अगम्यगमन

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ईसा पूर्व 703, मायासुर अपनी चाची के साथ

अगम्यगमन (Incest) अथवा कौटुम्बिक व्याभिचार वो होता है जब एक पुरुष किसी ऐसी महिला जो उसके खून के रिश्ते मे आती हो या उसके विवाह से सम्बंधित हो जैसे माँ, बहन,पुत्री, भतीजी,साली, सास, चाची ,भाभी, बहु इत्यादि से सेक्स सम्बन्ध बनाता है उसे कौटुम्बिक व्याभिचार बोलते है। कौटुम्बिक व्याभिचार न केवल कानूनी दृष्टि से अपितु नैतिक दृष्टि से भी एक अपराध माना जाता रहा है।

कौटुम्बिक व्याभिचार मे किसी बालक के साथ किये गए सेक्सुअल एक्टिविटी को भी रखा जाता है (जब निष्क्रिय माध्यम(पीड़ित) अपराधी के रिश्तदार हो)।

विश्व मे स्थिति

इंग्लैंड तथा दुसरे कुछ पश्चिमी देशो मे इसे एक गंभीर अपराध माना जाता है। इस अपराध मे निष्क्रिय माध्यम का सहमति देना भी कोई मायने नहीं रखता था अपराधी पर मुकदमा चलता है।

भारत मे स्थिति

इंग्लैंड की तरह भारत मे इस तरह के अपराध के लिए कोई अलग से कानून नही बनाया गया व्याभिचार है भारत मे इस तरह के अपराध कोई मायने नहीं रखते जब तक वो धारा 376 (बलात्कार की श्रेणी ) धारा 377 (अप्राकृतिक सेक्स / या एनल सेक्स अपराध की श्रेणी) या धारा 497 (Adultery/व्यभिचार ki श्रेणी ) मे नहीं आता हो।

वर्तमान भारत में धारा 377 तथा धारा 497 को सर्वोच्च न्यायालय ने निष्प्रभावी कर दिया, जिससे अब पारिवारिक रिश्तों में भी ऐसे रिश्ते बढ़ रहे हैं जहाँ घर की चारदीवारी में माँ-बेटे में हमबिस्तरी होने लगी हैं, बाप-बेटी में अब जिस्मानी रिश्ता पाए जाने लगा है, और सगे-भाई बहन के रिश्ते में,यौन संबंध (सेक्स) बनने से और मधुरता आने लगी हैं। समय के साथ समाज में पश्चिमी सभ्यता का आगमन से लोगों में काफी खुलापन आया है और लोग स्वेच्छा से ऐसे रिश्ते को अपनाने लगे हैं। संविधान के अनुसार दो व्यस्क व्यक्तियों के मध्य आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध उचित है फ़िर चाहे वह किसी भी रिश्ते में हो, परिवार में ऐसे रिश्ते होने पर अगर दोनों व्यक्ति व्यस्क तथा स्वेच्छा से संबंध बना रहे हैं तो इसे अपराध नहीं माना जाएगा बशर्ते कोई नाबालिग न हो या शोषण न किया जा रहा हो।