सही लेखन

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विकिपीडिया में सही हिन्दी लिखने के लिए इस पृष्ठ को ध्यान से पढ़ें। अपने सुझावों को संवाद पृष्ठ पर रखें।

अनुक्रम

आवश्यक्ता या आवश्यकता

आवश्यक्ता गलत वर्तनी है। सही शब्द है आवश्यकता।

कि और की

कि और की दोनों अलग अलग हैं। इनका प्रयोग भी अलग अलग स्थानों पर होता है। एक के स्थान पर दूसरे का प्रयोग ठीक नहीं समझा जाता है।

कि दो वाक्यों को जोड़ने का काम करता है जैसे- उसने कहा कि कल वह नहीं आएगा। वह इतना हँसा कि गिर गया। यह माना जाता है कि कॉफ़ी का पौधा सबसे पहले 600 ईस्वी में इथियोपिया के कफ़ा प्रांत में खोजा गया था। की संबंध बताने के काम आता है जैसे- राम की किताब, सर्दी का मौसम, सम्मान की बात, वार्ता की कड़ी।

कीजिए या करें

सामान्य रूप से लिखित निर्देश के लिए करें, जाएँ, पढें, हटाएँ, सहेजें इत्यादि का प्रयोग होता है। कीजिए, जाइए, पढ़िए के प्रयोग व्यक्तिगत हैं और अधिकतर एकवचन के रूप में प्रयुक्त होते हैं।

ए और ये

आधुनिक हिंदी में दिखायें, हटायें आदि के स्थान पर दिखाएँ, हटाएँ आदि का प्रयोग होता है। यदि ये और ए एक साथ अंत में आएँ जैसे किये गए हैं तो पहले स्थान पर ये और दूसरे स्थान पर ए का प्रयोग होता है।

ज़ानकारी जानकारी

ज़ानकारी गलत है जानकारी सही है।

जैसे कि जो कि

यह दोनों ही पद बातचीत में बहुत प्रयोग होते हैं और इन्हें सामान्य रूप से गलत नहीं समझा जाता है, लेकिन लिखते समय जैसे कि और जो कि दोनों ही गलत समझे जाते हैं। अतः जैसे और जो के बाद कि शब्द का प्रयोग ठीक नहीं है।

फ़ाईल और फ़ाइल

फ़ाईल गलत है और फ़ाइल सही है।

मुख्य पृष्ठ और मुखपृष्ठ

किसी भी पत्रिका या वेब साइट के पहले पृष्ठ के लिए मुखपृष्ठ शब्द का प्रयोग होना चाहिए न कि मुख्य पृष्ठ का। हिंदी के अतिरिक्त संस्कृत, गुजराती और मराठी में भी इसी शब्द का प्रयोग होता है। अनेक हिन्दी साइटों के मुखपृष्ठ पर मुख्य पृष्ठ लिखा नज़र आता है, वह इस कारण है कि पत्र-पत्रिकाओं के कंप्यूटर विभाग और संपादन विभाग में सामंजस्य नहीं है। संपादक कंप्यूटर पर क्या लिखकर आया है वह जाँचते नहीं और कंप्यूटर पर काम करने वाले ठीक से भाषा नहीं जानते हैं।

में, मैं और मैंने

इन तीनों में ही ऊपर बिंदी होना ज़रूरी है। मैंने में ने की ऊपर बिंदी नहीं होती है।

वज़ह या वजह

वज़ह गलत है वजह सही है।

विराम चिह्न

सभी विराम चिह्नों जैसे विराम, अर्ध विराम, प्रश्न वाचक चिह्न आदि के पहले खाली जगह छोड़ना गलत है। खाली जगह विराम चिह्नों के बाद छोडनी चाहिए। जैसे - सबसे पहले सन् १८१५ में कुछ अँग्रेज़ यात्रियों का ध्यान असम में उगने वाली चाय की झाड़ियों पर गया जिससे स्थानीय क़बाइली लोग एक पेय बनाकर पीते थे । गलत है, और सबसे पहले सन् १८१५ में कुछ अँग्रेज़ यात्रियों का ध्यान असम में उगने वाली चाय की झाड़ियों पर गया जिससे स्थानीय क़बाइली लोग एक पेय बनाकर पीते थे। सही है।

समुच्चय बोधक और संबंध बोधक शब्दों का प्रयोग

संबंध बोधक तथा दो वाक्यों को जोड़ने वाले समुच्चय बोधक शब्द जैसे ने, की, से, में इत्यादि अगर संज्ञा के बाद आते हैं तो अलग लिखे जाते हैं और सर्वनाम के साथ आते हैं तो साथ में। उदाहरण के लिए-

अक्षरग्राम आधुनिक भारतीय स्थापत्य का अनुपम उदाहरण है। इसमें प्राचीन पारंपरिक शिल्प को भी समान महत्त्व दिया गया है। संस्थापकों ने पर्यटकों की सुविधा का ध्यान रखा है। हमने भी इसका लाभ उठाया, पूरी यात्रा में किसीको कोई कष्ट नहीं हुआ। केवल सुधा के पैरों में दर्द हुआ, जो उससे सहन नहीं हुआ। उसका दर्द बाँटने के लिए माँ थी। उसने, उसको गोद में उठा लिया।

सुरक्षीत या सुरक्षित

सुरक्षीत गलत है सुरक्षित सही है।

है और हैं

है और हैं दोनों अलग अलग हैं। इनका प्रयोग भी अलग अलग स्थानों पर होता है। एक के स्थान पर दूसरे का प्रयोग ठीक नहीं समझा जाता है। है एक वचन है और हैं बहुवचन जैसे एक आदमी धूप में चला जा रहा है। बहुत से लोग प्रार्थना कर रहे हैं।

अनुस्वार, न्‍ तथा म्‍ का प्रयोग

कवर्ग, चवर्ग तथा टवर्ग के व्यंजनों से पहले आधे न या आधे म का प्रयोग गलत हैं। यहाँ पर अनुस्वार ( बिन्दु) का प्रयोग करें। प्राचीन हिन्दी पाठ्यों में कई बार आधे ङ, ञ तथा ण का प्रयोग किया जाता था। आधुनिक हिन्दी में आधे ङ, ञ तथा ण का प्रयोग नहीं किया जाता हैं। उदाहरणतया:

गन्गा के स्थान पर गंगा लिखे (गङ्गा नहीं), रन्ग के स्थान पर रंग लिखें (रङ्ग नहीं) ,झन्डा के स्थान पर झंडा लिखें।

तवर्ग के व्यंजनों के पहले आधे न का प्रयोग तथा पवर्ग के व्यंजनों से पहले आधे म का प्रयोग उचित हैं। उदाहरणतया:

सम्बन्ध ( संबंध नहीं) लिखें।

श्र और शृ

इनको अलग अलग समझना ज़रूरी है। श्र में आधा और मिला हुआ है जैसे श्रम में। शृ में पूरे में की मात्रा लगी है जैसे शृंखला या शृंगार में। अनेक बार यूनिकोड के फॉन्ट में श्रृंखला या श्रृंगार जैसे अशुद्ध प्रयोग देखने में आते हैं। श्र लिखने पर देखा जा सकता है कि इसमें आधा श् +‍ र + ऋ की मात्र दिखाई देती है जो सही नहीं हैं क्योंकि शृंगार और शृंखला में र कहीं नहीं है। यह अशुद्धि इसलिए होती है क्योंकि पारंपरिक लेखन में श के साथ ऋ जुड़ने पर जो आकार बनता था वह यूनिकोड में नहीं दिया गया है। (वह आकार इस प्रकार का होता था () उसमें श में ऋ जोड़ने पर प्रश्न वाले श की तरह श आधा दिखाई देता था और नीचे ऋ की मात्रा जुड़ती थी। इसमें अतिरिक्त आधा र नहीं होता था।

शून्य-लम्बाई संयुक्तक ZWJ और शून्य-लम्बाई वियुक्तक ZWNR प्रयोग

ZWJ का प्रयोग करके स्वतंत्र आधे व्यंजन भी दिखाए जा सकते हैं। उदाहरणत:

श् ZWJ -> श् <CTL> + <SHT> + 1 -> श्‍


इस प्रकार आप विश्‍व देख सकते हैं न कि विश्व। प्रयत्न करें! आप प्रयत्‍न भी टाइप कर सकते हैं।

ZWNR का प्रयोग करेक आधे व्यंजनों को हलन्त के साथ दिखाए। जैसे कि द् ZWNR -> द् <CTL>+<SHT>+2 = द्‍

अब देखे 'अद्भुत' कैसे दिखाई दे रहा हैं। अद्‌भुत!


नोट- ZWJ and ZWNR के लिए विंडोस एक्सपी के इंस्क्रिट की-बोर्ड पर तदनुसार <CTL> +<SHT>+1 और <CTL> +<SHT>+2 का प्रयोग करें।