स्वानिकी
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स्वानिकी या स्वरविज्ञान, भाषाविज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत मानव द्वारा बोली जाने वाली ध्वनियों का अध्ययन किया जाता है। यह बोली जाने वाली ध्वनियों के भौतिक गुण, उनके शारीरिक उत्पादन, श्रवण ग्रहण और तंत्रिका-शारीरिक बोध की प्रक्रियाओं से संबंधित है।
स्वानिकी का अध्ययन प्राचीन भारत मे लगभग २५०० वर्ष पहले से किया जाता था, इसका प्रमाण हमें पाणिनि द्वारा ५०० ई पू मे रचित उनके संस्कृत के व्याकरण संबंधी ग्रंथ अष्टाध्यायी मे मिलता है, अष्टध्यायी मे व्यंजनों का स्थान तथा उनकी संधि का विस्तार से वर्णन किया गया है। आज की अधिकतर भारतीय लिपियों मे व्यंजनों का स्थान पाणिनि के वर्गीकरण पर आधारित है।