सी प्रोग्रामिंग भाषा

विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से

यहां जाईयें: नेविगेशन, ख़ोज

अनुक्रम

[संपादित करें] सी का इतिहास

सन 1960 मे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने एक कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा का विकास किया जिसे उन्होने BASIC COMBINED PROGRAMMING LANGUAGE (BCPL) नाम दिया | इसे सामान्य बोल-चाल की भाषा मे B कहा गया। ’बी’ भाषा को सन 1972 मे बेल्ल प्रयोगशाला (Bell Laboratory) मे कम्प्यूटर वैज्ञानिक डेनिश रिची ( Dennis Ritachie ) द्वारा संशोधित किया गया। ’सी’ प्रोग्रामिंग भाषा ’बी’ प्रोग्रामिंग भाषा का ही संशोधित रूप है। ’सी’ को यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम और डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम दोनो मे प्रयोग किया जा सकता है , अन्तर मात्र कम्पाइलर का होता है। यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम ’सी’ मे लिखा गया ऑपरेटिंग सिस्स्टम है। यह विशेषत: ’सी’ को प्रयोग करने के लिये ही बनाया गया है अत: अधिकतर ’सी’ का प्रयोग यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम पर ही किया गया है।

सी-भाषा मामूली अन्तर के साथ कई उपभाषाओं (dilects) के रूप में मिलती है।अमेरिकन नेशनल स्टैण्डर्ड्स इंस्टीट्यूट (American National Standard Institute (ANSI) ) द्वारा विकसित ANSI 'C' को अधिकतर मानक माना जाता है।

[संपादित करें] ’सी’ प्रोग्रामिंग भाषा की विशेषताएं

१) इस प्रोग्रामिंग भाषा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमे उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा के समस्त गुण तो है ही, साथ ही इसमे निम्न स्तरीय भाषा के समस्त गुण पाए जाते है। उच्च स्तरीय भाषा FORTRAN,COBOL भी है लेकिन इसमे निम्न स्तरीय भाषा के गुण नही पाए जाते।

(२) इस प्रोग्रामिंग भाषा मे तैयार किये गये प्रोग्राम की गति अपेक्षाकृत तीव्र होती है। यह 0 से 15000 तक गिनने मे लगभग एक सेकण्ड का समय लगाती है जबकि बेसिक मे इस कार्य मे लगभग 50 सेकण्ड लगते है।

(३) ’सी’ प्रोग्रामिंग भाषा मे प्रोग्राम मे प्रयोग करने हेतु अनेक functions परिभाषित होते है परन्तु इसमे एक अतिरिक्त सुविधा यह भी है कि प्रोग्रामर अपनी आवश्यकतानुसार नए functions भी परिभाषित कर सकता है।

(४) इसमे मात्र 29 की शब्दों का प्रयोग होता है इसके साथ ही इसमे अनेक अन्य सहायक प्रोग्राम भी होते है जिसकी सहायता से जटिल functions भी सफलतापूर्वक किए जा सकते है।

(५) यह मुख्यत: गणित, विज्ञान एवं सिस्टम संबंधित कार्यो के काम आती है।

(६) इस भाषा मे निर्देश देते समय lower case letters का ही प्रयोग किया जाता है।

उपरोक्त विशेषताओ के कारण ही ’सी’ एक अत्यधिक लोकप्रिय कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग भाषा है।

[संपादित करें] प्रोग्राम लिखने की विधि

’सी’ प्रोग्रामिंग भाषा मे कोइ भी प्रोग्राम execute करने के लिये हमे एक main() फंक्शन जरूर लिखना होता है। क्योंकि ’सी’ कम्पाइलर प्रोग्राम को execute करना main() फंक्शन से प्रारंभ होता है। एक फाइल अथवा एक प्रोग्राम मे एक से अधिक main() फंक्शन नही हो सकते ।
main()
{
.........
.........
}
यह एक प्रयोगकर्ता द्वारा परिभाषित फंक्शन है। main() फंक्शन को शुरू ’{’ कोष्ठक द्वारा किया जाता है । प्रोग्राम फाइल के execution के समय ’{’ यह बताता है कि execution यहाँ से शुरु होना है। इसी प्रकार ’}’ यह बताता है कि execution यहाँ समाप्त होना है। एक प्रोग्राम मे main() फंक्शन तो एक ही रहता है परन्तु अन्य फंक्शन का प्रयोग किया जा सकता है। प्रत्येक फंक्शन के लिये { और } के मध्य उपप्रोग्राम दिया जाता है। प्रत्येक निर्देश का अन्त सेमीकालन ’;’ द्वारा होना आवश्यक है।

सी-प्रोग्राम का एक उदाहरणः

main()
{
print("/nMY NAME IS......./n");
}


इस प्रोग्राम को चलाने पर इसका आउटपुट निम्नवत होगा:

MY NAME IS.......

[संपादित करें] इन्हें भी देखें

[संपादित करें] वाह्य सूत्र

वैयक्तिक औज़ार