हिना

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
हिना
लॉसोनिया इनर्मिस
लॉसोनिया इनर्मिस
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: पादप
विभाग: मैग्नोलियोफाइटा
वर्ग: मैग्नोलियोप्सीडा
गण: मिर्टेल्स
कुल: लिथ्रेशी
प्रजाति: लॉसोनिया
जाति: L. inermis
द्विपद नाम
लॉसोनिया इनर्मिस
L.

हिना या हीना (अरबी:حــنــا, pronounced /ħinnaːʔ/ )एक पुष्पीय पौधा होता है जिसका वैज्ञानिक नाम लॉसोनिया इनर्मिस है। इसे त्वचा, बाल, नाखून, चमड़ा और ऊन रंगने के काम में प्रयोग किया जाटा है। इससे ही मेहंदी भी लगायी जाती है।

मेंहदी (henna) का वानस्पतिक नाम 'लॉसोनिया इनर्मिस' (lawsonia inermis) है और यह लिथेसिई (lythraceae) कुल का काँटेदार पौधा है। यह उत्तरी अफ्रीका, अरब देश, भारत तथा पूर्वी द्वीप समूह में पाया जाता है। अधिकतर घरों के सामने की बाटिका अथवा बागों में इसकी बाड़ लगाई जाती है जिसकी ऊँचाई आठ दस फुट तक हो जाती है और यह झाड़ी का रूप धारण कर लेती है। कभी कभी जंगली रूप से यह ताल तलैयों के किनारे भी उग आती है। टहनियों को काटकर भूमि में गाड़ देने से ही नए पौधे लग जाते हैं। इसके छोटे सफेद अथवा हलके पीले रंग के फूल गुच्छों में निकलते हैं, जो वातावरण को, विशेषत: रात्रि में अपनी भीनी महक से सुगंधित करते हैं। फूलों को सुखाकर सुगंधित तेल भी निकाला जाता है। इसकी छोटी चिकनी पत्तियों को पीसकर एक प्रकार का लेप बनाते हैं, जिसे स्त्रियाँ नाखून, हाथ, पैर तथा उँगलियों पर श्रृंगार हेतु कई अभिकल्पों में रचाती हैं। लेप को लगाने के कुछ घंटों के बाद धो देने पर लगाया हुआ स्थान लाल, या नारंगी रंग में रंग जाता है जो तीन चार सप्ताह तक नहीं छूटता। पत्तियों को पीसकर भी रख लिया जाता है, जिसे गरम पानी में मिलाकर रंग देने वाला लेप तैयार किया जा सकता है। इसपौधे की छाल तथा पत्तियाँ दवा में प्रयुक्त होती हैं।

हीना के स्वास्थ्य लाभ [1][संपादित करें]

  • पैरों में छाले: अगर पैर में छाले हो जाए या चप्पल काट खाए तो नारियल के तेल में मेंहदी मिलाकर उस स्थान पर लगाएं। छालों में होने वाली की जलन से तुरंत आराम मिल जाएगा।
  • चोट लगने पर: शरीर के किसी हिस्से में चोट लग जाए और दर्द सहा न जाये तो मेंहदी के पत्तों को पीस कर उसमें थोड़ी सी हल्दी मिलाकर उस स्थान पर बांधे। इससे आपको जल्द ही दर्द में राहत मिलेगी।
  • मुंह में छाले: मुंह में होने वाले छाले बहुत तकलीफ देते हैं। इसके लिए मेंहदी के पत्तों को रात में साफ पानी में भिगों दें। सुबह पत्तों को पानी से निकालकर इस पानी से कुल्ला करें। छाले जल्द ही ठीक हो जायेंगे।
  • टीबी में मददगार: मेंहदी में टीबी जैसी घातक बीमारी को दूर भगाने के गुण होते है। एंटीबैक्टरियल होने के नाते यह टीबी से रोग से लड़ने में मददगार हो सकता है। इसकी पत्तियों को पीसकर इस्‍तेमाल करने से टीबी की बीमारी में राहत मिलती है लेकिन ऐसा करने से पहले डॉक्‍टर से सलाह अवश्‍य लें।
  • पेट की बीमारी: मेंहदी में कई ऐसे गुण होते है जिनसे पेट में होने वाली बीमारी में आराम मिलता है। आर्युवेद में मेंहदी को कई तरीके से बनाकर पेट की बीमारियों की दवा में शामिल किया जाता है। इसे सेवन से किसी प्रकार का कोई साइड इफेक्‍ट नहीं होता है।
  • दर्द में आराम: मेंहदी की तासीर ठंडी होती है जो दर्द में आराम दिलाती है। अगर सिर में दर्द हो रहा हो, तो मेंहदी की पत्तियों को पीसकर इसका लेप लगा लें। इससे दर्द से तुंरत राहत मिल जाएगी। माइग्रेन के दर्द के लिए हीना एक अच्छा प्राकृतिक उपचार है।
  • जलन कम करें: अगर कहीं चोट लगा जाये या जल जाए तो मेंहदी की पत्तियां पीसकर लगाने से राहत तुरंत मिलती है। इसमें ठंडक होती है जिसके कारण जलन शांत हो जाती है। त्‍वचा की जलन सबसे अच्‍छी तरह से मेंहदी से ही ठीक होती है।
  • बालों को अच्‍छा बनाएं: बालों में रूसी या अन्य कोई समस्या हो तो हीना का प्रयोग करें। यह बालों का प्राकृतिक कंडीशनर है जिससे बालों में चमक आती है। बालों में हल्‍का रंग भी इसे लगाने से आता है जो काफी लम्‍बे समय तक चढ़ा रहता है।
  • गर्मी दूर करे: मेंहदी बहुत ठंडी होती है जिसके कारण इसमें कई गुण समाएं रहते है। हिना की पत्तियां, शरीर से गर्मी को दूर भगाती है। अगर आप पैरों में मेंहदी का लगाएं तो आपको गर्मी या लू नहीं लगेगी। यह काफी प्रभावशाली होती है।

सन्दर्भ[संपादित करें]


बाहरी सूत्र[संपादित करें]