हरफनमौला (ऑल-राउन्डर)

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एक हरफनमौला (ऑल-राउन्डर) ऐसा क्रिकेट खिलाड़ी है जो नियमित तौर पर बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में अच्छा प्रदर्शन करता है। हालांकि सभी गेंदबाजों के लिए बल्लेबाजी जरूरी होती है और कुछ बल्लेबाज कभी-कभार गेंदबाजी भी करते हैं, ज्यादातर खिलाड़ी इन दो चीजों में से सिर्फ किसी एक में ही निपुण होते हैं और वे विशेषज्ञ माने जाते हैं। कुछ विकेट-कीपरों में विशेषज्ञ बल्लेबाजों की निपुणता होती है और वे भी हरफनमौला कहे जाते हैं, लेकिन उनके लिए विकेट-कीपर बल्लेबाज शब्दावली का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। महानतम हरफनमौला (ऑल-राउन्डरों) में इमरान खान, जॉर्ज हर्स्ट, विलफ्रेड रॉड्स, मुश्ताक मोहम्मद, कीथ मिलर, गारफील्ड सोबर्स, शाहिद आफरीदी, इयान बॉथम, जैक्स कैलिस, कपिल देव, रिचर्ड हैडली, डब्ल्यू. जी. ग्रेस, वाल्टर हैमंड, वसीम अकरम और युवराज सिंह का नाम लिया जा सकता है।

अवधारणा[संपादित करें]

वैसे किसी खिलाड़ी के लिए ऐसी कोई सटीक योग्यता नहीं है जिसके आधार पर उसे हरफनमौला माना जाए और इस नाम का प्रयोग व्यक्तिपरक हो जाता है। आमतौर पर 'वास्तविक हरफनमौला' उसे कहा जाता है जिसकी बल्लेबाजी या गेंदबाजी क्षमता ऐसी हो जिससे कि वो उनमें से किसी एक दम पर ही उस दल में जगह बनाने में कामयाब हो जिसके लिए वो खेलते हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें] 'वास्तविक हरफनमौला' की एक और परिभाषा ये है कि एक ऐसा खिलाड़ी जो अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी से (हालांकि जरूरी नहीं है कि एक ही मैच में दोनों का कमाल दिखे), लगातार अपने "दल के लिए मैच जीतने में मदद करे" (यानी, उत्कृष्ट व्यक्तिगत प्रदर्शन से अपने दल की जीत में भूमिका निभाए). परिभाषा के मुताबिक एक वास्तविक हरफनमौला टीम के लिए बेहद दुर्लभ और काफी मूल्यवान खिलाड़ी होता है क्योंकि वो प्रभावी तौर पर दो खिलाड़ियों के रूप में काम करता है।

कभी-कभी भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है जब एक विशेषज्ञ गेंदबाज बल्ले से अच्छा प्रदर्शन करता है। उदाहरण के लिए, वेस्ट इंडीज़ के महान तेज गेंदबाज मैल्कॉम मार्शल कई बार अच्छी पारी खेला करते थे, लेकिन ये इतनी बार नहीं होता था कि उन्हें हरफनमौला माना जाए. इसके बजाए उन्हें निम्न क्रम का अच्छा बल्लेबाज कहा जा सकता है। इसी तरह एक विशेषज्ञ बल्लेबाज को उपयोगी बदलाव का गेंदबाज कहा जा सकता है और इसके एक अच्छे उदाहरण एलन बॉर्डर हैं जिन्होंने 1989 में एक बार एक टेस्ट मैच में तब 11 विकेट लिए, जब परिस्थितियां उनके बाएं हाथ की फिरकी गेंदबाजी के अनुकूल थीं।[1]

मान्यता प्राप्त हरफनमौला बनने में प्रमुख बाधाओं में से एक है बल्लेबाजों और गेंदबाजों का अलग-अलग उम्र में शिखर पर पहुंचना. बल्लेबाज तीस साल के आसपास अपने शिखर पर तब पहुंचते हैं जब उनकी तकनीकी अनुभव के साथ परिपक्व हो जाती है। इसके उलट तेज गेंदबाज अक्सर बीस से पच्चीस साल के दौरान शारीरिक क्षमता के साथ-साथ अपने शिखर पर पहुंच जाते हैं। दूसरे गेंदबाज, ज्यादातर फिरकी गेंदबाजों और गेंद को घुमाने वाले तेज गेंदबाज भी अपने करियर के आखिर में ज्यादा असरदार होते हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

आंकड़ों का एक सामान्य पर इस्तेमाल किया जाने वाला नियम यह है कि खिलाड़ी का बल्लेबाजी औसत (जितना ज्यादा हो उतना अच्छा) उसके गेंदबाजी औसत (जितना कम हो उतना अच्छा) से ज्यादा होना चाहिए. टेस्ट क्रिकेट में, ऐसे सिर्फ तीन हरफनमौला हैं जिनका बल्लेबाजी औसत उनके गेंदबाजी औसत की तुलना में बीस अंक ज्यादा हैं: गारफील्ड सोबर्स, जैक्स कैलिस और वॉल्टर हैमंड. हालांकि, कुछ दूसरे खिलाड़ी भी हैं जिन्होंने अपने करियर के बड़े हिस्से तक यह उपलब्धि हासिल की, जैसे इमरान खान, स्टीव वॉ, एंड्रू सायमंड्स और शेन वाटसन. (माइकल स्लेटर का बल्लेबाजी औसत 42.8 और गेंदबाजी औसत 10.0 था, लेकिन इस तरह के मामलों को निर्दिष्ट कम से कम मैच, रन या विकेट की संख्या के आधार पर बाहर रखा जाता है; स्लेटर ने अपने पूरे करियर में कुल दस रन देकर सिर्फ एक विकेट लिया है।) डफ वॉल्टर्स ने बल्लेबाजी औसत 48.26 और गेंदबाजी औसत 29.08 से अपने बल्लेबाजी और गेंदबाजी औसत में तकरीबन बीस रन का अंतर हासिल कर लिया था, बावजूद इसके वे आमतौर पर कभी-कभार गेंदबाजी करने वाले और साझेदारी तोड़ने वाले ही माने जाते थे, वास्तविक हरफनमौला नहीं.

कुल मिलाकर प्रथम-श्रेणी क्रिकेट में ऐसे कई क्रिकेटर हैं जिनका बल्लेबाजी औसत बहुत ज्यादा है। आंकड़ों में बहुत कम ही होंगे जो फ्रैंक वूली को चुनौती दे सकते हैं जिनका बल्लेबाजी औसत 40.77 और गेंदबाजी औसत 19.87 था। वूली ने अपने करियर में 2000 से ज्यादा विकेट लिए, जैक हॉब्स को छोड़कर किसी भी खिलाड़ी से ज्यादा रन बनाए और वे एकमात्र गैर-विकेटकीपर हैं जिन्होंने 1000 से ज्यादा कैच लपके हैं।[2]

क्षेत्ररक्षण कौशल किसी खिलाड़ी की हरफनमौला क्षमता का एक और महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। वूली के अलावा दूसरे महान क्षेत्ररक्षकों को जिन्हें हरफनमौला कहा जाता है, उनमें डब्ल्यू. जी. ग्रेस, वॉल्टर हैमंड और गैरी सोबर्स शामिल हैं। ये सभी मैदान पर काफी चुस्त क्षेत्ररक्षक और सुरक्षित कैच लपकने वाले थे।

मूलत: एक हरफनमौला, बल्लेबाजी की अपेक्षा गेंदबाजी में बेहतर होता है, इसी तरह गेंदबाजी की अपेक्षा बल्लेबाजी में बेहतर होता है। बहुत कम हैं जो दोनों में ही अच्छे हैं और शायद कोई भी नहीं है जो दोनों में आर्श्यचनक रूप से बेहतर है। यही वजह है कि "गेंदबाज हरफनमौला" और "बल्लेबाज हरफनमौला" नाम सामने आए.[कृपया उद्धरण जोड़ें] उदाहरण के लिए, टेस्ट क्रिकेट में कीथ मिलर का बल्लेबाजी में 36.97 का एक अच्छा औसत था, (लेकिन प्रथम श्रेणी में इससे ज्यादा औसत था 48.90) और 22.97 का बेहतरीन गेंदबाजी औसत था, इसलिए उन्हें गेंदबाज हरफनमौला कहा जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] इसके विपरित, गैरी सोबर्स का 57.78 का जबरदस्त बल्लेबाजी औसत और 34.03 का गेंदबाजी का औसत था, इसलिए उन्हें बल्लेबाज हरफनमौला कहा जा सकता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] वास्तविक हरफनमौला में आदर्श हैं इमरान खान जिनका बल्लेबाजी में औसत 37 और गेंदबाजी में 23 का औसत था, जो एक बल्लेबाज के तौर पर बहुत अच्छा तथा गेंदबाज के तौर पर बेहतरीन है।

सोबर्स "अब तक के महानतम हरफनमौला"[3][4]माने जाते हैं यद्यपि आंकड़े बताते हैं, वे भी एक क्षेत्र के मुकाबले दूसरे में ज्यादा अच्छे थे। उन्हें मुख्यतौर पर एक महान बल्लेबाज और बहुत अच्छे गेंदबाज के तौर पर वर्णित किया जाता है। उनकी विशिष्ट क्षमता ये थी कि वे मध्यम तेज गेंदबाजी के साथ-साथ कलाइयों से फिरकी गेंद भी फेंक सकते थे, जबकि वे असलियत में वेस्ट इंडीज़ टीम में अंगुलियों के फिरकी गेंदबाज के तौर पर शामिल हुए थे। विस्डेन क्रिकेटर्स ऑफ द सेंचूरी (Wisden Cricketers of the Century) अवॉर्ड के लिए 100 निर्णायकों में से 90 ने अपने पांच चयनों में सोबर्स का ही चयन किया।

एक हरफऩमौला जिसे 1970 और 1980 के दशक में रंगभेद नीति की वजह से टेस्ट क्रिकेट से दूर रहना पड़ा उसका नाम था दक्षिण अफ्रीकी क्लाइव राइस. उनका प्रथम-श्रेणी में बल्लेबाजी का औसत 40.95 और गेंदबाजी औसत 22.49 था। दक्षिण अफ्रीका के ही एक अन्य बेहतरीन हरफनमौला थे माइक प्रॉक्टर वो भी इसी कारण से सिर्फ सात टेस्ट ही खेल पाए, जिसमें उन्होंने 15.02 के औसत से 41 विकेट लिए. उनकी बल्लेबाजी का औसत टेस्ट में 25.11 और प्रथम-श्रेणी में 36.01 था, तथा उन्होंने 401 मैचों में 48 प्रथम-श्रेणी के शतक बनाए जिसमें लगातार पारियों में समान संख्या में छक्के भी जड़े.

उल्लेखनीय हरफनमौला उपलब्धियां[संपादित करें]

मिडलसेक्स के वी ई वॉकर ने 21, 22 और 23 जुलाई 1859 को ओवल में सरे के खिलाफ ऑल इंग्लैंड के लिए खेलते हुए सरे की पहली पारी के सभी दस विकेट चटकाए तथा फिर इंग्लैंड की पहली पारी में नाबाद बल्लेबाज (20*) रहे, जबकि दूसरी पारी में 108 की पारी खेली. उन्होंने सरे की दूसरी पारी में भी चार विकेट लिए. ऑल इंग्लैंड ने यह मैच 392 रनों से जीत लिया।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

15 अगस्त 1862 को ई एम ग्रेस एमसीसी की पूरी पारी तक बल्लेबाजी करते रहे और कुल 344 रन में नाबाद 192 रन बनाए. उसके बाद अंडरआर्म (underarm) गेंदबाजी करते हुए उन्होंने 69 रन देकर केंट के सभी दस विकेट लिए. हालांकि ये एक औपचारिक रिकॉर्ड नहीं है क्योंकि ये 12-12 खिलाड़ियों के दलों के बीच मुकाबला था (यद्यपि केंट के बल्लेबाजों में से एक चोटिल हो गया था).[कृपया उद्धरण जोड़ें]

किसी एक अंग्रेजी मौसम में 1000 रन और 100 विकेट लेने का दोहरा कारनामा करने वाले पहले खिलाड़ी डब्ल्यू जी ग्रेस थे। उन्होंने 71.30 के औसत से 2139 रन बनाए और 12.94 के औसत से 106 विकेट लिए. 1886 तक ग्रेस ने आठ बार इस तरह की दोहरी कामयाबी हासिल की और 1882 में पहली बार किसी दूसरे खिलाड़ी (सी टी स्टड) ने यह दोहरा कारनामा हासिल किया।[5]

1906 के अंग्रेजी क्रिकेट मौसम में, जॉर्ज हर्बर्ट हर्स्ट ने 2000 से ज्यादा रन बनाने और 200 से ज्यादा विकेट लेने की अनोखी उपलब्धि हासिल की. उन्होंने 45.86 के औसत से छह शतकों के साथ 2385 रन बनाए जिसमें 169 उनका उच्चतम स्कोर था।[6] उन्होंने 16.50 के औसत से 208 विकेट भी लिए जिसमें सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी 18 रन देकर 7 विकेट शामिल थे।[7] उसी मौसम में हर्स्ट ने एक और अनोखी उपलब्धि तब हासिल की जब उन्होंने एक ही मैच की दोनों पारियों में शतक जमाया और दोनों पारियों में गेंदबाजी करते हुए पांच-पांच विकेट लिए. बाथ में सॉमरसेट के खिलाफ यॉर्कशायर के लिए खेलते हुए हर्स्ट ने 111 और 117 नाबाद रन बनाए और फिर 6/70 और 5/45 विकेट झटके.[8][9]

जॉर्ज गिफेन (1886, 1893 व 1896) और वारविक आर्मस्ट्रॉन्ग (1905, 1909 व 1921) ने एक अंग्रेजी मौसम में इस दोहरी कामयाबी को तीन बार हासिल किया, ये किसी दौरा करने वाली टीम के सदस्य द्वारा सबसे ज्यादा है।[10]

एलन डेविडसन पहले खिलाड़ी थे जिन्होंने एक टेस्ट मैच में दस विकेट और सौ रन से ज्यादा बनाया. 1960-61 में ब्रिसबेन में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलते हुए उन्होंने 5/135 और 6/87 लिए, तथा बल्लेबाजी करते हुए 44 व 80 रन भी बनाए जो कि पहला बराबरी (Tied) पर छूटने वाला टेस्ट मैच था। वे पूरे मैच के दौरान टूटी हुई अंगूली के साथ खेलते रहे थे।[11]

उन्नीस खिलाड़ियों ने कुल 26 मौकों पर उसी टेस्ट मैच में पांच विकेट लिए और शतक भी जमाया. इयान बॉथम ने ये उपलब्धि पांच बार हासिल किया और जैक्स कैलिस, गारफील्ड सोबर्स और मुश्ताक मोहम्मद दो-दो बार ऐसा करने में कामयाब हुए.[12]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • बल्लेबाज
  • गेंदबाज (क्रिकेट)
  • डबल (क्रिकेट)
  • फील्डर
  • विकेट-कीपर
  • क्रिकेट शब्दावली

संदर्भ[संपादित करें]

उद्धृत सूत्र[संपादित करें]

साँचा:All-rounders-Double