अंबिकेश्वर महादेव मंदिर, आमेर जयपुर
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| अंबिकेश्वर महादेव मंदिर | |
|---|---|
| धर्म | |
| संबंधन | हिन्दू धर्म |
| ज़िला | जयपुर जिला |
| देवता | भगवान शिव |
| अवस्थिति | |
| अवस्थिति | आमेर |
| राज्य | राजस्थान |
| देश | भारत |
| वास्तुकला | |
| प्रकार | भारतीय |
| स्थापना | अनुमानित 5000 वर्ष पूर्व |
अंबिकेश्वर महादेव मंदिर जयपुर जिले के आमेर में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर है। इस मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्वता अत्यधिक है और यह क्षेत्रीय श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। [1]
इतिहास
[संपादित करें]अंबिकेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास द्वापर युग से जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण और नंद बाबा ने इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा की थी। यह भी कहा जाता है कि श्रीकृष्ण का मुंडन संस्कार यहीं हुआ था। [2]
एक प्रचलित कथा के अनुसार, यहाँ एक गाय प्रतिदिन एक विशेष स्थान पर दूध बहाती थी। राजा काकिलदेव ने इस स्थान की खुदाई करवाई, और वहाँ से एक स्वयम्भू शिवलिंग प्रकट हुआ। इसके बाद राजा ने इस स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया।[3]
मंदिर की वास्तुकला
[संपादित करें]अंबिकेश्वर महादेव मंदिर भारतीय वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह मंदिर 14 स्तंभों पर स्थित है और इसके गर्भगृह में स्वयम्भू शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के भीतर एक प्राचीन नंदी की मूर्ति भी है, जिसे लगभग 3000 वर्ष पुराना माना जाता है। [4]
वर्ष के कुछ विशेष समय, विशेष रूप से सावन माह के दौरान, मंदिर का क्षेत्र जलमग्न हो जाता है, जब जल स्तर गर्भगृह में लगभग 8 फीट तक पहुँच जाता है।
धार्मिक महत्व
[संपादित करें]महाशिवरात्रि, सावन के महीने में यहाँ भक्तों की भारी भीड़ होती है। इसके अतिरिक्त, यह अन्य हिंदू समुदायों के लिए भी एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहाँ भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। [5]
जलमग्नता
[संपादित करें]अंबिकेश्वर महादेव मंदिर में विशेषता है कि सावन के महीने में भारी वर्षा के कारण मंदिर का परिसर जलमग्न हो जाता है। इस दौरान भगवान शिव के प्राकृतिक जलाभिषेक का दृश्य देखने को मिलता है, जिसे भक्त दिव्य अनुभव मानते हैं।[6]
देखें
[संपादित करें]संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ "जयपुर के अंबिकेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब". पत्रिका. अभिगमन तिथि: 28 अप्रैल 2025.
- ↑ "अंबिकेश्वर महादेव मंदिर में हुआ था बालकृष्ण का मुंडन संस्कार". Zee News. अभिगमन तिथि: 28 अप्रैल 2025.
- ↑ "अंबिकेश्वर मंदिर 14 खंभों पर टिका: यहां शिवलिंग नहीं, शिवशिला विराजमान है". दैनिक भास्कर. अभिगमन तिथि: 28 अप्रैल 2025.
- ↑ "5000 साल पुराना अंबिकेश्वर महादेव मंदिर 11 साल बाद हुआ जलमग्न". ETV भारत. अभिगमन तिथि: 28 अप्रैल 2025.
- ↑ "अंबिकेश्वर महादेव मंदिर का रहस्य: जब जटाओं से बहने लगी गंगा". First India News. अभिगमन तिथि: 28 अप्रैल 2025.
- ↑ "अंबिकेश्वर महादेव मंदिर की पौराणिक कथा". Zee News. अभिगमन तिथि: 28 अप्रैल 2025.