शैथिल्य

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शैथिल्य या 'हिस्टेरिसिस' (magnetic hysteresis) पदार्थों या तंत्र का वह गुण है जिसके कारण कोई आउटपुट, केवल इनपुट पर ही निर्भर नहीं करता बल्कि निवेश (इन्पुट) एवं निर्गत (आउटपुट) सिग्नल की पूर्व स्थितियों (इतिहास) पर भी निर्भर करता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि शैथिल्ययुक्त किसी पदार्थ या तंत्र में स्मृति (memory) होती है।

भौतिकी में बहुत से निकाय अपनी प्राकृतिक में शैथिल्य प्रदर्शन करते हैं। उदाहरण के लिये लोहा का चुम्बकन शैथिल्य प्रकट करता है।

चुम्बकीय शैथिल्य (magnetic hysterisis)[संपादित करें]

CRGO के लिये शैथिल्य पाश (लूप)

लौहचुम्बकीय पदार्थों में चुम्बकीय शैथिल्य बहुत जानी-पहचानी चीज है। जब किसी लौहचुम्बकीय पदार्थ (जैसे सीआरजीओ) के उपर कोई वाह्य चुम्बकीय क्षेत्र लगाया जाता है तो इसके आणविक द्विध्रुव स्वयं को उस वाह्य क्षेत्र की दिशा में घुमा लेते हैं। किन्तु उस क्षेत्र को शून्य कर देने के बाद भी इन परमानविक द्विध्रुओं का कुछ भाग उसी दिशा में बना रहता है। इसी कारण लोहे को चुम्बकित करने के बाद उसका चुम्बकत्व अनन्त काल तक बना रह सकता है। और यदि इसे विचुम्बकित करना हो तो इसके लिये उल्टी दिशा में वाह्य चुम्बकीय क्षेत्र लगाना पड़ता है। चुम्बकीय शैथिल्य एक प्रकार की स्मृति के सदृश है जिसका उपयोग कम्प्यूटर के आरम्भिक दिनों में स्मृति (मेमोरी) के रूप में किया जाता था।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]