अक्षरम्

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अक्षरम्‌, भाषा, संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र में कार्यरत एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है। यह लगभग 6 वर्ष से देश-विदेश में हिंदी के प्रवर्धन और साहित्य के प्रकाशन का कार्य कर रही है।

कार्य[संपादित करें]

  • यू॰के॰ हिंदी समिति, यू॰के॰, के सहयोग से अक्षरम्‌ गत 4 वर्षों से ‘हिंदी ज्ञान प्रतियोगिता’ का आयोजन कर रही है, जिसके अंतर्गत हर वर्ष प्रतियोगिता के विजयी हिंदी के 10 विद्यार्थियों को पुरस्कार स्वरूप दो सप्ताह की भारत यात्र का पैकेज दिया जाता है।
  • भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद् (विदेश मंत्रालय, भारत सरकार), साहित्य अकादमी आदि संस्थाओं के सहयोग से अक्षरम्‌ गत 4 वर्षों से प्रवासी कवि सम्मेलन, प्रवासी उत्सव आदि का आयोजन कर रही है, जिसमें हिंदी के ज्वलंत विषयों पर विचार विमर्श किया जाता है, महत्त्वपूर्ण सिफ़ारिशें की जाती हैं और नाटक, रचना पाठ, कवि-सम्मेलन, आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और हिंदी सेवी सम्मान दिया जाता है। इन उत्सवों में भारतीय मनीषियों के अलावा अमेरिका, कनाडा, यू॰के॰ और अन्य अनेक देशों से साहित्यकार, शिक्षक और हिंदी-कम भाग लेते हैं।
  • इसके अलावा, अक्षरम्‌ प्रायः प्रति माह संगोष्ठियों का आयोजन करती है, जिनमें महत्त्वपूर्ण कृतियों का लोकार्पण, ताज़ा विषयों पर चर्चा और साहित्यकारों और मनीषियों से साक्षात्कार इत्यादि शामिल हैं।
  • अक्षरम्‌ पिछले 5 वर्षों से हिन्दी साहित्य की अंतरराष्ट्रीय पत्रिका के रूप में अपन पत्रिका ‘अक्षरम्‌ संगोष्ठी’ का प्रकाशन नियमित रूप से कर रही है और साथ ही सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर एक मासिक पत्रिका ‘प्रवासी टुडे’ भी प्रकाशित कर रही है, जो प्रवासी भारतीयों को भारत की गतिविधियों की जानकारी देती है।

लक्ष्य[संपादित करें]

१. अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी उत्सव जैसे कार्यक्रमों से हिन्दी को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करना।

२. हिन्दी को ‘हिन्दी ज्ञान प्रतियोगिता’ जैसे आयोजनों से नई पीढ़ी तक ले जाना।

३. ज्ञान-विज्ञान के विविध् क्षेत्रों में हिन्दी को ले जाना।

४. अन्य भारतीय व विदेशी भाषाओं के साथ संबाद व विमर्श।

५. सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिन्दी का प्रचार-प्रसार।

६. वैश्विक स्तर पर हिन्दी की नेटवर्र्किंग।

७. हिन्दी-साहित्य, संस्कृति, शिक्षण के क्षेत्र में अक्षरम्‌ संगोष्ठी, प्रवासी टुडे जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से स्तरीय साहित्य का प्रचार-प्रसार।

८. प्रवासी व निवासी साहित्यकारों के बीच में संवाद सेतु निर्मित करना।