सामग्री पर जाएँ

अरावली

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
(अरावली पर्वतमाला से अनुप्रेषित)

अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक मानी जाती है। यह पर्वतमाला मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली तक फैली हुई है। राजस्थान में इसे कई स्थानों पर “आड़ावाला पर्वत” के नाम से भी जाना जाता है। भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार अरावली पर्वतमाला का निर्माण प्रीकैम्ब्रियन युग में हुआ था, यानी यह करोड़ों वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला है। यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रंखलाओं में भी गिना जाता है।[1]

अरावली केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय संतुलन की रीढ़ मानी जाती है। यह राजस्थान को उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम भागों में विभाजित करती है तथा थार मरुस्थल के विस्तार को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि अरावली पर्वतमाला नहीं होती, तो राजस्थान का रेगिस्तान हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक तेजी से फैल सकता था।

अरावली की कुल लंबाई लगभग 700 किलोमीटर है, जो गुजरात के पालनपुर से शुरू होकर दिल्ली की रायसीना पहाड़ियों तक जाती है। दिल्ली में स्थित राष्ट्रपति भवन भी अरावली की एक पहाड़ी पर बना है। अरावली का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में है, इसलिए इसे राजस्थान की जीवनरेखा भी कहा जाता है।[2]

अरावली का सबसे ऊंचा शिखर “गुरु शिखर” है, जो राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित माउंट आबू में है। इसकी ऊंचाई लगभग 1722 मीटर है। माउंट आबू राजस्थान का एकमात्र प्रमुख हिल स्टेशन है और अरावली क्षेत्र का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य, वन क्षेत्र और ठंडा मौसम बहुत सारे पर्यटकों को आकर्षित करता है।

अरावली पर्वतमाला प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। यहां संगमरमर, ग्रेनाइट, तांबा, जस्ता, सीसा और कई अन्य महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं। राजस्थान के कई खनन क्षेत्र अरावली क्षेत्र में ही हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में अवैध खनन और पत्थर कटाई ने इस पर्वतमाला को बहुत नुकसान पहुंचाया है। पर्यावरणविद लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि अगर अरावली का विनाश इसी तरह जारी रहा, तो इसका सीधा असर जलवायु, भूजल स्तर और पर्यावरण पर पड़ेगा।

अरावली क्षेत्र सदियों से भील जैसी जनजातियों का घर रहा है। यहां की संस्कृति, लोक परंपराएं और जीवनशैली प्रकृति से जुड़ी हुई हैं। अरावली की पहाड़ियों से कई महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम होता है, जिनमें बनास, लूनी और साबरमती प्रमुख हैं। ये नदियां राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में जल का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, अरावली का निर्माण मुख्य रूप से ग्रेनाइट, नीस, क्वार्टजाइट और शिस्ट जैसी कठोर चट्टानों से हुआ है। करोड़ों वर्षों तक अपरदन और अपक्षय की प्रक्रियाओं के कारण यह पर्वतमाला अब अवशिष्ट पर्वत के रूप में दिखाई देती है। वैज्ञानिक अक्सर इसकी तुलना अमेरिका की एप्लेशियन पर्वतमाला से भी करते हैं।

आज अरावली केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। बढ़ते शहरीकरण, अवैध निर्माण और माइनिंग के कारण इसके जंगल और पहाड़ तेजी से खत्म हो रहे हैं। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट को भी कई बार अरावली क्षेत्र में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बावजूद कई इलाकों में चोरी-छिपे खनन जारी है, जिससे पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंच रहा है।[3]

  1. "Aravalli Range".
  2. "Aravalli: Why India's ancient hills are at the centre of growing protests". www.bbc.com (ब्रिटिश अंग्रेज़ी भाषा में). 2025-12-22. अभिगमन तिथि: 2026-05-14.
  3. "Aravalli Illegal Mining: Supreme Court Ban के बाद भी क्यों नहीं रुक रही अरावली के पहाड़ों की लूट? ग्राउंड रिपोर्ट" (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). 2026-05-02. अभिगमन तिथि: 2026-05-14.