सत श्री अकाल

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सत श्री अकाल (पंजाबी: ਸਤਿ ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ) पंजाबी भाषा में प्रयुक्त एक अभिवादन है और इसका अधिकतर उपयोग सिखमत के अनुयाईयों द्वारा और कुछ पंजाबी हिन्दुओं द्वारा भी किया जाता है। इसका अर्थ इस प्रकार है सत यानी सत्य, श्री एक सम्मानसूचक शब्द है और अकाल का अर्थ है समय से रहित यानी ईश्वर इसलिए इस वाक्यांश का अनुवाद मोटे तौर पर इस प्रकार किया जा सकता है, "ईश्वर ही अन्तिम सत्य है"।

सत श्री अकाल का उपयोग लगभग सभी सिखों द्वारा एक-दूसरे का अभिवादन करने के लिए किया जाता है, क्योंकि सिखों के दसवें गुरु द्वारा यह जयकारा सिखों को दिया गया था, "बोले सो निहाल, सत श्री अकाल"। इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति यह कहेगा कि ईश्वर ही अन्तिम सत्य है उसपर चिकालिक ईश्वर का आशीर्वाद रहेगा[1]

सिखों द्वारा पूरे विश्व में एक-दूसरे का अभिवादन करने के लिए इस पद का उप्योग किया जाता है, भले ही उनकी भाषा जो भी हो। उदाहरणस्वरूप जैसे अमेरिका में रह रहे दो अंग्रेज़ी भाषी सिख जो केवल अंग्रेज़ी ही बोलते हैं एक-दूसरे का अभिवादन करने के लिए "सत श्री अकाल" बोल सकते हैं। यह उक्ति पंजाबी भाषा में एकमात्र औपचारिक अभिवादन है।

रणनाद[संपादित करें]

भारतीय सेना की तीन पलटनें (रेजीमेण्ट), पंजाब रेजीमेण्ट, सिख रेजीमेण्ट और सिख लाइट इन्फ़ेण्ट्री इस वाक्यांश का उपयोग रणनाग के लिए करती हैं[2]। ये तीनों पलटनें संप्रतीक रूप से पंजाबी और सिख हैं और इस रणनाद को अक्सर बॉलीवुड चलचित्रों में चित्रित किया जाता है। यह भारतीय सेना के सर्वाधिक चित्रित रणनादों में से एक है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "First Gurpurab of Guru Nanak at White House in Washington". Punjab Newsline. 15 नवम्बर 2009. http://www.punjabnewsline.com/content/view/20920/38/. अभिगमन तिथि: 24 अक्टूबर 2011. 
  2. "Indian Army Battle Cries". http://defenceforumindia.com/forum/military-history/35012-indian-army-battle-cries.html. अभिगमन तिथि: 19 मई 2012.