सार्वजनिक भविष्य निधि

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सार्वजनिक भविष्य निधि (Public Provident Fund (PPF)) भारत में बचत एवं कर-बचत करने के लिये प्रयुक्त एक जमा योजना है। बहुत से लोग इसे सेवानिवृति के समय धन प्राप्ति का साधन भी मानते हैं।

पीपीएफ का खाता किसी डाकघर में, भारतीय स्टेट बैंक की किसी शाखा में, तथा कुछ अन्य राष्ट्रीकृत बैंकों में खोले जा सकते हैं। आइसीआइसीआई बैंक भारत का पहला निजी स्वामित्व वाला बैंक है जिसे पीपीएफ खाता खोलने की अनुमति है।

प्रमुख विशेषताएँ[संपादित करें]

  • कोई भी वयस्क अपने नाम में या किसी नाबालिग के नाम में पीपीएफ खाता खोल सकता है।
  • खाते की अवधि १५ वर्ष होती है जिसकी समाप्ति पर खाते को पाँच-पांच वर्ष के लिये कितनी भी बार बढ़ाया जा सकता है। बढ़े हुए खाते में भी कर आदि के सभी लाभ मिलते रहते हैं।
  • खाते में प्रतिवर्ष कम से कम ५०० रूपए जमा करना अनिवार्य है। अधिकतम १ लाख रूपये प्रतिवर्ष (वित्तवर्ष) जमा किये जा सकते हैं। यह राशि वर्ष में १२ या इससे कम किस्तों में कभी भी जमा कर सकते हैं।
  • किसी महीने की ५ तारीख से उस महीने की अन्तिम तारीख के बीच जो न्यूनतम राशि खाते में होती है उसी पर व्याज मिलता है। व्याज की दर सरकार समय-समय पर निर्धारित करती है।
  • पीपीएफ में जमा की गयी राशि 80C के अन्तर्गत आमदनी में से घटायी जाती है। इसी प्रकार पीपीएफ से प्राप्त मूलधन तथा व्याज आयकर एवं सम्पत्ति कर से मुक्त होता है।
  • आवश्यक होने पर पीपीएफ खाते में जमा राशि से ऋण भी लिया जा सकता है।
  • सात वर्ष के बाद खाते से आंशिक निकासी भी की जा सकती है।
  • पीपीएफ खाते में किसी को नामित किया जा सकता है तथा मूल खाताधारी की मृत्यु की दशा में नामित व्यक्ति को इस खाते का मालिक मान लिया जायेगा।
  • खाते को बैंक से डाकघर या डाकघर से बैंक में स्थानान्तरित किया जा सकता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]