अलीवाल की लड़ाई
दिखावट
| अलीवाल की लड़ाई | |||||||
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सिख फ़ौज-ए-ऐन पैदल सेना और तोपखाने के विरुद्ध ब्रिटिश 16वीं लांसर्स का धावा | |||||||
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| योद्धा | |||||||
| ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी | सिख साम्राज्य) | ||||||
| सेनापति | |||||||
| लेफ्टिनेंट-जनरल हैरी स्मिथ | रणजोध सिंह मजीठिया | ||||||
| शक्तियाँ | |||||||
| 10000 सैनिक, 28-32 तोपें | 15000 सैनिक, 69-70 तोपें | ||||||
| हताहत और हानि | |||||||
| 589-850 मृत | 2000 मृत, 67 तोपें नष्ट | ||||||
अलीवाल की लड़ाई 28 जनवरी 1846 को वर्त्तमान पंजाब, भारत में ब्रिटिश और सिख सेनाओं के बीच हुई थी। ब्रिटिश सेना का नेतृत्व सर हैरी स्मिथ ने किया था जबकि सिखों का नेतृत्व रणजोध सिंह मजीठिया ने किया था। इस युद्ध में ब्रिटेन की विजय को प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध का निर्णायक मोड़ भी माना जाता है।[1]
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ J D Cunningham (1918). History Of The Sikhs.