समाज मनोविज्ञान

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

सामाजिक मनोविज्ञान (Social Psychology) मनोविज्ञान की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत इस तथ्य का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है कि किसी दूसरे व्यक्ति की वास्तविक, काल्पनिक, अथवा प्रच्छन्न उपस्थिति हमारे विचार, सम्वेग, अथवा व्यवहार को किस प्रकार से प्रभावित करती है। यहा वैज्ञानिक का अर्थ हे अनुभवजन्य विधि। इस सन्दर्भ मे विचार, भावना तथा व्यवहार मनोविज्ञान के उन कडियो से सम्बन्ध रखते हे जो नापने योग्य है। काल्पनिक अथवा सूचित व्यवहार अर्थात, दूसरो के ना होने पर भी हम समाजिक प्रभाव के निशाने पर रहते है। उदाहरन- टेलीविज़न देखते समय अथवा इन्टर्नलाईस्ड सांस्कृतिक मानदंडों का पालन करना। सामाजिक मनोविज्ञानी आम तौर पर मानव व्यवहार की व्याख्या करते है इस आधार पर की व्यवहार नतीजा है तात्कालिक समाजिक स्तिथियो और मानसिक स्तिथियो का। सामान्य रूप मे, सामाजिक मनोविज्ञानी प्रयोगशाला आधारित तथा अनुभवजन्य विधी का अङिकार करते है और सामाजिक मनोविग्यान के सिद्धान्त भूमंडलीय, समान्य नही बलकी विशिष्ट तथा ध्यान केन्द्रित होते है।

सामाजिक मनोविज्ञानी, इस आधार पर मानविय व्यवहार के उन पहलू से सम्बन्ध रखते है जो हमारे व्यवहार को किसी दूसरे व्यक्ति की वास्तविक, काल्पनिक अथवा प्रच्छन्न उपस्थिति से प्रभावित हो। इसके साथ ही वह उन परिस्थितियो को भी ध्यान पूर्वक समझते है जिनके उपस्तिथी मै व्यवहार, कार्य सिद्ध हो। समाज मनोविज्ञान इन से सम्बन्धी भावनाओं, विचारों, आस्था, इरादों और लक्ष्यों के निर्माण विधि और इन से सम्बन्धी वह कडिया जो हमारी परस्पर क्रिया को प्रभावित करे। सामाजिक मनोविग्यान एक अन्तर अनुशासनात्मक क्षेत्र है जो मेल है मनोविज्ञान तथा समाज विज्ञान का। विश्व युद्ध द्वितीय के पश्छात के समय मै मनोविग्यान और समाज विग्यान के बीच बारंबार सहयोग बना रहा। paपरन्तु, इस्के बाद यह दोनो क्षेत्र अलग होकर तेजी से विशेशीक्रुत होने लगे और समाज मनोविग्यान ने अपना ध्यान मैक्रो चर पर कर दिया। फिर भी समाज मनोविज्ञान का दृष्टिकोण आज भी मनोविग्यान के इस क्षेत्र मै बहुत उल्लेखनीय है।

'इतिहास' समाजिक मनोविज्ञान एक अनुशासन के तौर पे पैदा हुआ २० शतमान अमरीका मै, लेकिन इस अनुशासन की पेहले से ही एक महत्वपूर्ण स्थापना हो गयी थी। १८ शतमान के बाद, उभरते समाज मनोविज्ञान से जुडे लोग सम्बन्धित थे मानव प्रक्रुति के विभिन्न पहलुओं के स्पष्टीकरण से। इनकी इच्छा थी की वह महत्वपूर्ण वजह खोजे समाज व्यवहार के प्रभाव का। यह साकार करने के लिये उन्हे लगा हकी सबसे उत्तम तरीका माना वैज्ञानिक विधि को, वे मानते थे की वैज्ञानिक, अनुभवजन्य और नापनीय रीति को वे मानव व्यवहार पर लागू कर सकते थे।



बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]