श्रव्य प्रवर्धक

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एकीकृत परिपथ (आईसी) से बना एक श्रव्य शक्ति प्रवर्धक
आईसी के रूप में एक श्रव्य-आवृत्ति प्रवर्धक (Lm3886tf)

ऐसे एलेक्ट्रानिक प्रवर्धक को श्रव्य प्रवर्धक या आडियो एम्प्लिफायर (audio amplifier) कहते हैं जो कम शक्ति के श्रव्य संकेतों का प्रवर्धन कर सकें। श्रव्य-आवृत्‍ति शक्ति प्रवर्धक (audio power amplifier) वह एलेक्ट्रॉनिक प्रवर्धक है जो कम शक्ति के श्रव्य आवृत्ति वाले विद्युत संकेतों को प्रवर्धित करके उनको इतना शक्तिशाली बना दे कि वे लाउडस्पीकर को चला सकें। उन संकेतों को श्रव्य संकेत (आडियो सिगनल) कहते हैं जिनकी आवृत्ति २० हर्ट्ज से लेकर २० हजार हर्ट्ज के बीच होती है। इस सीमा के भीतर की आवृत्तियों वाले संकेत ही मानव कर्ण को सुनाई पड़ते हैं, इससे कम या अधिक के नहीं।

श्रव्य प्रवर्धकों का निवेश संकेत (इनपुट सिगनल) कुछ सौ माइक्रोवाट के स्तर का होता है जबकि आउटपुट दस, सौ या हजार वाट के स्तर का हो सकता है। श्रव्य प्रवर्धक, रेडियो, टीवी, टेलीफोन, सेलफोन आदि के आवश्यक अंग है।

परिपथ डिजाइन एवं उपयोग[संपादित करें]

श्रव्य प्रवर्धक का सबसे अधिक उपयोग ध्वनि संकेतों को प्रवर्धित करने के लिए होता है। किन्तु इसके बहुत से अन्य उपयोग भी हैं, जैसे- संकेत संसूचन (सिग्नल डिटेक्सन), मापन एवं नियंत्रण, स्वचालन (आटोमेशन), सुदूर नियंत्रण, एनलॉग कम्प्यूटरी आदि।

श्रव्य प्रवर्धक प्रायः दो चर्णों से बने होते हैं-

  • (१) पूर्व-प्रवर्धक (pre-amplifier), तथा
  • (२) शक्ति प्रवर्धक (power amplifier)

कभी-कभी एक ही चरण में उपरोक्त दोनों कार्य कर लिए जाते हैं।

निर्गम चरण (आउटपुट स्टेज)[संपादित करें]

श्रव्य प्रवर्धक का निर्गम चरण कई प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है-

  • श्रेणी A, श्रेणी AB, श्रेणी B या श्रेणी D में काम करने वाला प्रवर्धक
  • सिंगल-एण्डेड आउटपुट स्टेज या पुश-पुल आउटपुट स्टेज
  • ट्रांसफॉर्मर से युक्त या ट्रांसफॉर्मरहीन आउटपुट स्टेज

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

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