अलोयस यिरासेक

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अलोयस यिरासेक

अलोयस यिरासेक (Alois Jirásek , १८५१-१९३०) चेक भाषा और इतिहास के अध्यापक थे।

१९०९ में अपने सेवानिवृत्ति तक यिरासेक सेकेण्डरी स्कूल में अध्यापक थे। साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिये उन्हें 1918, 1919, 1921 और 1930 में नामांकित किया गया था। [1]

कृतियाँ[संपादित करें]

उनकी मुख्य कृतियॉं ( उपन्यास, कहानियाँ और नाटक ) मुख्यत: ऐतिहासिक प्रत्यंगो पर हैं। हुसित् युग और ओदोलन विषयक उपन्यास 'हमारे विरूद्ध संसार', 'काले युग के दौरान में', मध्ययुग के प्रगतिशील तत्वों पर प्रकश डालते हैं। अन्य कृतियाँ, जैसे 'सीमारक्षक लोग', 'सभी के विरूद्ध' आदि उपन्यासों में चेक विदेशी अत्याचार के विरूद्ध लड़ते दिखाई देते हैं। यिरासेक का महत्व इस बात में है कि उन्होने ऐतिहासिक यथार्थवादी उपन्यास लिखने का प्रारंम्भ किया। उनकी कृतियों में चेक जनता की प्रशंसा की गयी है।

'अन्य कृतियाँ : फ० ल० वेक (उपन्यास), हमारे यहाँ (उपन्यास), दर्शन इतिहास (कहानियाँ ), लालटेन (नाटक ), यन जिसका (नाटक ),यन हुस (नाटक ) आदि।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Jirásek, Alois" New International Encyclopedia. 1905.