अब्दुल कदीर
अब्दुल कदीर हैदराबाद, तेलंगाना, भारत के एक पुलिस कांस्टेबल थे,[1] जिन्हें 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस दंगों के दौरान एक अन्य पुलिस अधिकारी एसीपी सत्तैया की हत्या का दोषी पाए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। जैसा कि 2017 में हिंदुस्तान टाइम्स में बताया गया था, "उन्होंने सांप्रदायिक दंगों के चरम के दौरान, जिसमें 200 लोग मारे गए थे, पुराने शहर के छत्रिनाका पुलिस स्टेशन में अपने सर्विस हथियार से सहायक पुलिस आयुक्त सत्तैया की गोली मारकर हत्या कर दी थी। यह घटना 8 दिसंबर 1990 को हुई थी। दो साल बाद, एक अदालत ने अब्दुल कदीर को हत्या का दोषी पाया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।"
कई मुस्लिम संगठनों ने स्वास्थ्य आधार पर उनकी रिहाई की अपील की थी – मधुमेह के परिणामस्वरूप उनके कारावास के दौरान उनके पैरों में से एक को काटना पड़ा था – लेकिन विभिन्न सरकारों द्वारा उनकी याचिकाओं को शुरू में खारिज कर दिया गया था। अंततः उन्हें 30 मार्च 2016 को पैरोल पर जेल से रिहा किया गया था।[2][3] खराब स्वास्थ्य के कारण 15 सितंबर 2017 को उनका निधन हो गया, और उनके जनाजे की नमाज हैदराबाद की मक्का मस्जिद में पढ़ी गई।
संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ "एसीपी सत्तैया हत्याकांड: अब्दुल कदीर की पत्नी ने 'अवैध हिरासत' के लिए सरकार पर मुकदमा किया". द टाइम्स ऑफ इंडिया. 2013-03-19.
- ↑ "पूर्व कांस्टेबल अब्दुल कदीर अंततः रिहा". सियासत.कॉम. 2016-03-23.
- ↑ "एसीपी की हत्या करने वाले पुलिस कांस्टेबल को एक महीने की पैरोल मिली". डेक्कन क्रॉनिकल. 27 July 2014.