सीता राम गोयल

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चित्र:Sita Ram Goel.JPG
श्री सीता राम गोयल

सीता राम गोयल (१९२१ - २००३) भारत के बीसवीं शती के प्रमुख बुद्धिजीवी थे। वे एक लेखक, उपन्यासकार और प्रकाशक थे। उन्होने हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं मे पुस्तको का प्रकाशन किया। विख्यात ऋषि और दार्शनिक राम स्वरूप उनके गुरु और सहयोगी थे। १९४० के दशक में उनका झुकाव मार्क्सवाद की तरफ था किन्तु बाद में वे घोर साम्यवाद-विरोधी हो गये। बाद में वे इसाईयत, इस्लाम एवं भारतीय इतिहास एवं राजनीति के प्रमुख व्याख्याता (कमेंटेटर) बनकर उभरे।

अनुक्रम

जीवनी [संपादित करें]

आरम्भिक जीवन [संपादित करें]

श्री सीता राम गोयल का जन्म हरियाणा के एक रुढ़िवादी हिन्दू परिवार में हुआ था। किन्तु उनका बचपन कोलकाता में बीता।

शिक्षा [संपादित करें]

उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से सन् १९४४ में इतिहास में स्नातक उपाधि ली। श्री सीताराम जी ने अपने कॉलेज के दिनोंमें ही संस्कृत लिखना एवं बोलना सीखा।

सामाजिक कार्य [संपादित करें]

अपने विद्यार्थी जीवन में वे एक सामाजिक कार्यकर्ता थे और अपने गाँव के एक हरिजन आश्रम के लिये काम करते थे। आर्य समाज, हरिजन एवं भारत का स्वतंत्रता संग्राम के लिये उनके जुड़ाव के कारण तथा महात्मा गांधी का समर्थन करने के कारण गाँव के कई लोगों से उनका बिगाड़ हो गया था। मीडिया:उदाहरण.ogg

ग्रन्थ [संपादित करें]

यह भी देखें [संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]