.N. N.D, आई एस बी एन 1442950390, पृष्ठ 100
  16. मनुष्य के वृषण कोष और पीयूष गोनेड़ोटरोपिन पर थायरोइड की स्थिति के प्रभाव.
  17. बेसिअर डब्ल्यू हरतोघे जे एकहूट डब्ल्यू थायराइड अपर्याप्तता. क्या TSH एकमात्र नैदानिक उपकरण है? J Nutr Environ ed. 2000;10:105–113। "Thyroid insufficiency. क्या TSH एकमात्र नैदानिक उपकरण है?" Archived 7 जून 2011 at the वेबैक मशीन.
  18. American Association of Clinical Endocrinologists (2002). "Medical Guidelines For Clinical Practice For The Evaluation And Treatment Of Hyperthyroidism And Hypothyroidism" (PDF). Endocrine Practice. 8 (6): 457–469. PMID 15260011. मूल (PDF) से 24 दिसंबर 2005 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 24 फ़रवरी 2010. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  19. Bunevicius R, Kazanavicius G, Zalinkevicius R, Prange AJ (1999). "Effects of thyroxine as compared with thyroxine plus triiodothyronine in patients with hypothyroidism". N. Engl. J. Med. 340 (6): 424–9. PMID 9971866. डीओआइ:10.1056/NEJM199902113400603. मूल से 18 फ़रवरी 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 24 फ़रवरी 2010. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद)सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  20. Baisier, W.V.; Hertoghe, J.; Eeckhaut, W. (2001). "Thyroid Insufficiency. Is Thyroxine the Only Valuable Drug?". Journal of Nutritional and Environmental Medicine. 11 (3): 159–66. डीओआइ:10.1080/13590840120083376. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद)सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)-Abstract Archived 7 जून 2011 at the वेबैक मशीन.
  21. Robertas Bunevicius, Arthur J. Prange Jr. (2000). "Mental improvement after replacement therapy with thyroxine plus triiodothyronine: relationship to cause of hypothyroidism". The International Journal of Neuropsychopharmacology. 3 (2): 167–174. PMID 11343593. डीओआइ:10.1017/S1461145700001826. मूल से 29 जून 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 24 फ़रवरी 2010. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  22. Siegmund W, Spieker K, Weike AI; एवं अन्य (2004). "Replacement therapy with levothyroxine plus triiodothyronine (bioavailable molar ratio 14 : 1) is not superior to thyroxine alone to improve well-being and cognitive performance in hypothyroidism". Clin. Endocrinol. (Oxf). 60 (6): 750–7. PMID 15163340. डीओआइ:10.1111/j.1365-2265.2004.02050.x. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद); Explicit use of et al. in: |author= (मदद)सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  23. Joffe RT, Brimacombe M, Levitt AJ, Stagnaro-Green A (2007). "Treatment of clinical hypothyroidism with thyroxine and triiodothyronine: a literature review and metaanalysis". Psychosomatics. 48 (5): 379–84. PMID 17878495. डीओआइ:10.1176/appi.psy.48.5.379.सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  24. Saravanan P, Siddique H, Simmons DJ, Greenwood R, Dayan CM (2007). "Twenty-four hour hormone profiles of TSH, Free T3 and free T4 in hypothyroid patients on combined T3/T4 therapy". Exp. Clin. Endocrinol. Diabetes. 115 (4): 261–7. PMID 17479444. डीओआइ:10.1055/s-2007-973071. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद)सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  25. Fatourechi V (2009). "Subclinical hypothyroidism: an update for primary care physicians". Mayo Clinic Proceedings. Mayo Clinic. 84 (1): 65–71. PMC 2664572. PMID 19121255. |access-date= दिए जाने पर |url= भी दिया जाना चाहिए (मदद)
  26. "Subclinical Thyroid Disease". Guidelines & Position Statements. The American Association of Clinical Endocrinologists. 11 जुलाई 2007. मूल से 4 जून 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 जून 2008.
  27. Villar H, Saconato H, Valente O, Atallah A (2007). "Thyroid hormone replacement for subclinical hypothyroidism". Cochrane database of systematic reviews (Online) (3): CD003419. PMID 17636722. डीओआइ:10.1002/14651858.CD003419.pub2.सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  28. Biondi B, Palmieri EA, Lombardi G, Fazio S (2002). "Effects of subclinical thyroid dysfunction on the heart". Ann. Intern. Med. 137 (11): 904–14. PMID 12458990. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद)सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  29. Ochs N, Auer R, Bauer DC; एवं अन्य (2008). "Meta-analysis: subclinical thyroid dysfunction and the risk for coronary heart disease and mortality". Ann. Intern. Med. 148 (11): 832–45. PMID 18490668. मूल से 4 मार्च 2009 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 24 फ़रवरी 2010. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद); Explicit use of et al. in: |author= (मदद)सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)

अग्रिम पठन[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

साँचा:Endocrine pathology