अंतरिक्ष का सैन्यीकरण

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ग्राउंड-आधारित इंटरसेप्टर, जिसे आने वाली इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, 22 जुलाई, 2004 को फोर्ट ग्रेली, अलास्का में मिसाइल रक्षा परिसर में इसके साइलो में उतारा गया है।

अंतरिक्ष के सैन्यीकरण का अर्थ है अंतरिक्ष में हथियार और सैन्य प्रौद्योगिकी का प्रस्थापन और विकास। 20वीं शताब्दी के मध्य में अंतरिक्ष में की गई शुरुआती खोज के पीछे का एक कारण इसके सैन्य प्रयोग की सम्भावना थी। अमेरिका और सोवियत संघ ने इसे बैलिस्टिक-मिसाइल प्रौद्योगिकी और सैन्य अनुप्रयोगों के लिए क्षमता रखने वाली अन्य प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए एक अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। तब से बाह्य अंतरिक्ष का उपयोग इमेजिंग और संचार उपग्रहों जैसे सैन्य अंतरिक्ष यानों के लिए एक ऑपरेटिंग स्थान के रूप में किया गया है। साथ ही साथ, कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें अपनी उड़ान के दौरान बाहरी अंतरिक्ष से गुजरती हैं। 2019 तक की यदि बात की जाए, तो अंतरिक्ष में तैनात हथियारों की ज्ञात तैनाती में केवल अल्माज अंतरिक्ष-स्टेशन आयुध, और पिस्तौल (जैसे कि TP-82 कॉस्मोनॉट उत्तरजीविता पिस्तौल, पोस्ट-लैंडिंग, पूर्व-पुनर्प्राप्ति उपयोग के लिए) शामिल हैं।

इसका इतिहास शीत युद्ध में चलने वाली अमेरिका और सोवियत संघ की प्रतिस्पर्धा के दिनों में हुआ था। आज के दिन में इन दोनों के अलावा चीन और भारत जैसे देश भी इस स्पर्धा में प्रवेश कर चुके हैं।

सैन्य उपग्रह[संपादित करें]

पहला स्काईनेट उपग्रह का प्रक्षेपण

टोही उपग्रहों के प्रकार

यह भी देखें[संपादित करें]

*Project A119

संदर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]