स्तन ग्रंथि

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स्त्री की स्तनग्रन्थि

स्तनग्रंथि (Mammary gland) स्तनधारी वर्ग के शरीर की एक विशेष और अनूठी ग्रंथि है। यह "दूध" का स्रवण करती है जो नवजात शिशु के लिए पोषक आहार है। इस प्रकरण में सबसे आद्यकालीन (primitive) स्तनधारी डकबिल (duckbill) और प्लेटिपस (platypus) हैं जो अंडा देते हैं। इनकी स्तनग्रंथि में चूचुक (nipples) का अभाव होता है और दूध की रसना (oozing) दो स्तनप्रदेशों से होती है जिसे पशुशावक जीभ से चाटते हैं।

धानी प्राणीगण, जैसे कंगारू, में स्तनग्रंथि से संबंधित उसके नीचे एक धानी (pouch) रहती है जिसे स्तनगर्त (mammary pocket) कहते हैं। जन्म के बाद पशुशावक गर्भाशय से रेंगकर स्तनगर्त में आ जाते हैं। वहाँ वे अधिक समय तक अपना मुँह चूचक से लगाए रहते हैं और इस तरह दुग्ध आहार ग्रहण करते हैं।

मानव जाति में जन्म के समय स्तनग्रंथि का प्रतिरूप केवल चूचक होता है। स्तनग्रंथियों को त्वचाग्रंथि माना जाता है क्योंकि त्वचा की तरह इनकी भ्रूणीय उत्पत्ति भी बहिर्जनस्तर (ectoderm) की वृद्धि से होती है। तरुण अवस्था में एस्ट्रोजेन (oestrogen), (स्त्री मदजन), हारमोन और मदचक्र (oestrons cycle) के कारण स्तन ऊतकों को अधिक उत्तेजना मिलती है और स्तन की नली प्रणाली, वसा और स्तन ऊतक में अधिक वृद्धि होती है। गर्भावस्था में स्तनग्रंथि की नलियाँ शाखीय हो जाती हैं और इन शाखाओं के छोर पर नई प्रकार की अंगूर की तरह कोष्ठिकाओं (alveori) की वृद्धि होती है। इन कोष्ठिकाओं की धारिच्छद कोशिकाएँ (epithlial cells) दूध और कोलोस्ट्रम (colostrum) स्रावित करने में समर्थ होती हैं जो अवकाशिका (central cavity) में एकत्र होते हैं और इस कारण स्तन में फैलाव भी होता है। गर्भावस्था में कोष्ठिकाओं की वृद्धि को अंडाशय (ovary) के हारमोन (oestrogen) एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टरोन (progesterone) से और पियुषिका पिंड के अग्रखंड (anterior lobe of pituitary) में स्रावित एक दुग्धजनक हारमोन (lactogenic hormone) से अधिक उत्तेजना मिलती है। दूध की उत्पत्ति कोष्ठिकाओं की संख्या पर निर्भर होती है। प्रसूति (parturition) के समय स्तनग्रंथियाँ पूर्ण रूप से विकसित और दूध स्रावित करने में समर्थ रहती हैं।

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