सर्वतत्व सिद्धांत

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सर्वतत्व सिद्धांत के द्वारा आकाशगंगाओं से लेकर उपपरमाणविक कण तक के स्तरों की भौतिक समझ उपलब्ध हो जाएगी

सर्वतत्व सिद्धांत या हर चीज़ का सिद्धांत या सब कुछ का सिद्धांत (Theory of everything) सैद्धांतिक भौतिकी का एक कल्पित सिद्धांत है जो हमारे भौतिक ब्रह्माण्ड में घट सकने वाली हर चीज़ को वैज्ञानिक दृष्टि से समझाने की क्षमता रखता होगा। अगर यह सिद्धांत स्पष्ट हो जाता है तो ऐसा कोई भी प्रयोग नहीं होगा जिसके नतीजे के बारे में पहले से ही सही भविष्यवाणी करनी सम्भव न हो।[1] यह सिद्धांत अन्य सभी ज्ञात सिद्धांतो को एक-दूसरे से जोड़ने का भी काम करेगा। वैज्ञानिकों द्वारा सर्वतत्व सिद्धांत ढूंढने का एक मुख्य कारण प्रमात्रा यान्त्रिकी (क्वान्टम मकैनिक्स) और सामान्य सापेक्षता (थीओरी ऑफ़ रॅलॅटिविटि) के बीच में तालमेल बनाना है।[2] बिना इस सिद्धांत के मिले यह दोनों मूल सिद्धांत कुछ पहलूओं में एक-दूसरे का खंडन करते हैं।[3]

आधुनिक भौतिकी[संपादित करें]

सिद्धांतों के परंपरागत अनुक्रम[संपादित करें]

सर्वतत्व सिद्धांत सभी मूलभूत अन्योन्य क्रियाओं (गुरुत्वाकर्षण, प्रबल और वैद्युतदुर्बल अन्योन्य क्रियाओं) का एकीकृत सिद्धांत है।

10-35 मीटर
1019 GeV
 
 
 
 
 
 
 
सर्वतत्व सिद्धांत
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
10-32 मीटर
1015 GeV
 
 
 
 
सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण
 
 
 
 
विद्युतनाभिकीय बल (गट(जीयूटी))
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
10-18 मीटर
102 GeV
 
 
 
 
 
 
 
 
प्रबल अन्योन्य क्रिया
SU(3)
 
 
 
 
 
वैद्युतदुर्बल अन्योन्य क्रिया
SU(2) x U(1)Y
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
10-15 मीटर
1 GeV
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
दुर्बल अन्योन्य क्रिया
 
 
 
 
वैद्युतचुम्बकत्व
U(1)EM
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
10-10 मीटर
10 eV
 
खगोलीय गुरुत्वाकर्षण
 
 
 
 
भौमिक गुरुत्वाकर्षण
 
 
 
 
विद्युत
 
 
 
 
चुम्बकत्व
 
 
 
 
 
 
 

[4][5]

स्ट्रिंग सिद्धांत और एम-सिद्धांत[संपादित करें]

भौतिक विज्ञान में अनसुलझी पहेलियों की सूची
क्या स्ट्रिंग सिद्धांत, परमस्ट्रिंग सिद्धांत अथवा एम-सिद्धांत या कोई अन्य प्रकार का प्रकरण "सर्वतत्व सिद्धांत" को समझने के लिए पथ हैं या केवल अंधी पगडण्डी मात्र हैं?

ई सं 1990 के लगभग बहुत से वैज्ञानिकों को विश्वास था कि 11-विमिय एम-सिद्धांत, जिसे पाँच पर्टर्बेटिव (विचलन) परमस्ट्रिंग सिद्धांतों में से एक द्वारा कुछ सीमाओं के द्वारा व्याख्या की जाती है और अन्य अधिकतम परम-सममितिय 11 विमिय परमगुरुत्व द्वारा, सर्वतत्व सिद्धांत है। तथापि, इस विषय पर व्यापक आम राय नहीं थी।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Why Beauty Is Truth: The History of Symmetry, Ian Stewart, pp. 254, Basic Books, 2008, ISBN 9780465082377, ... So the Theory of Everything is obliged to pass every experimental test yet devised ...
  2. Stephen Hawking: A Biography, Kristine Larsen, pp. 39, Greenwood Publishing Group, 2005, ISBN 9780313323928, ... Indeed, a complete, seamless interweaving of general relativity and quantum mechanics (the two great revolutions of twentieth-century physics) is considered the Holy Grail of theoretical physics, as some call it a theory of everything ...
  3. The New Flatlanders: A Seeker's Guide to the Theory of Everything, Eric Middleton, pp. 29, Templeton Foundation Press, 2007, ISBN 9781599471235, ... One of the major problems physicists have faced is that the two main theories of twentieth-century physics, general relativity and quantum mechanics, seem to contradict each other ...
  4. अन्योन्य क्रियाओं की प्रकृति (नेचर ऑफ़ इंटरेक्शन) गोबिन्द मजुमदार
  5. क्या अभी बहुत कण हैं जिन्हें खोजा नहीं जा सका? (आर देयर मोर पार्टिकल्स लेफ्ट टू फाइंड?)