सोंग यु

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सोंग यु (चीनी: 宋玉, अंग्रेज़ी: Song Yu) तीसरी सदी ईसापूर्व में चीन के झगड़ते राज्यों के काल के दौरान चू राज्य का एक कवि था। उसकी जीवनी के बारे में ज़्यादा कुछ तो नहीं मालूम लेकिन उसे प्रसिद्ध कवि चू युआन (屈原, Qu Yuan) का भांजा या भतीजा बताया जाता है। यह भी कहा जाता है कि वह चू युआन का छात्र था। उसे उस काल में बने प्रसिद्ध 'चू-त्सि' (楚辭, Chu Ci) नामक कविता संग्रह की कुछ कविताओं का रचियता भी माना जाता है।[1]

वह एक ग़रीब परिवार में जन्मा था और चू राज-दरबार में उसे एक लेखक का दर्जा प्राप्त था। चू युआन के देहांत के बाद वह 'चिफ़ू' शैली का एक प्रमुख लेखक बना, जिसमें तुकबंदी के साथ भावुक चीज़ों के बारे में लिखा जाता था। यह शैली हान राजवंश और त्साओ वेई राज्य में बहुत पनपी। 'हान ग्रन्थ' नामक चीनी इतिहास-ग्रन्थ के साहित्य और कला विभाग में कहा गया है कि सोंग यु ने १६ कृतियाँ बनाई थीं लेकिन उनमें से १४ ही बची हैं। चीन साहित्य इतिहास में सोंग यु का नाम चू युआन के साथ इतना जोड़ा जाता है कि कभी-कभी इन दोनों को एक साथ 'चू-सोंग' बुलाया जाता है।

प्रेम कविता[संपादित करें]

सोंग यु को स्त्री-पुरुष के प्रेम का कवि माना जाता है और यह छवि उसकी 'दंगतुज़ी हओसे फ़ू' (登徒子好色赋, यानि 'व्यभिचारी श्रीमान दंगतु की कविता-कहानी') नामक रचना पर आधारित है। इसमें एक दंगतु नामक दरबारी राजा के सामने सोंग यु को व्यभिचारी होने का दोष देते हुए कहता है कि:

सोंग यु एक सुन्दर चेहरे और शांत स्वभाव वाला वाला आदमी है, जिसकी ज़ुबान से बेहिचक गूढ़ मतलब वाले वाक्य निकलते हैं। ऊपर से इसका चरित्र व्यभिचारी है। मैं महाराज से विनती करता हूँ कि इसे अपने साथ महारानी के गृह में कभी न ले जाया कीजिये।

सोंग यु पहले तो कहता है कि उसका सुन्दर मुख और शांत स्वभाव दिव्य देन है और उसने अपना गूढ़ बोलने का ढंग अपने (पूजनीय) गुरु से सीखा है। फिर वह अपने ऊपर लगे व्यभिचार के आरोप से अपनी रक्षा करते हुए कहता है कि:

मेरे पड़ोस की लड़की अगर एक इंच और लम्बी होती तो बहुत ज़्यादा लम्बी होती, लेकिन अगर एक इंच कम होती तो बहुत नाटी होती (अर्थ: बिलकुल सुन्दर कद की है)। अगर उसके चेहरे पर ज़रा और सफेदी लगती तो वह बहुत ज़्यादा सफ़ेद लगती, लेकिन अगर ज़रा सुर्ख़ी और लगाती तो बहुत ज़्यादा लाल लगती (अर्थ: इस से अच्छा रंग नहीं हो सकता)। उसकी भौंह रामचिरैया (किंगफ़िशर) के पंखों जैसी हैं, उसका बदन बर्फ़ जैसा शुद्ध सफ़ेद है। उसकी कमर रेशम के एक नए गोले जैसी है, उसके दांत छोटी सीपियों जैसे हैं। उसकी एक मुस्कराहट से यांग के पूरे शहर में हलचल मच जाए और शियात्साई बस्ती को दीवाना कर दे। तीन सालों से यह स्त्री अपने बग़ीचे की दीवार चढ़कर मुझे देखती है, लेकिन आज तक मैं उसके वश में नहीं आया। लेकिन श्रीमान दंगतु का बर्ताव इस से कितना अलग है! उनकी पत्नी के ऊन जैसे रूखे बाल और बेढंगे कान हैं; टेढ़े-मेढ़े बहार को निकले हुए दांत हैं; पीठ में कुब्ब है और ऊट-पटांग चाल है। ऊपर से आगे और पीछे रिसती हुई फुंसियाँ हैं। फिर भी दंगतु को उस से प्रेम हो गया और उस के साथ पाँच बच्चे पैदा कर चुका है। महाराज ज़रा सोचिये, हम से से कौन व्यभिचारी है।[2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Classical Chinese literature: an anthology of translations, Volume 1, John Minford, Joseph S. M. Lau, Chinese University Press, 2000, ISBN 978-962-996-048-3, ... The 'Rhapsody on the Wind' is attributed to Song Yu, a writer of the third century BC who served at the court of the state of Chu and was a disciple of the famous poet-statesman Qu Yuan ...
  2. The fragile scholar: power and masculinity in Chinese culture, Geng Song, Hong Kong University Press, 2004, ISBN 978-962-209-620-2, ... Song Yu has been associated with romantic love mainly because of hi 'Dengtuzi haose fu' ...