हाफ़िज़

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ख़्वाजा शम्स-अल-दीन (शम्सुद्दीन) मोहम्मद हाफ़िज़ शिराज़ी (फ़ारसी: خواجه شمس‌الدین محمد حافظ شیرازی ,१३२५-१३८९) एक विचारक और कवि थे जो अपनी फ़ारसी ग़जलों के लिए जाने जाते हैं । उनकी कविताओं में रहस्यमय प्रेम और भक्ति का मिला जुला असर दिखता है जिसे सूफ़ीवाद के एक स्तंभ के रूप में देखा जाता है । उनकी ग़ज़लों का दीवान (कविता संग्रह), ईरान में, हर घर में पाई जाने वाली किताबों में से एक है और लगभग सभी भाषाओं में अनूदित हो चुका है । उनकी मज़ार ईरान के शिराज़ शहर में स्थित है जहाँ उन्होने अपना पूरा जीवन बिताया ।

जीवनी[संपादित करें]

फ़ारसी संस्कृति पर उनके अमिट छाप के बावजूद उनकी ज़िन्दगी के शुरुआती दौर के बार में कुछ तथ्यपूर्ण जानकारी नहीं है । किंवदन्तियों के मुताबिक अपनी नौजवानी में एक रोटी बनाने वाली दुकान पर काम करते थे जहाँ पर उनको शाख़-ए-नबात नामक स्त्री से एकतरफ़ा प्रेम हो गया । मिलन की आशा न देखकर उन्होंने कविताएँ लिखना शुरु कीं जो बाद में क़ुरान और अत्तार से बहुत प्रभावित हुईँ । उनकी कविताओं में प्रेम, धर्म और दिखावे वाली ज़िन्दगी का मज़ाक मुख्य रूप से मिलता है ।