स्वप्नदोष
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अपने नाम के विपरीत स्वप्नदोष (Nocturnal emission) कोई दोष न होकर एक स्वाभाविक दैहिक क्रिया है जिसके अंतर्गत एक पुरुष को नींद के दौरान वीर्यपात (स्खलन) हो जाता है, इसके दौरान पुरुष एक स्वतःस्फूर्त यौनानन्द का अनुभव भी करते हैं। यह प्रक्रिया स्त्रियों में भी देखी जाती है जिसके परिणामस्वरूप उनकी योनि स्निग्ध (चिपचिपी) हो जाती है।
स्वप्नदोष, किशोरावस्था और शुरुआती वयस्क वर्षों मे के दौरान होने वाली एक सामान्य घटना है, लेकिन यह उत्सर्जन यौवन के बाद किसी भी समय हो सकता है। आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक पुरुष स्वप्नदोष को अनुभव करे, जहां अधिकांश पुरुष इसे अनुभव करते हैं वहीं कुछ पूर्ण रूप से स्वस्थ और सामान्य पुरुष भी इसका अनुभव नहीं करते। स्वप्नदोष के दौरान पुरुषों को कामोद्दीपक सपने आ सकते हैं और यह स्तंभन के बिना भी हो सकता है।
सपने, अगर याद करें तो जरूरी नहीं कि कामोद्दीपक ही हों और कई बार स्वप्नद्रष्टा के लिये भ्रामक हो सकते हैं, विशेष रूप से यदि वो एक किशोर हो और उसे पहली बार स्वप्नदोष हुआ हो।
स्वप्नदोष, एक कामोद्दीपक सपने के बाद होने वाली एक स्वाभाविक शारीरिक प्रतिक्रिया है जिसके कारण पुरुष व्यक्ति के भीतर लगातार उत्पादित हो रहीं शुक्राणु कोशिकाओं की बहुतायत को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।