हलाकु ख़ान

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इलख़ानी साम्राज्य का संस्थापक हलाकु ख़ान अपनी पत्नी दोक़ुज़ ख़ातून के साथ
सन् १२५८ में हलाकु की फ़ौज बग़दाद को घेरे हुए
हलाकु द्वारा ज़र्ब किया गया ख़रगोश के चिह्न वाला सिक्का

हलाकु ख़ान या हुलेगु ख़ान (मंगोल: Хүлэг хаан, ख़ुलेगु ख़ान; फ़ारसी: هولاكو خان, हूलाकू ख़ान; अंग्रेजी: Hülegü Khan;; जन्म: १२१७ ई अनुमानित; देहांत: ८ फरवरी १२६५ ई) एक मंगोल ख़ान (शासक) था जिसने ईरान समेत दक्षिण-पश्चिमी एशिया के अन्य बड़े हिस्सों पर विजय करके वहाँ इलख़ानी साम्राज्य स्थापित किया। यह साम्राज्य मंगोल साम्राज्य का एक भाग था। हलाकु ख़ान के नेतृत्व में मंगोलों ने इस्लाम के सबसे शक्तिशाली केंद्र बग़दाद को तबाह कर दिया। ईरान पर अरब क़ब्ज़ा इस्लाम के उभरने के लगभग फ़ौरन बाद हो चुका था और तबसे वहाँ के सभी विद्वान अरबी भाषा में ही लिखा करते थे। बग़दाद की ताक़त नष्ट होने से ईरान में फ़ारसी भाषा फिर पनपने लगी और उस काल के बाद ईरानी विद्वान और इतिहासकार फ़ारसी में ही लिखा करते थे।[1] हलाकु के आक्रमणों का भारत पर एक बड़ा असर यह हुआ कि बहुत से ईरानी, अफ़्ग़ान और तुर्क विद्वान, शिल्पकार और अन्य लोग भागकर दिल्ली सल्तनत आकर बस गए और अपने साथ विद्या, वस्तुकला और अन्य ज्ञान लाए।[2]

पारिवारिक सम्बन्ध[संपादित करें]

हलाकु ख़ान मंगोल साम्राज्य के संस्थापक चंगेज़ ख़ान का पोता और उसके चौथे पुत्र तोलुइ ख़ान का पुत्र था। हलाकु की माता सोरग़ोग़तानी बेकी (तोलुइ ख़ान की पत्नी) ने उसे और उसके भाइयों को बहुत निपुणता से पाला और परवारिक परिस्थितियों पर ऐसा नियंत्रण रखा कि हलाकु आगे चलकर एक बड़ा साम्राज्य स्थापित कर सका।[3][4] हलाकु ख़ान की पत्नी दोक़ुज़ ख़ातून एक नेस्टोरियाई ईसाई थी और हलाकु के इलख़ानी साम्राज्य में बौद्ध धर्म और ईसाई धर्म को बढ़ावा दिया जाता था। दोक़ुज़ ख़ातून ने बहुत कोशिश की के हलाकु भी ईसाई बन जाए लेकिन जो मृत्यु के समय एक मुस्लिम बन गया[5]

बग़दाद का विनाश[संपादित करें]

नवम्बर १२५७ में हलाकु की मंगोल फ़ौज ने बग़दाद की तरफ़ कूच किया जहाँ से ख़लीफ़ा अपना इस्लामी राज चलता था। वहाँ पहुँचकर उसने अपनी सेना को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बांटा जो शहर से गुज़रने वाली दजला नदी (टाइग्रिस नदी) के दोनों किनारों पर आक्रमण कर सकें। उसने ख़लीफ़ा से आत्म-समर्पण करने को कहा लेकिन ख़लीफ़ा ने मना कर दिया। ख़लीफ़ा की सेना ने कुछ आक्रामकों को खदेड़ दिया लेकिन अगली मुठभेड़ में हार गई। मंगोलों ने ख़लीफ़ा की सेना के पीछे के बाँध तोड़ दिये जिस से बहुत से ख़लीफ़ाई सैनिक डूब गए और बाक़ियों को मंगोलों ने आसानी से मार डाला।

२९ जनवरी १२५८ में मंगोलों ने बग़दाद को घेरा डाला और ५ फ़रवरी तक वह शहर की रक्षक दीवार के एक हिस्से पर क़ब्ज़ा जमा चुके थे। अब ख़लीफ़ा ने हथियार डालने की सोची लेकिन मंगोलों ने बात करने से इनकार कर दिया और १३ फ़रवरी को बग़दाद शहर में घुस आये। उसके बाद एक हफ़्ते तक उन्होंने वहाँ क़त्ल, बलात्कार और लूट की। जिन नागरिकों ने भागने की कोशिश की उन्हें भी रोककर मारा गया या उनका बलात्कार किया गया। उस समय बग़दाद में एक महान पुस्तकालय था जिसमें खगोलशास्त्र से लेकर चिकित्साशास्त्र तक हर विषय पर अनगिनत दस्तावेज़ और किताबें थीं। मंगोलों ने सभी उठाकर नदी में फेंक दिये। जो शरणार्थी बचकर वहाँ से निकले उन्होंने कहा कि किताबों से बहती हुई स्याही से दजला का पानी काला हो गया था। महल, मस्जिदें, हस्पताल और अन्य महान इमारतें जला दी गई। यहाँ मरने वालों की संख्या कम-से-कम ९०,००० अनुमानित की जाती है।[6][7]

ख़लीफ़ा पर क्या बीती, इसपर दो अलग वर्णन मिलते हैं। यूरोप से बाद में आने वाले यात्री मार्को पोलो के अनुसार उसे भूखा मारा गया। लेकिन उस से अधिक विश्वसनीय मंगोल और मुस्लिम स्रोतों के अनुसार उसे एक क़ालीन में लपेट दिया गया और उसके ऊपर से तब तक घोड़े दौड़ाए गए जब तक उसने दम नहीं तोड़ दिया।[8]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Societies, Networks, and Transitions, Volume I: To 1500: A Global History, Craig A. Lockard, Cengage Learning, 2010, ISBN 978-1-4390-8535-6, ... Some historians see Hulegu's destruction of Baghdad as a fateful turning point for Arab society that ended the prosperity and intellectual glory ...
  2. A brief history of India, Judith E. Walsh, Infobase Publishing, 2006, ISBN 978-0-8160-5658-3, ... By 1258 the Mongols had destroyed the caliphate itself at Baghdad. Mongol power cut off local Turks and Afghans ... making the sultan capital at Delhi an attractive refuge for Muslim elites fleeing south ...
  3. Focus on World History: The Era of Expanding Global Connections: 1000-1500, Kathy Sammis, Walch Publishing, 2002, ISBN 978-0-8251-4369-4, ... As a widow, Sorqoqtani cared for and protected her sons, their children and grandchildren, and the great princes and soldiers who had served Chinggis Khan and Tolui Khan and were now attached to her sons ...
  4. The role of women in the Altaic world: Permanent International Altaistic Conference, 44th meeting, Walberberg, 26-31 August 2001, Otto Harrassowitz Verlag, 2007, ISBN 978-3-447-05537-6, ... After the death of Tolui Khan in the 1 3th century, his queen, Sorqaytani ruled alone for a short period ...
  5. Warriors of the Steppe: a military history of Central Asia, 500 BC to 1700 AD, Erik Hildinger, Da Capo Press, 1997, ISBN 978-0-306-81065-7, ... Hulegu was a Buddhist with two Nestorian Christian wives. His mother had also been a Nestorian Christian and he was well disposed toward them ...
  6. The Islamic world in ascendancy: from the Arab conquests to the siege of Vienna, Martin Sicker, Greenwood Publishing Group, 2000, ISBN 978-0-275-96892-2, ... some 90000 residents are thought to have been massacred, while most of the city was burned to the ground ...
  7. Circassian History, Kadir I. Natho, Xlibris Corporation, 2010, ISBN 978-1-4415-2388-4, ... As a part of this plan, Hulagu captured Baghdad on February 13, 1258, massacred all its inhabitants, trampled Caliph ... Then the Mongols feasted in it for five days, killing, looting, and raping, covering the streets with corpses ...
  8. Cities of the Middle East and North Africa: a historical encyclopedia, Michael Dumper, Bruce E. Stanley, ABC-CLIO, 2007, ISBN 978-1-57607-919-5, ... dammed by the library books thrown into its water; and the caliph al-Mutasim and his sons were,according to various reports,either strangled, rolled in a carpet and trampled,or locked up with only gold to eat until they starved ...