हठयोग प्रदीपिका

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सयु ाज्य े धाश्चभकत े दशे े सश्चुबऺ े श्चनरुऩद्रव े। धन्ु प्रभाणऩमन्तत ॊ श्चशराश्चिजरवश्चजतत े। एकान्त े भश्चिकाभध्य ेस्थातव्य ॊ हिमोश्चगना ॥१२॥ Surājye dhārmike deśe subhikshe nirupadrave dhanuh pramānaparyantam śilāgnijalavarjite Ekānte mathikāmadhye sthātavyam hathayoginā

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