सआदत हसन मंटो

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सआदत हसन मंटो
व्यवसाय कहानी लेखक, पटकथा लेखक
सक्रिय वर्ष 1934-1955

सआदत हसन मंटो (11 मई 1912 – 18 जनवरी 1955) उर्दू लेखक थे, जो अपनी लघु कथाओं, बू, खोल दो, ठंडा गोश्त और चर्चित टोबा टेकसिंह के लिए प्रसिद्ध हुए। कहानीकार होने के साथ-साथ वे फिल्म और रेडिया पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। अपने छोटे से जीवनकाल में उन्होंने बाइस लघु कथा संग्रह, एक उपन्यास, रेडियो नाटक के पांच संग्रह, रचनाओं के तीन संग्रह और व्यक्तिगत रेखाचित्र के दो संग्रह प्रकाशित किए।

कहानियों में अश्लीलता के आरोप की वजह से मंटो को छह बार अदालत जाना पड़ा था, जिसमें से तीन बार पाकिस्तान बनने से पहले और बनने के बाद, लेकिन एक भी बार मामला साबित नहीं हो पाया। इनके कुछ कार्यों का दूसरी भाषाओं में भी अनुवाद किया गया है।

मंटो की प्रसिद्ध रचनाएँ[संपादित करें]

  • टोबा टेकसिंह , लघुकथा
  • Atishparay (Nuggets of Fire) – 1936
  • Chugad
  • मंटो के अफसाने – 1940
  • धुआँ – 1941
  • अफसाने और ड्रामे – 1943
  • लज़्ज़त-ए-संग - -1948
  • स्याह हाशिए -1948
  • बादशाहत का खात्मा – 1950
  • खाली बोतलें – 1950
  • लाऊड स्पीकर (Sketches)
  • गंजे फरिश्ते (Sketches)
  • Manto ke Mazameen
  • नमरूद की खुदाई – 1950
  • ठंडा गोश्त – 1950
  • याज़िद – 1951
  • पर्दे के पीछे – 1953
  • सड़क के किनारे – 1953
  • बग़ैर उनवान के (बिना शीर्षक) – 1954
  • बग़ैर इजाज़त – 1955
  • बुर्क़े – 1955
  • Phunduney (Tassles) – 1955
  • सरकंडों के पीछे -1955
  • शैतान – 1955
  • शिकारी औरतें – 1955
  • रत्ती, माशा, तोला" -1956
  • काली सलवार – 1961
  • मंटो की बेहतरीन कहानियाँ – 1963 [1]
  • ताहिरा से ताहिर – 1971

सन्दर्भ[संपादित करें]