अभिकलित्र

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घर में निजी अभिकलित्र

अभिकलित्र[1] (अन्य नाम - संगणक, परिकलक, कंप्यूटर, आंग्लभाषा - Computer) वस्तुतः एक अभिकलक यंत्र (programmable machine) है जो दिये गये गणितीय तथा तार्किक संक्रियाओं को क्रम से स्वचालित रूप से करने में सक्षम है। यांत्रिक संगणक कई सदियों से मौजूद थे किंतु आजकल अभिकलित्र से आशय मुख्यतः बीसवीं शदी के मध्य में विकसित हुए वैद्युत अभिकलित्र से है। तब से अबतक यह आकार में क्रमशः छोटा और संक्रिया की दृष्टि से अत्यधिक समर्थ होता गया हैं॥ अब अभिकलक घड़ी के अन्दर समा सकते हैं और बैटरी से चलाये जा सकते हैं। निजी अभिकलक के विभिन्न रूप जैसे कि लैपटॉप, टैबलेट आदि रोजमर्रा की जरूरत बन गए हैं॥

अनुक्रम

[संपादित करें] अभिकलित्र के भाग

मोटे तौर पर अभिकलित्र के चार भाग होते हैं।
निजी अभिकलित्र (पीसी) के प्रमुख भाग

एक अभिकलित्र(कंप्यूटर) निम्नलिखित चार भागों से मिलकर बनता है : निविष्ट युक्ति, संसाधन युक्ति, निर्गम युक्ति, और भंडारण युक्ति । (युक्ति हको यंत्र भि कहा जता है।)

[संपादित करें] निविष्ट युक्ति

  • निविष्ट युक्ति उन उपकरणों को कहते हैं जिसके द्वारा निर्देशो और आंकडों को अभिकलित्र मे भेजा जाता है। जैसे- कुन्जी पटल (की-बोर्ड), माउस, जॉयस्टिक, ट्रैक बाल आदि ।
    1. कीबोर्ड
    2. चूहा (माउस)
    3. माइक्रोफ़ोन या माइक
    4. क्रमवीक्षक (स्कैन्नर), अंकीय कैमेरा
    5. टच-स्क्रीन, टच-पैद

[संपादित करें] केंद्रीय प्रक्रमन एकक

  • केंद्रीय प्रक्रमन एकक (सीपीयू), संसाधन युक्ति या विचार युक्ति - । यह अभिकलित्र की मूल संक्रियात्मक इकाई है जो आगम उपकरणों द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुरूप कार्य कर उसे निर्गत इकाई को भेजती है॥

संसाधन युक्ति के तीन भाग होते हैं:

    1. बही या पंजी (रजिस्टर) - सबसे पहले जिन आंकड़ों या सूचनाओं पर काम करना होता है, उन्हें अभिकलित्र स्मृति से बही में अंकित किया जाता है॥ । अलग अलग प्रक्रियाओं के लिए अलग अलग बही होते हैं आंकिक एवं तर्क इकाई की संक्रिया के बाद सूचनाएं पुनः बही में दर्ज होती हैं और वापस स्मृती में भेजी जाती हैं॥
    2. आंकिक एवं तर्क इकाई - यह इकाई बही में दर्ज सूचनाओं पर निर्देशों के अनुसार कार्य करती है तथा परिणाम को पुनः उपयुक्त बही में दर्ज कर देता है॥
    3. नियन्त्रण इकाई - यह केंद्रिय प्रसाधन इकाई की सभी क्रियाओं का नियंत्रण करती है॥ जैसे कि स्मृति से सूचनाएं बही में वहाँ से आंकिक एवं तर्क इकाई में, वापस बही में तथा वहाँ से स्मृति में वापस जाने की प्रक्रिया पर यह इकाई नियंत्रण रखती है॥

[संपादित करें] भंडारण युक्ति

[संपादित करें] निर्गम युक्ति

  • निर्गम युक्ति (आउटपुट डिवाइस)- इसमें वे सभी उपकरण शामिल हैं जिनसे प्रसाधित सूचनाएं या सामग्री मानवीय उपयोगी उत्पाद के रूप में बाहर आती हैं॥ जैसे-
    1. प्रदर्शक (मॉनिटर) - इसकी सहायता से प्रसाधित सामग्री दृश्य रूप में प्रकट होती है॥
      • स्क्रीन
    2. मुद्रक- इसकी सहायता से निर्गत सामग्री को कागज़ पर मुद्रित किया जाता है।
    3. वक्ता - यह शोर मचाता है।

[संपादित करें] अभिकलित्र के प्रकार

अभिकलित्र का मुख्य कार्य दिये गये आंकड़े को जमा कर उसपर दिए गए निर्देशों के अनुरूप काम कर परिणाम देना है॥ कार्यक्षमता के आधार पर इसे निम्नलिकित श्रेणियों मे बाँटा गया है- सुपर कंप्यूटर, मेनफ्रेम कंप्यूटर, मिनी कंप्यूटर, एव माइक्रो कंप्यूटर आदि। सुपर कंप्यूटर इनमें सबसे बडी श्रेणी होती है, तथा माइक्रो कंप्यूटर सबसे छोटी।

सुपर कंप्यूटर सबसे तेज गति से कार्य करने वाले कंप्यूटर होते हैं। वह बहुत अधिक डाटा को काफी कम समय में इंफार्मेशन में बदलने में सक्षम होते हैं। इनका प्रयोग बड़े-बड़े कार्य करने में होता है, जैसे मौसम की भविष्यवाणी, डाटा माइनिंग, जटिल सिमुलेशन, मिसाइलों के डिजाइन आदि। इनमें अनेक माइक्रोप्रोसेसर (MICROPROCESSOR) [एक विशेष छोटी मशीन जो कम्प्यूटिंग के कार्य को काफी आसानी से तथा बहुत ही कम समय में कर सकने में सक्षम होती है।] लगे होते हैं। किसी जटिल गणना को कम समय में पूरा करने के लिये बहुत से प्रोसेसर एकसाथ (पैरेलेल) काम कराने पडते हैं। इसे पैरेलेल प्रोसेसिंग कहा जाता है। इसके अन्तर्गत जटिल काम को छोटे-छोटे टुकडों में इस प्रकार बाँटा जाता है कि ये छोटे-छोटे कार्य एक साथ अलग-अलग प्रोसेसरों द्वारा स्वतन्त्र रूप से किये जा सकें।

मेनफ्रेम कम्प्यूटर, सुपर कंप्यूटर से कार्यक्षमता में छोटे परंतु फिर भी बहुत शक्तिशाली होते हैं। इन कम्प्यूटरों पर एक समय में २५६ से अधिक व्यक्ति एक साथ काम कर सकते हैं। अमरीका की आईबीएम कंपनी (INTERNATIONAL BUSINESS MACHINE CORPORATION ) मेनफ्रेम कंप्युटरों को बनाने वाली सबसे बडी कंपनी है।

मिनी कम्प्यूटर मेनप्रेम कंप्यूटरों से छोटे परंतु माइक्रो कम्प्यूटरों से बडे होते हैं।

माइक्रो कम्प्यूटर (पर्सनल कम्प्यूटर) सबसे छोटे होते हैं तथा इन्हीं को वैयक्तिक कम्प्यूटर या पर्सनल कम्प्यूटर भी कहा जाता है । इसका प्रथम संस्करण १९८१ में विकिसित हुआ था, जिसमे ८०८८ माईक्रोप्रोसेसर प्रयुक्त हुआ था ।


[संपादित करें] अभिकलित्र के गुण

कंप्यूटर हमारे द्वारा दिये जाने वाले हर कार्य को बखूबी करने में सक्षम होते हैं। इनके कुछ गुण इस प्रकार हैं :

गति

कम्प्यूटर काफी तेज गति से कार्य करते हैं, जब हम कम्प्यूटर के बारे में बात करते हैं, तो हम मिनी सेकेन्ड, माइक्रो सेकेन्ड में बात नही करते, बल्कि हम 10-12 सेकेन्ड में एक कम्पयूटर कितना कार्य कर लेता है, इस रूप में उसकी गति को आँकते हैं।

न उबना

कंप्यूटर कभी भी उबते (बोर) नहीं हैं, और यही इनका सबसे अच्छा गुण है, क्योंकि यह एक यंत्र हैं, इसलिये ये काफी दिनों तक बिना किसी शिकायत के कार्य करने में सक्षम होते हैं।

स्मरण करने या संग्रह की क्षमता

एक सामान्य कम्प्यूटर भी एक बार दिये गये निर्देश को काफी समय तक स्मरण रखने मे सक्षम होता है, तथा जब भी आवश्यकता पडे़, उसे फिर से लिखा और भरा जा सकता है।

[संपादित करें] उपयोग

[संपादित करें] अभिकलन भाषा

अभिकलित्र जिस भाषा को समझता है उसे द्विआधारी भाषा कहते हैं। वास्तव में यह यंत्र केवल विद्युत धारा के चालू या बंद होने को ही समझता है॥ विद्युत प्रवाह होने एवं रुकने को 0 या 1 के जरिए व्यक्त किया जाता है। इसलिए इसपर कोइ काम करने के लिए इसे इस भाषा में निर्देश या सूचना देना होता है।


[संपादित करें] यंत्र भाषा

शुरूआती दिनों में अभिकलित्र को सीधे द्विआधारी भाषा में निर्देश या सूचना दी जाती थी। यंत्र से सीधा संपर्क रहने के कारण इसे यंत्र भाषा (मशीन लैंगुएज) भी कहा जाता था। इस तरह से निर्देश या सूचना देने की यह प्रक्रिया काफी जटिल थी।

[संपादित करें] संयोजन भाषा

यंत्र भाषा की जटिलता को कम करने के लिए संयोजक (असेंबलर) की सहायता ली गई। यह ऐसा प्रोग्राम था जो कुछ खास शब्दों को द्विआधआरी संकेतों के समूह में बदल देता था। इस भाषा में प्रत्एक प्रक्रिया के लिए एक सरल शब्द चुन लिए गए थे। इससे द्विआधारी संकेत समूह के बजाय केवल संकेत शब्द लिखकर काम हो जाता था॥ इस संकेतों द्वारा संयोजित तथा संयोजक की सहायता से काम करने वाली भाषा को संयोजन भाषा (असेंबली लैंगुएज) कहा गया।

[संपादित करें] उच्च स्तरीय भाषाएँ (High Level Language)

असेम्बली लेंगवेज के आने से कम्प्यूटर प्रोग्रामर्स को सुविधा जरूर मिली, किन्तु इसके लिए प्रोग्रामर को कम्प्यूटर के हार्डवेयर, तथा इसकी कार्य प्रणाली का सम्पूर्ण ज्ञान होना आवश्यक होता था । अतः अब और भी सरल भाषायों का विकास किया गया, जिन्हें उच्च स्तरीय भाषा कहा गया । इनमे से कुछ प्रमुख आरंभिक भाषाए कोबोल (COBOL), बेसिक (BASIC), सी (C) थी ।
उच्च स्तरीय भाषायों या हाई लेवल लेंगवेजों को मशीन भाषा में परिवर्तित करने के लिए संकलक( Compiler) और व्याख्याता (Interpreter) की जरूरत पड़ती है ।
संकलक या कंपाइलर उच्च स्तरीय भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को स्थायी रूप से मशीन भाषा में परिवर्तित करता है, जबकि व्याख्याता या इंटरप्रेटर एक एक पंक्ति करके परिवर्तित करता है ।

[संपादित करें] संदर्भ

[संपादित करें] इन्हें भी देखें

[संपादित करें] वाह्य सूत्र

वैयक्तिक औज़ार
नामस्थान

संस्करण
क्रियाएं
परिभ्रमण
योगदान
सहायता
उपकरण
मुद्रण/निर्यात
अन्य भाषाएँ