हिन्दी कवि

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हिन्दी कविता परम्परा बहुत समृद्ध है।

katash

भक्तिकाल (सन १३२५ से १६५० तक) के प्रमुख कवि[संपादित करें]

रीतिकाल (सन १६५० से १८५० तक) के प्रमुख कवि[संपादित करें]

रीतिबद्ध रीतिमुक्त् रीतिसिद्द्

आधुनिक काल(१८५०-अब तक)[संपादित करें]

इस काल के कवियों को अध्ययन की दॄ्ष्टि से विभिन्न काल-खंडों में बांटा गया है !

(क) भारतेन्दु युग (१८५०-१९०० ई.)

(ख) द्विवेदी युग (१९००-१९२०)

(ग) छायावाद-युग (१९२०-१९३६)

(घ) उत्तर-छायावाद युग (१९३६-१९४३) यह काल भारतीय राजनीति में भारी उथल-पुथल का काल रहा है.राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय,कई विचारधाराओं और आन्दोलनों का प्रभाव इस काल की कविता पर पडा . द्वितीय विश्वयुद्ध के भयावह परिणामों के प्रभाव से भी इस काल की कविता बहुत हद तक प्रभावित है. निष्कर्षत:राष्ट्रवादी, गांधीवादी,विप्लववादी,प्रगतिवादी, यथार्थवादी, हालावादी आदि विविध प्रकार की कवितायें इस काल में लिखी गई. इस काल के प्रमुख कवि हैं--

(च) प्रयोगवाद-नयी कविता (१९४३-१९६०) अज्ञेय ने सात नये कवियों को लेकर १९४३ में 'तारसप्तक' नामक एक काव्य संग्रह प्रकाशित किया. उन्होंने इन कवियों को प्रयोगशील कहा. कुछ आलोचकों ने इसी आधार पर इन कवियों को प्रयोगवादी कहना शुरु किया और इस काल को प्रयोगवाद नाम दे दिया. इस नाम को नये कवियों ने अस्वीकार किया .इसके बाद पुन:अज्ञेय के संपादन में प्रकाशित काव्य-संग्रह 'दूसरा सप्तक' की भूमिका तथा उसमें शामिल कुछ कवियों के वक्तव्यों मे अपनी कवितओं के लिये 'नयी कविता' शब्द को स्वीकार किया गया . १९५४ में इलाहाबाद की साहित्यिक संस्था परिमल के कवि लेखकों-जगदीश गुप्त,रामस्वरुप चतुर्वेदी और विजय देवनरायण साही ने "नयी कविता" नाम से एक पत्रिका प्रकाशित कर बाकायदा 'नयी कविता-आंदोलन' का आरंभ किया .इस काल के प्रमुख कवि है-

यह भी देखें[संपादित करें]

बाह्य सूत्र[संपादित करें]

बूंद-बूंद इतिहास (http://www.hindikaitihaas.blogspot.in)