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अनंगरंग

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अनंगरंग (अनंगरंग) , कल्याणमल्ल प्रणीत एक कामशास्त्रीय ग्रन्थ जिसमें मैथुन संबंधी आसनों का विवरणी है। ४२० श्लोकों एवं १० स्थल नामक अध्यायों में विभक्त यह ग्रन्थ 'भूपमुनि' के रूप में प्रसिद्ध कलाविदग्ध क्षत्रिय विद्वान कल्याणमल्ल द्वारा अपने घनिष्ठ मित्र लोदीवंशावतंस लाडखान के कौतुहल के लिये रची गयी थी। विश्व की विविध भाषाओं में इस ग्रन्थ के अनेक अनुवाद प्रकाशित हैं। अनंगरंग का अंग्रेजी में अनुवाद और प्रकाशन 1885 में सर रिचर्ड फ्रांसिस बर्टन के संपादन में 'काम शास्त्र सोसाइटी' द्वारा किया गया था। उनकी मृत्यु के बाद, इस अनुवाद की पांडुलिपि और नोट्स को उनकी पत्नी इसाबेल बर्टन द्वारा [1]जला दिया गया था। हालांकि, वल्लभरायर द्वारा रचित ऐतिहासिक आख्यायिका कल्याणमल्लचरितम् (Saga of Kalyanamalla) के बारे में कहा जाता है कि इसमें अनंगरंग को उसकी संपूर्णता में शामिल किया गया है, जिसमें वे भाग भी शामिल हैं जो पहले खो गए थे।

  • प्रथमस्थलं - स्त्रीलक्षणं
  • द्वितीय स्थलं - चन्द्रकल
  • तृतीयस्थलं - शशमृगादिभेदं
  • चतुर्त्थस्थलं - सामान्यधर्म्मं
  • पंचस्थलं - देशनियम
  • षष्ठस्थलं - विवाहाद्युद्देशं
  • सप्तमस्थलं - बाह्यसंभोगविधानं
  • अष्टमस्थलं - सुरतभेद
  • नवमस्थलं -
  • दशमस्थलं - वशीकरणादिकं

काम-विषयक अन्य प्राचीन ग्रन्थ

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बाहरी कड़ियाँ

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  1. rai_t2hst5 (2009-02-22). "BURTON LIBRARY (A103) - Royal Anthropological Institute" (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-05-18.{{cite web}}: CS1 maint: numeric names: authors list (link)