सीमुर्ग़

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बुख़ारा के नादिर दीवान-बेग़ी मदरसे के बाहर सीमुर्ग़ का एक चित्रण
सीमुर्ग़ सासानी साम्राज्य का एक राजचिह्न था

सीमुर्ग़​ (फ़ारसी: سیمرغ‎) या अनक़ा (फ़ारसी: عنقا‎‎) ईरान की प्राचीन मिथ्य -कथाओं में एक ऐसे भीमकाय उड़ने वाले मादा प्राणी का नाम था जो अपनी दया, उदारता और ज्ञान के लिए जाना जाती थी। इसके पंखों से हर रोग और चोट ठीक हो जाती थी और इसके प्रभाव से भूमि, जल, आकाश और प्राणी-जगत में शान्ति फैलती थी। इसी पक्षी को मध्य एशिया के तुर्की लोग द्वारा और भारत के कुछ भागों में भी माना जाता था।[1] सीमुर्ग़​ को 'सीमुर्व', 'सेमुर्ग', 'समरुक' और 'समरन' जैसे नामों से भी जाना जाता है।

नाम का उच्चारण और संस्कृत से सजातीयता[संपादित करें]

'सीमुर्ग़​' में 'ग़' अक्षर के उच्चारण पर ध्यान दें क्योंकि यह बिना बिन्दु वाले 'ग' से ज़रा भिन्न है। इसका उच्चारण 'ग़लती' और 'ग़रीब' शब्दों के 'ग़' से मिलता है। यह प्राचीन पहलवी भाषा के 'सेनमुर्व' शब्द से और उसे से भी प्राचीन 'सेनमुरुग़​' शब्द से उत्पन्न हुआ है। यह इस से भी प्राचीन अवस्ताई भाषा के 'मरग़ो साएनो' (mərəγō Saēnō) से आया है जिसका मतलब है 'साएना मुर्ग़ा' यानी 'साएना पक्षी'। 'साएना' का अर्थ चील, बाज़, या अन्य शिकार करने वाला पक्षी हुआ करता था और ध्यान दें कि हिन्द-ईरानी भाषा-परिवार कि बहुत क़रीबी बहने होने की वजह से अवस्ताई फ़ारसी और संस्कृत में इसके लिए एक-जैसे सजातीय शब्द हैं। संस्कृत में इसे 'श्येन' कहा जाता है।[2]

वैसे तो 'मुर्ग़' का भी संस्कृत सजातीय शब्द 'मृग' मौजूद है। लेकिन जब हिन्द-ईरानी भाषाओँ की हिन्द-आर्य और ईरानी शाखाएँ अलग हुई तो ईरानी शाखा में 'मुर्ग़' का अर्थ 'पक्षी' बन गया और हिन्द-आर्य में 'मृग' का अर्थ पहले तो 'जानवर' और फिर विशेष रूप से 'हिरण' बन गया।[3][4]

रूप-रंग और महत्व[संपादित करें]

ईरानी कला में सीमुर्ग़​ को एक पक्षी के रूप में दर्शाया जाता है जो इतनी भीमकाय है कि वह किसी हाथी को भी उठा कर ले जा सकती है। अक्सर इसे एक मोर के धड़, कुत्ते के मुंह और सिंह के पंजों से साथ दिखाया जाता है हालांकि कभी-कभी इसे मनुष्यों का भी मुख दिया जाता है। इसे उदार समझा जाता है और पक्षी होने के बावजूद स्तनों द्वारा अपने बच्चों का पोषण करने वाला बताया जाता है। कहा जाता है कि इसका सर्पों से जन्मजात वैर है। इसकी उम्र इतनी है कि इसने तीन दफ़ा विश्व-प्रलय देखी है और अपनी आयु के कारण कई युगों का ज्ञान और समझ रखती है। इसके नाम को लेकर आधुनिक-फ़ारसी जानने वालों में यह ग़लत भ्रम भी पैदा हो जाता है कि इसका 'तीस' की संख्या से कुछ सम्बन्ध है, हालांकि मूल नाम का ऐसा कोई अर्थ नहीं था। आधुनिक फ़ारसी भाषा में 'सी' का अर्थ 'तीस' (३०) होता है। इस से यह धारणा भी पैदा हो गई है कि इसके तीस रंग थे (सीरंग) या इसका अकार तीस पक्षियों के बराबर था।

प्राचीन मिथ्य-कथाओं में सीमुर्ग़​ को ज़मीन और आकाश को शुद्ध करने वाली और उपजाऊ बनाने वाली कहा जाता था। यह वोउरुकश​ (Vourukasha) नामक विश्व सागर के बीच खड़े एक होम (Hom) जीवन-वृक्ष पर रहती थी। यह वही वनस्पति है जिसे संस्कृत में सोम कहा जाता है। इस वृक्ष की उन शाखों की तुलना जहाँ सीमुर्ग़ रहता है एक बैल के सींगों से की गई है। वृक्ष को 'गओकरन' (گئوکرن, Gaokerena, यानि 'गाय के सींग') कहते है, जिसका सजातीय संस्कृत का 'गोकर्ण' (यानि 'गाय के कान') शब्द है।[5]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. An Anglo-Indian dictionary: a glossary of Indian terms used in English, and of such English or other non-Indian terms as have obtained special meanings in India, George Clifford Whitworth, pp. 294, Kegan, Paul, Trench & Co, 1885, ... Simurgh [Hindustani] - A fabulous bird ...
  2. Spoken Sanskrit Dictionary: श्येन, सम्भाषणसंस्कृतम शब्दकोशः, spokensanskrit.de, Accessed 2012-06-06, ... श्येन eagle-like, any bird of prey, falcon, hawk, eagle ...
  3. Aryan and non-Aryan in India, Madhav Deshpande, Center for South and Southeast Asian Studies, University of Michigan, 1979, ISBN 978-0-89148-014-3, ... This is cognate, it is true, with Sanskrit mrga 'quadruped, animal', but 'bird' - the meaning in Persian - is not one of the meanings of the Sanskrit ...
  4. Spoken Sanskrit Dictionary: मृग, सम्भाषणसंस्कृतम शब्दकोशः, spokensanskrit.de, Accessed 2012-06-06, ... मृग antelope, beast, animal, deer ...
  5. Commentar ûber das Avesta, Friedrich von Spiegel, pp. 463, W. Engelmann, 1864, ... Gaokerena ist nach der Erklärung der Huzvä- resch- Übersetzung der weisse ... auch im Sanskrit gokarna häufig zur Bezeichnung von Pflanzen verwendet wird ...