हिन्दी चिट्ठाजगत

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हिन्दी चिट्ठाकार समुदाय का प्रचलित लोगो

हिन्दी चिट्ठाजगत से आशय है हिन्दी भाषी चिट्ठों का ऑनलाइन समुदाय जो कि बृहतर भारतीय चिट्ठाजगत का एक भाग है।

इतिहास[संपादित करें]

आलोक कुमार हिन्दी भाषा के प्रथम चिट्ठाकार माने जाते हैं। उनका चिट्ठा नौ दौ ग्यारह हिन्दी का अब तक का प्रथम ज्ञात हिन्दी चिट्ठा है। आरम्भ में हिन्दी टाइपिंग की जटिलताओं के चलते काफी कम लोग हिन्दी में लिखते थे। धीरे-धीरे हिन्दी चिट्ठों की सँख्या बढ़ने लगी।

सन २००७ से हिन्दी चिट्ठों की सँख्या अप्रत्याशित रुप से बढ़ी। इसका कारण विविध ब्लॉगिंग सेवाओं में इण्डिक यूनिकोड का समर्थन आना, नए हिन्दी टाइपिंग औजारों का आना, जैसे ब्लॉगर में ट्राँसलिट्रेशन टूल का आना एवं विविध मीडिया माध्यमों में हिन्दी चिट्ठाकारी का प्रचार भी रहा। वर्तमान में सक्रिय-निष्क्रिय मिलाकर लगभग 50,000 के करीब हिन्दी चिट्ठे हैं।[1]

चिट्ठों की प्रकृति[संपादित करें]

...हर ब्लॉगर की अपनी एक अलग पहचान है, कोई साहित्यकार है तो कोई पत्रकार, कोई समाजसेवी है तो कोई संस्कृतिकर्मी, कोई कार्टूनिस्ट है तो कोई कलाकार। हर ब्लॉगर के सोचने का अपना एक अलग अंदाज़ है, एक अलग ढंग है प्रस्तुत करने का। अलग-अलग नियम है, अलग-अलग चलन किन्तु फिर भी एक सद्भाव है जो आपस में सभी को जोड़ता है।

रवीन्द्र प्रभात हिन्दी ब्लॉग आलोचक और इतिहासकार[2]

आरम्भ में अधिकतर हिन्दी चिट्ठे व्यक्तिगत प्रकृति के थे एवं विषय आधारित चिट्ठों नहीं थे अथवा नगण्य थे। सन 2007 से हिन्दी चिट्ठों की सँख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई एवं सिनेमा, तकनीक, विज्ञान आदि विविध विषयों पर अनेकों चिट्ठों का उदय हुआ।[3]

चिट्ठों की आलोचना[संपादित करें]

निजी स्‍वतंत्रता के आधुनिक विचार के लिए भी ब्‍लॉग की दुनिया में जगह है। ब्‍लॉग के माध्‍यम से कितने सार्थक काम और बहसें हो रही हैं, यह एक अलग मुद्दा है, लेकिन ब्‍लॉग लेखक को एक निजी किस्‍म की स्‍वतंत्रता देता है। उस स्‍पेस का इस्‍तेमाल लेखक अपने तरीके से निर्बंध होकर कर सकता है।

उदय प्रकाश, हिन्दी ब्लॉगर एवं कथाकार[4]

हालांकि हिन्दी चिट्ठों की आलोचना की शुरुआत वर्ष-2007 में हुई, जब रवीन्द्र प्रभात ने चिट्ठाकारी में एक नया प्रयोग प्रारम्भ किया और ‘ब्लॉग विश्लेषण’ के द्वारा ब्लॉग जगत में बिखरे अनमोल मोतियों से पाठकों को परिचित करने का बीड़ा उठाया। 2007 में पद्यात्मभक रूप में प्रारम्भ‍ हुई यह कड़ी 2008 में गद्यात्मचक हो चली और 11 खंडों के रूप में सामने आई। वर्ष 2009 में उन्होंने इस विश्ले्षण को और ज्या़दा व्यापक रूप प्रदान किया और विभिन्न प्रकार के वर्गीकरणों के द्वारा 25 खण्डों में एक वर्ष के दौरान लिखे जाने वाले प्रमुख चिट्ठों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। इसी प्रकार वर्ष 2010 में भी यह अनुष्ठान उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ संपन्न किया और 21 कडियों में तथा 2011 और 2012 में 25 खंडों में ब्‍लॉग जगत की वार्षिक रिपोर्ट को प्रस्‍तुत करके एक तरह से ब्‍लॉग आलोचना कर्म और इतिहास लेखन का सूत्रपात किया। ब्लॉग जगत की सकारात्मक प्रवृत्तियों को रेखांकित करने के उद्देश्य से अभी तक जितने भी प्रयास किये गये हैं, उनमें ब्लॉगोत्सव एक अहम प्रयोग है। अपनी मौलिक सोच के द्वारा रवीन्द्र प्रभात ने इस आयोजन के माध्यम से पहली बार चिट्ठा जगत के लगभग सभी प्रमुख रचनाकारों को एक मंच पर प्रस्तुत किया और गैर ब्लॉगर रचनाकारों को भी इससे जोड़कर समाज में एक सकारात्मीक संदेश का प्रसार किया। इनके द्वारा प्रत्येक वर्ष 51 चिट्ठाकारों का सारस्वत सम्मान परिकल्पना सम्मान के नाम से किया जाता है।[5]

अक्षरग्राम नेटवर्क[संपादित करें]

अक्षरग्राम नेटवर्क हिन्दी चिट्ठाकारों एवं तकनीकिज्ञों का एक गैरलाभकारी सामुदायिक स्वयंसेवक समूह है जो कि कम्प्यूटर एवं इण्टरनेट पर हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने हेतु कार्य करता है। यह समूह हिन्दी चिट्ठाकारी से सम्बंथित विभिन्न सेवाएँ संचालित करता है। शुरुआती दिनों में इण्टरनेट पर हिन्दी के प्रचार-प्रसार में इस समूह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसकी विभिन्न सेवाओं नारद, सर्वज्ञ, परिचर्चा आदि ने नए चिट्ठाकारों को स्थापित होने में काफी सहायता की।

अक्षरग्राम नेटवर्क की विविध सेवाएँ:-

हिन्दी चिट्ठाजगत समुदाय[संपादित करें]

शुरुआती समय में हिन्दी चिट्ठाकारों की कम सँख्या को देखते हुए आरम्भिक चिट्ठाकारों ने इस माध्यम के प्रचार के लिये अनेक समुदाय बनाए ताकि हिन्दी चिट्ठाकारी का प्रचार किया जा सके। कुछ प्रमुख समुदाय निम्न हैं:-

ब्लॉग्सइनमीडिया- प्रकाशित चिठ्ठों का लेखा-जोखा[संपादित करें]

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित चिठ्ठों के आलेखों आदि का वर्णन उस प्रकाशित लेख की तस्वीर के साथ किया जाता है, यह एक सुन्दर प्रकाशित ब्लागों की विवरणिका हैं।

विभिन्न सामुदायिक सेवाएँ[संपादित करें]

हिन्दी चिट्ठाकार[संपादित करें]

हिन्दी हज़ारों की संख्या में हैं और अनेकानेक लोग हर रोज़ इस विधा में लेखन शुरु कर रहे हैं। फिलहाल जाल पर समस्त चिट्ठाकारों की कोई प्रामाणिक व समग्र सूची उपलब्ध नहीं है परंतु चिट्ठा जगत, हिन्दी ब्लॉग निर्देशिका अत्याधुनिक हिन्दी ब्लॉग निर्देशिका] और हिन्दी ब्लॉग निर्देशिका जैसे जालस्थलों पर आंशिक सूची देखी जा सकती है।

फीड आधारित ब्लॉग एग्रीगेटर[संपादित करें]

चर्चा समूह[संपादित करें]

चिट्ठा खोजी[संपादित करें]

सूची व निर्देशिकायें[संपादित करें]

हिंदी चिट्ठाजगत का सम्मान[संपादित करें]

परिकल्पना सम्मान चिन्ह

परिकल्पना सम्मान[6]हिन्दी ब्लॉगिंग का एक ऐसा वृहद सम्मान है, जिसे बहुचर्चित तकनीकी ब्लॉगर रवि रतलामी ने हिन्दी ब्लॉगिंग का ऑस्कर कहा है।[7] यह सम्मान प्रत्येक वर्ष आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन में देशविदेश से आए हिन्दी के चिरपरिचित ब्लॉगर्स की उपस्थिति में प्रदान किया जाता है।[8]

पुस्तक प्रकाशन[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. हिन्दी ब्लोगिंग का इतिहास, लेखक-रवीन्द्र प्रभात, प्रकाशक-हिन्दी साहित्य निकेतन, बिजनौर,भारत, वर्ष- 2011, पृष्ठ - 180, ISBN 978-93-80916-14-9
  2. साहित्य शिल्पी में रवीन्द्र प्रभात के किए कार्य की चर्चा, लेखक: रणधीर सिंह सुमन, दिनांक:22 अप्रैल 2011
  3. हिन्दी ब्लोगिंग: अभिव्यक्ति की नई क्रान्ति,संपादक : अविनाश वाचस्‍पति/रवीन्द्र प्रभात, प्रकाशक: हिन्दी साहित्य निकेतन, बिजनौर, भारत, प्रकाशन वर्ष : 2011,पृष्ठ : 376,ISBN 978-93-80916-05-7
  4. ब्‍लॉग चर्चा : उदय प्रकाश का ब्‍लॉग, लेखिका: मनीषा पांडेय, प्रकाशक: वेबदुनिया हिन्दी
  5. [जनसंदेश टाइम्स, हिन्दी दैनिक, लखनऊ संस्करण, लेखक : डॉ ज़ाकिर अली रजनीश,01 मार्च 2011, पृष्ठ संख्या :11, शीर्षक : ब्लोगिंग को सार्थक करती परिकल्पना ]
  6. The World's Versatile Blogger Awards
  7. 'रवि रतलामी का साक्षात्कार
  8. ब्लॉगिंग का ऑस्कर : परिकल्पना सम्मान

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]