अनान्के समूह
अनान्के समूह (अंग्रेज़ी: Ananke group) बृहस्पति के 'प्रतिगामी अनियमित उपग्रहों' का एक खगोलीय समूह है। ये सभी उपग्रह बृहस्पति की परिक्रमा उसी दिशा में करते हैं जो बृहस्पति के अपने घूर्णन की दिशा के विपरीत है (इसे खगोल विज्ञान में 'प्रतिगामी' कक्षा कहा जाता है)। इस समूह के सभी उपग्रहों की कक्षाएँ लगभग एक समान हैं, जिससे खगोलविदों का मानना है कि इन सभी की उत्पत्ति एक ही खगोलीय घटना से हुई है। इस समूह का नाम इसके सबसे बड़े सदस्य, अनान्के उपग्रह के नाम पर रखा गया है, जिसकी खोज 1951 में अमेरिकी खगोलशास्त्री सेठ बार्न्स निकोलसन ने की थी।[1][2]
उत्पत्ति और निर्माण
[संपादित करें]खगोलीय साक्ष्यों और कक्षीय मापदंडों के आधार पर, यह माना जाता है कि अनान्के समूह के उपग्रह मूल रूप से बृहस्पति के हिस्से के रूप में नहीं बने थे।
वैज्ञानिकों का सबसे स्वीकृत सिद्धांत यह है कि अरबों साल पहले, सौर मंडल के निर्माण के शुरुआती दौर में एक बड़ा क्षुद्रग्रह बृहस्पति के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण द्वारा पकड़ लिया गया था। बाद में, यह पकड़ा गया क्षुद्रग्रह संभवतः किसी अन्य छोटे खगोलीय पिंड या धूमकेतु से टकरा गया, जिससे वह कई टुकड़ों में टूट गया। इस भयंकर टक्कर में बचा हुआ सबसे बड़ा टुकड़ा 'अनान्के' उपग्रह बन गया, और जो छोटे टुकड़े अंतरिक्ष में बिखर गए, वे बृहस्पति की कक्षा में स्थापित होकर इस समूह के अन्य छोटे उपग्रह बन गए।[3]
कक्षीय विशेषताएँ
[संपादित करें]अनान्के समूह के उपग्रह बृहस्पति से बहुत दूर स्थित हैं और इनकी कक्षीय विशेषताएँ 'गैलीलियन उपग्रहों' (जैसे आयो या यूरोपा) से बिल्कुल अलग हैं:
- दूरी: इन उपग्रहों का 'अर्ध-दीर्घ अक्ष' 1.93 करोड़ से 2.27 करोड़ किलोमीटर के बीच है। इतनी विशाल दूरी के कारण इन्हें बृहस्पति की एक परिक्रमा पूरी करने में 550 से 630 से अधिक पृथ्वी-दिन लगते हैं।
- झुकाव: बृहस्पति के भूमध्यरेखीय तल के सापेक्ष इनकी कक्षा का झुकाव 145.7° और 154.8° के बीच होता है। 90° से अधिक का यह झुकाव ही इनकी 'प्रतिगामी' (उल्टी दिशा में घूमने वाली) प्रकृति को दर्शाता है।
- उत्केंद्रता: इन उपग्रहों की कक्षाएँ पूर्ण रूप से गोलाकार नहीं हैं; इनकी 'उत्केंद्रता' 0.02 से 0.28 के बीच होती है, जिसका अर्थ है कि ये अत्यधिक अंडाकार पथ पर चलते हैं।
प्रमुख सदस्य
[संपादित करें]वर्तमान में इस समूह में 20 से अधिक ज्ञात उपग्रह शामिल हैं। चूंकि ये सभी क्षुद्रग्रह के टूटे हुए टुकड़े हैं, इसलिए अनान्के को छोड़कर इनमें से कोई भी इतना बड़ा नहीं है कि अपने स्वयं के गुरुत्वाकर्षण के कारण गोल आकार ले सके। इस समूह के कुछ प्रमुख उपग्रह इस प्रकार हैं:
- अनान्के: यह सबसे बड़ा सदस्य है (व्यास लगभग 28 किमी)। इसके हल्के लाल और भूरे रंग के स्पेक्ट्रम अन्य सदस्यों से काफी मेल खाते हैं।
- प्रैक्सीडिके: लगभग 7 किमी व्यास के साथ यह इस समूह का दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है।
- आयोकास्टे: इसका व्यास लगभग 5 किमी है।
- हार्पलायके और थायोने: ये दोनों लगभग 4-4 किमी व्यास वाले छोटे अनियमित उपग्रह हैं।[4]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Ananke - NASA Science". NASA. अभिगमन तिथि: 25 जून 2026.
- ↑ "Orbital and Collisional Evolution of the Irregular Satellites"
- ↑ Sheppard, Scott S.; Jewitt, David C. (2003). "An abundant population of small irregular satellites around Jupiter". Nature. 423 (6937): 261–263. डीओआई:10.1038/nature01584.
- ↑ Bagenal, Fran; Dowling, Timothy E.; McKinnon, William B. (2004). Jupiter: The Planet, Satellites and Magnetosphere. Cambridge University Press. pp. 265-268. ISBN 978-0521818087.