अढ़ाई दिन का झोंपड़ा

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अढ़ाई दिन का झोंपड़ा
Adhai Din-ka-Jhonpra Screen wall (6133975257).jpg
धर्म संबंधी जानकारी
सम्बद्धताइस्लाम
अवस्थिति जानकारी
नगर निकायअजमेर
राज्यराजस्थान
अढ़ाई दिन का झोंपड़ा की भारत के मानचित्र पर अवस्थिति
अढ़ाई दिन का झोंपड़ा
राजस्थान के मानचित्र पर अवस्थिति
अढ़ाई दिन का झोंपड़ा की राजस्थान के मानचित्र पर अवस्थिति
अढ़ाई दिन का झोंपड़ा
अढ़ाई दिन का झोंपड़ा (राजस्थान)
भौगोलिक निर्देशांक26°27′18″N 74°37′31″E / 26.455071°N 74.6252024°E / 26.455071; 74.6252024निर्देशांक: 26°27′18″N 74°37′31″E / 26.455071°N 74.6252024°E / 26.455071; 74.6252024
वास्तु विवरण
संस्थापककुतुब-उद-दीन ऐबक
शिलान्यास1192
निर्माण पूर्ण1199

अढ़ाई दिन का झोंपड़ा राजस्थान के अजमेर नगर में स्थित यह एक मस्जिद है। यह पहले एक संस्कृत विधालय था जिसका निर्माण चौहान शासक विग्रह राज 4(बीसलदेव) ने करवाया था जिसे (संस्कृत विद्यालय को) मोहम्मद गौरी के गवर्नर कुतुब-उद-दीन ऐबक ने वर्ष 1194 में तोड़कर अढ़ाई दिन का झोपड़े का निर्माण करवाया।

"यह बात बिलकुल गलत है की इसका निर्माण सिर्फ अढाई दिन में किया गया और इस कारण इसका नाम अढाई दिन का झोपड़ा पढ़ गया "

"यहाँ पर पंजाब साह पीर का दिन का उर्स लगता है इसीलिए इसे अढ़ाई दिन का झोपडा कहते है "[1]

मोहम्मद गौरी ने तराईन के युद्ध में पृथ्वीराज चौहान को हरा दिया उसके बाद पृथ्वीराज की राजधानी तारागढ़ अजमेर पर हमला किया। यहां स्थित संस्कृत विद्यालय में रद्दो बदल करके मस्जिद में परिवर्तित कर दिया। ।[2] इसका निर्माण संस्कृत महाविद्यालय के स्थान पर हुआ।[3][4] इसका प्रमाण अढाई दिन के झोपड़े के मुख्य द्वार के बायीं ओर लगा संगमरमर का एक शिलालेख है जिस पर संस्कृत में इस विद्यालय का उल्लेख है।

यहाँ भारतीय शैली में अलंकृत स्तंभों का प्रयोग किया गया है, जिनके ऊपर छत का निर्माण किया गया है। मस्जिद के प्रत्येक कोने में चक्राकार एवं बासुरी के आकार की मीनारे निर्मित है । 90 के दशक में इस मस्जिद के आंगन में कई देवी - देवताओं की प्राचीन मूर्तियां यहां-वहां बिखरी हुई पड़ी थी जिसे बाद में एक सुरक्षित स्थान रखवा दिया गया। ये भारत की सबसे प्राचीन इस्लामी मस्जिदों में शुमार है। केरल स्थित चेरामन जुमा मस्जिद के बाद अढाई दिन का झोपड़ा सबसे पुरानी मस्जिद है।यह राजस्थान की पहली मस्जिद है तथा भारत की दूसरी प्राचीन मस्जिद है । 

इतिहास[संपादित करें]

इस स्थान पर संस्कृत विद्यालय 'सरस्वती कंठाभरण महाविद्यालय' एवं विष्णु मन्दिर का निर्माण चतुर्थ विग्रहराज (विशालदेव) चौहान ने करवाया था।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Percy Brown (art historian)", Wikipedia (अंग्रेज़ी में), 2020-08-14, अभिगमन तिथि 2020-08-30
  2. J.L. Mehta. Medieval Indian Society And Culture. 3. Sterling. पृ॰ 175. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-207-0432-9. ...Adhai din ko Jhompra at Ajmer were built by him out of the material of demolished Hindu temples...the masjid at Ajmer was erected on the ruins of a Sanskrit college
  3. Betsy Ridge and Peter Eric Madsen (1973). A traveler's guide to India. Scribner. पृ॰ 90.
  4. David Abram (2003). Rough Guide to India. Rough Guides. पृ॰ 185. मूल से 1 फ़रवरी 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 4 फ़रवरी 2016.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]