अर्चना भार्गव

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अर्चना भार्गव (जन्म: 1955) युनाइटेड बैंक ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रह चुकी हैं। उन्होने 23 अप्रैल 2013 को यह कार्यभार ग्रहण किया[1][2]तथा 20 फ़रवरी 2014 में उन्होने इस पद से इस्तीफा दे दिया।[3]

शिक्षा एवं करियर[संपादित करें]

भार्गव ने मिरांडा हाउस, दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इनकी स्कूल की शिक्षा जीसस एंड मैरी कॉन्वेंट, नई दिल्ली से हुई। वे राष्ट्रीय विज्ञान प्रतिभा छात्रवृत्ति धारक रही हैं। उन्होंने 1977 में पंजाब नैशनल बैंक में प्रबंधन प्रशिक्षु के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। पंजाब नैशनल बैंक में 34 साल की अनुकरणीय कैरियर के पश्चात वृहद कॉरपोरेट क्रेडिट, प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र, योजना एवं विकास, वित्तीय समावेशन जैसे मुख्य क्षेत्रों में कार्य करते हुए उनकी अप्रैल, 2011 में केनरा बैंक के कार्यपालक निदेशक के रूप में पदोन्नति हुई। कार्यपालक निदेशक के रूप में श्रीमती भार्गव ने विभिन्न नीतिगत विभागों जैसे अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग, वृहद कॉरपोरेट क्रेडिट, प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र, जोखिम प्रबंधन, निरीक्षण एवं लेखा परीक्षा, सामान्य प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, केनरा बैंक के सभी नौ अनुषंगियों और अन्य विभागों में कार्यनिष्पादन किया। उन्होने विदेश के यू.के में भी कार्य किया और यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका और मध्यपूर्व और सूदुर पूर्व एशिया जैसै कई महाद्वीपों की व्यापक रूप से यात्रा की। उन्होंने केनरा बैंक के कारोबार को ग्रेट ब्रिटेन सहित यूरोप के कई देशों और अफ़्रीक़ी महादेश में काफ़ी फैलाया।[4]उन्हें उत्कृष्ट कार्य निष्पादन के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों तथा मान्यता प्राप्त एजेंसियों से विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। समावेशी विकास को बढ़ाव देने हेतु वे निरन्तर प्रयत्नशील हैं।[5]

इस्तीफा[संपादित करें]

यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया [यूबीआइ]के बेकाबू हो चुके फंसे कर्जे [एनपीए] की वजह से तथा एनपीए पर लगाम लगाने में नाकाम रहने के कारण उन्होने 20 फ़रवरी 2014 में उन्होने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति [वीआरएस] के प्रस्ताव को सरकार ने स्वीकार भी कर लिया।[6]

सन्दर्भ[संपादित करें]