अनैठा
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अनैठा
अनैठा | |
|---|---|
| गाउँ / Village | |
अनैठा गामक दृश्य | |
| देश | नेपाल |
| प्रदेश | मधेश प्रदेश |
| जिला | महोत्तरी |
| गाउँपालिका | महोत्तरी गाउँपालिका |
| जनसंख्या (2021) | |
| • कुल | 2,533 |
| समय मण्डल | नेपाल समय (यूटीसी+5:45) |
अनैठा (नेपाल अनैथा) अनैठा प्राचीन मिथिला क्षेत्र का एक बासस्थान ( गांव) है। जो हाल की जनकपुरधाम शहर से १३ km पश्चिम तथा जलेश्वरनाथ धाम शहर से ७ km उत्तर पूर्व मे स्थित है।
महोत्तरी जिला महोतरी गाउपालिका वडा नं - २ मे रहे ये गांव पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थान है । ठाडेश्वरनाथ महादेव मंदिर, ठाड़ी पोखरी, ब्रह्मस्थान, सोनामाई स्थान, यहां की धरोहर है । ये गांव मधेश प्रदेश की राजधानी (जनकपुर) अन्तर्गत भी पड़ता है लेकिन यहाके अस्थिर राजनीतिक, एवं अशिक्षित लोगो के कारण ये स्थान अभी भी पिछड़ा है। यहां के लोग मुख्यत अन्न उगाते थे, कृषि कार्य करते थे लेकिन अभी के समय जनसंख्या वृद्धि के कारण उतने जमीन नहीं रहे सब बस्ती होते जा रहे है जिसके चलते लोग नौकरी करते है तथा विदेश पलायन भी हुए है। इस गांव मे विभिन्न जात जाती के लोग (धानुक, यादव, कलवार,सोनार, मुसहर,ख़तवे,तेली,कानू) बड़े प्रेम से एक साथ रहते है। यहां बोले जानेवाले एक मात्र भाषा मैथिली है ।
नामकरण की बात करे तो मिथिला के राजा श्री जनक जी के दरबार से बहुत निकट रहे ये स्थान अन्नो का एक भंडार था लेकिन मिथिला क्षेत्र मे जब अकाल पड़ा था उस समय यहां की अन्न भंडार खत्म हो गया जिस से की यहां अन्न नहीं था। वोही अन्न - नहीं - था से अनईथा, अनैठा हुया।
यहां एक प्राकृतिक एब बहुत ही पौराणिक पोखरी है जिसको ठाड़ी पोखरी कहते है, जो कब किसने खुदवाया किसीको ज्ञात नहीं है माना जाता है ये पोखरी एक ही रात मे दैत्यों द्वारा खनी गई हो सकता है मान्यता यह भी है कि एक समय था जब इस पोखरी ने राही, बटोहियों को जो इस के किनारे आराम करने बैठते थे उन भूखे की प्रार्थना एब मांगने पर उसमें से थाल सहित भोजन आ जाया करता था। इस रास्ते से आते जाते लोग यहां ठहरते ही थे जिसके कारण इसको ठाड़ी पोखरी कहा जाता है। अभी भी यहां कुछ देर बैठने से ठहरने से मन हल्का एब शांत होता है यहां की लोगों का कहना है। मान्यता है कि जब श्री राम जी के बरात मिथिला मे आया तो यही ठहरे हुए थे इसीलिए यहां ठाडेश्वरनाथ महादेव जी भी निवास करते है जिसका बहुत ही सुंदर सा का मंदिर भी है। ठाडेश्वरनाथ महादेव के साथ पार्वती जी की, हनुमान सहित राम लक्ष्मण जी की, लक्ष्मी जी की, महारानी जी की , गंगा मैया की, मंदिरे यहां की शोभा को और अधिक बढ़ाता है।
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