अपशब्दों की प्रवृत्ति (क्रिकेट)

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अपशब्दों की प्रवृत्ति (स्लेजिंग) एक ऐसी शब्दावली है जिसका क्रिकेट में इस्तेमाल कर कुछ खिलाड़ी विपक्षी खिलाड़ी को अपमानित कर, या मौखिक तौर पर धमका कर फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसा करने का उद्देश्य प्रतिद्वंद्वी की एकाग्रता को भंग करने की कोशिश करना है, जिससे वो गलती या कमजोर प्रदर्शन करने को मजबूर हो। ऐसा करना काफी प्रभावी हो सकता है क्योंकि बल्लेबाज, गेंदबाज और कुछ खास क्षेत्ररक्षकों के काफी नजदीक होते हैं; परिस्थिति ठीक इसके विपरीत भी हो सकती है। इस तरह का अपमान प्रत्यक्ष तौर पर किया जा सकता है, या क्षेत्ररक्षक बल्लेबाज को सुनाने के उद्देश्य से उंची आवाज में आपस में बातचीत द्वारा भी ऐसा कर सकते हैं।

क्रिकेट की दुनिया में इस बात पर बहस चल रही है कि क्या इस तरह की चीजें खिलाड़ियों के दुर्व्यवहार को दर्शाती हैं, या एक हल्का-फुल्का मजाक मात्र हैं।[1] अपशब्दों को कई बार गाली-गलौज से भ्रमित कर लिया जाता है और हालांकि अपशब्दों के रूप में की गयी टिप्पणियां कभी-कभार मर्यादा की सीमा को लांघकर व्यक्तिगत भी हो सकती हैं, लेकिन आमतौर पर ऐसा कम ही होता है। आमतौर पर अपशब्द कई बार सामान्य मजाक, तो कई बार ध्यान बंटाने के लिए अपमान करने की कोशिश के रूप में होते हैं। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ इस तरह की कोशिश को 'मानसिक विघटन' करार देते हैं।

उत्पत्ति[संपादित करें]

इयान चैपल के मुताबिक, एक शब्द के तौर पर "स्लेजिंग (अपशब्द कहने की प्रवृत्ति)" के इस्तेमाल की शुरुआत एडीलेड ओवल में शेफील्ड शील्ड प्रतियोगिता में १९६३ या १९६४-६५ के दौरान हुई थी। चैपल के अनुसार एक महिला के सामने शपथ लेने वाले क्रिकेटर ने एक घटना पर "हथौड़े से मारने" (sledgehammer) की तरह प्रतिक्रिया दी थी। नतीजा ये हुआ कि विरोधियों को अपमानित करना या गंदी बातें कहना "अपशब्दों की प्रवृत्ति" के रूप में जाना जाने लगा।[2] यह शब्दावली भले ही हाल ही में गढ़ी गई हो, लेकिन इसका इस्तेमाल उतना ही पुराना है जितना खुद क्रिकेट, इतिहास के पन्नों में भी खिलाड़ियों के बीच मजाकिया बातचीत की चर्चा बेहद आम रही है।

बीबीसी के पैट मर्फी के मुताबिक: "मेरी समझ से इसकी शुरुआत साठ के दशक के मध्य में हुई है और ग्राहम कॉर्लिंग नाम का एक खिलाड़ी जो न्यू साउथ वेल्स और ऑस्ट्रेलिया के लिए गेंदबाजी की शुरुआत करता था।.. उसके बारे में कहा जाता था कि उसकी पत्नी का टीम के ही किसी दूसरे सदस्य के साथ प्रेम संबंध था और जैसे ही वो बल्लेबाजी करने आता था, क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम के खिलाड़ी पर्सी स्लेज का पुराना गाना व्हेन ए मैन लव्स ए वुमैन (When a Man Loves A Woman) गाने लगते थे।"[3]

कुछ यहूदी क्रिकेटरों को खास कर जूलियन वीनर और बेव लियोन को उनके खेलों के दौरान यहूदी-विरोधी अपशब्दों को झेलना पड़ता था।[4]

डब्ल्यू जी ग्रेस[संपादित करें]

19वीं सदी के इंग्लैंड के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक, अंग्रेजी बल्लेबाज विलियम गिलबर्ट ग्रेस मजाकिया लहजे में चुटकी लेने के लिए कुख्यात थे। एक बार क्लीन बोल्ड होने के बाद उन्होंने विकेट पर गिल्लियों को लगाया और कहा- "अंपायर आज हवा बहुत तेज चल रही है।" अंपायर ने जवाब दिया- "हां, सही कहा, पेवेलियन जाते समय अपनी टोपी का ख्याल रखें।"[5]

एक अन्य घटना के तहत वे पगबाधा आउट हो गए थे लेकिन वे मैदान छोड़ने को तैयार नहीं थे। उन्होंने तर्क दिया कि, "ये जो दर्शक आए हैं वे मेरी बल्लेबाजी देखने आए हैं न कि आपको गेंदबाजी करते देखने।" हालांकि शायद ग्रेस के अपशब्दों की प्रवृत्ति का सबसे बेहतरीन जवाब गेंदबाज चार्ल्स कॉर्टराइट द्वारा दिया गया था। ग्रेस को आउट करने की उनकी बार-बार की कोशिशें नाकाम होने और अंपायर द्वारा ग्रेस को आउट देने से इंकार करने से परेशान कॉटराइट ने आखिरकार ग्रेस के दो विकेटों को मैदान पर गिरा दिया। ग्रेस बड़े भारी मन से पेवेलियन की ओर लौटने लगे, तो कॉर्टराइट ने उन्हें विदा करते हुए कहा- "डॉक्टर साहब, आप क्या सही में जा रहे हैं? लेकिन एक स्टंप तो अभी भी खड़ा है।"[5]

विवियन रिचर्ड्स[संपादित करें]

वेस्ट इंडीज़ के बल्लेबाज विव रिचर्ड्स, स्वयं को अपशब्द कहने की हिम्मत करने वाले गेंदबाजों को सबक सिखाने के लिए मशहूर थे। रिचर्ड्स का इतना डर था कि कई कप्तानों ने तो अपने खिलाड़ियों को अपशब्द कहने पर ही पाबंदी लगा दी थी। हालांकि एक बार ग्लेमोर्गन के खिलाफ एक काउंटी मैच में ग्रेग थॉमस ने रिचर्ड्स को तब अपशब्द कहने की कोशिश की जब वे लगातार कई गेंदों को मारने में नाकामयाब रहे थे। थॉमस ने रिचर्ड्स से कहा था- "अगर आप हैरान हैं, सोच रहे हों तो आपको बता दूं कि ये लाल रंग की गोल गेंद है और ये करीब पांच आउंस वजनी है।" रिचर्ड्स ने थॉमस की अगली गेंद पर ऐसा प्रहार किया कि क्रिकेट मैदान के बाहर पास की एक नदी में चली गई। फिर गेंदबाज की ओर घूमते हुए उन्होंने कहा- "ग्रेग, चूंकि आप जानते हैं कि ये किस तरह दिखती है, इसलिए अब जाइए और उसे ढूंढ़ कर ले आइए।"[6]

मर्व ह्यूज[संपादित करें]

ऑस्ट्रेलिया में खेल के ज्यादातर स्तरों पर अपशब्दों की प्रवृत्ति आम है, लेकिन जिस एक ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी को अपशब्द कहने के मामले में खास महारथ हासिल थी, वे थे तेज गेंदबाज मर्व ह्यूज। उनकी धमकाने और आक्रामक गेंदबाजी की शैली में अक्सर मजाकिया टिप्पणियों और कटु गालियों का मिश्रण हुआ करता था। कई बार वे अपशब्द कहते-कहते अपमान भी करने लगते थे। हालांकि ह्यूज द्वारा अपशब्द कहने के कई अवसर रहे हैं जो यादगार कहे जा सकते हैं।

ऐसा ही एक मौका था जब ह्यूज पाकिस्तान के बल्लेबाज जावेद मियांदाद को गेंदबाजी कर रहे थे, तब बल्लेबाज ने ह्यूज से कहा था कि वो बस के एक मोटे बस कंडक्टर की तरह दिख रहे हैं। बस अगली ही गेंद पर ह्यूज ने मियांदाद को बोल्ड कर दिया और जश्न मनाने के लिए अपने साथी खिलाड़ियों की ओर दौड़ते हुए चिल्लाये, "कृप्या टिकट खरीदिए!"

हरभजन - साइमंड्स घटना (२00७-0८)[संपादित करें]

अपशब्द कहने की ये प्रवृत्ति २00७-0८ में भारतीय दल के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मीडिया की सुर्खी तब बनी, जब हरभजन सिंह पर एंड्रू सायमंडस पर कथित तौर पर नस्लीय टिप्पणी करने के आरोप लगे थे।[7] यह आरोप साबित नहीं हो सका और हरभजन पर लगी तीन मैचों की पाबंदी वापस ले ली गई।[8] इसकी जगह पर उन्हें लेवल २.८ के उल्लंघन (अपशब्ध और अपमानजक लेकिन नस्लीय टिप्पणी नहीं) का आरोप लगाया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार भी किया और उन पर मैच शुल्क के पचास फीसदी का जुर्माना लगाया गया। हालांकि बाद में अपील कमिश्नर ने कहा कि यदि उसे हरभजन के पुराने बर्ताव के बारे में जानकारी होती तो एक मैच की पाबंदी लगायी जाती।[9] सायमंड्स ने स्वीकार किया था कि उन्होंने ही दो खिलाड़ियों के बीच आक्रामक भाषा का प्रयोग कर अपशब्द कहने की शुरुआत की थी।[10]

अन्य खेल[संपादित करें]

हालांकि मौखिक तौर पर अपशब्द कहकर विरोधियों के ध्यान को बंटाने की कोशिश करीब-करीब सभी खेलों में बहुत आम है, लेकिन "अपशब्दों की प्रवृत्ति" शब्द अपने आप में क्रिकेट का एक हिस्सा बन चुका है। अन्य खेलों में कई बार मौखिक तौर पर अपशब्द कहने की अपनी शब्दावली होती है। उदाहरण के तौर पर, बास्केटबॉल में इसे फालतू बातें (trash talk) कहा जाता है और आइस हॉकी में इसे चहचहाना (chirping) कहा जाता है।[11] बेशक, मुक्केबाजी मुकाबले का तो यह लंबे समय से एक अभिन्न हिस्सा रहा है, जहां मुकाबले से पहले या उसके दौरान मुक्केबाज एक-दूसरे को मौखिक तौर पर अपशब्द कहते हैं और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देते हैं। ये आमतौर पर मुकाबले को जोरदार बनाकर मीडिया का ध्यान आकर्षित करने और ज्यादा संख्या में दर्शकों को जमा करने के मकसद से किया जाता है। मुहम्मद अली भी अपशब्द कहने के लिए काफी मशहूर थे, वे किसी राउंड में अपने विरोधी को मात देने के बाद काफी ऊंची आवाज में बोलते थे। हालांकि उनकी सबसे लोकप्रिय और थोड़ी गंभीर टिप्पणी थी, स्वयं को कैसियस क्ले कहने की हिम्मत करने वाले गिरे हुए विरोधी से दहाड़ कर पूछना, "मेरा नाम क्या है?"

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. बीबीसी स्पोर्ट: इंडिया बोर्ड प्रपोजस स्लेजिंग बेन .२ नवम्बर २00८ को प्राप्त किया गया।
  2. ग्राहम सील, दी लिंगों: लिसनिंग टू ऑस्ट्रेलिया इंग्लिश (यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स प्रेस, 1999, आईएसबीएन 086840-680-5): पृष्ठ 1१४१
  3. http://www.bbc.co.uk/iplayer/episode/b00lmytk/Yes_its_the_Ashes_11_07_2009 BBC Radio 5Live, ‘Yes it's the Ashes’, 11 जुलाई 2009
  4. http://website.thejc.com/home.aspx?AId=60817&ATypeId=1&search=true2&srchstr=rugby&srchtxt=0&srchhead=1&srchauthor=0&srchsandp=0&scsrch=0
  5. "Ah, the art of sledging for fun, not malice". The Sydney Morning Herald. 12 जून 2005.
  6. http://news.bbc.co.uk/sport2/hi/funny_old_game/3068365.stm Lighter examples of sledging - BBC Sport
  7. "Harbhajan Singh - Andrew Symonds racism hearing". Cricketcircle.com. अभिगमन तिथि 2 नवंबर 2008.
  8. Praverman, Frank (२९ जनवरी २00८). "Harbhajan Singh cleared of making racist comments to Andrew Symonds". Timesoline. London. अभिगमन तिथि 2 नवंबर 2008.
  9. क्रिकइन्फो - हरभजन रैसिज़म चार्ज नॉट प्रोवेन - हंसन
  10. आईसीसी रिलीज
  11. Silverman, Jason (Sep/Oct 1999). "The Art of Trash Talk". Psychology Today. |date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)

स्रोत[संपादित करें]