अभिधा

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अभिधा शब्द शक्ति का पहला प्रकार है जो शब्दों के शब्दकोशीय अर्थ का बोध कराती है। इसमें किसी शब्द का सामान्य अर्थ में प्रयोग होता है। जैसे 'सिर पर चढ़ाना' का अर्थ किसी चीज को किसी स्थान से उठाकर सिर पर रखना होगा।

भेद[संपादित करें]

अभिधा शब्द शक्ति के तीन भेद होते हैं-

  • रूढ़ि-"जब शब्द समुदाय-रूप में अर्थ का बोध कराए तो रूढ़ि होगी।"[1] इसमें शब्द के एक ही अर्थ का बोध होता है, जैसे-पौधा।
  • यौगिक- इसमें शब्द के अवयव से उसके अर्थ का बोध होता है। ये अवयव ही शब्द का सही अर्थ जानने में सहायक होते हैं। जैसे- 'भूपति', इसमें भू का अर्थ 'पृथ्वी' होगा तथा पति का अर्थ स्वामी होगा। किंतु इन अवयवों को मिला देने से 'भूपति' का अर्थ 'राजा' होगा।[2]
  • योगरूढ़ि- जब किसी शब्द का अर्थ उसके समूह की सहायता से प्राप्त हो तथा वह शब्द उसी अर्थ के लिए रूढ़ हो चुका हो, वहाँ अभिधा की योगरूढ़ि शक्ति का प्रयोग किया जाता है। जैसे- 'दशानन' शब्द दस सिर वाले 'रावण' के लिए रूढ़ हो चुका है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. डॉ. राजवंश सहाय, 'हीरा' (२००९). भारतीय साहित्यशास्त्र कोश. पटना: बिहार हिन्दी ग्रंथ अकादमी. पृ॰ ९२.
  2. डॉ. राजवंश सहाय, 'हीरा' (२००९). भारतीय साहित्यशास्त्र कोश. पटना: बिहार हिन्दी ग्रंथ अकादमी. पृ॰ ९२.