शान्ति भूषण
शान्ति भूषण (जन्म ११ नवम्बर, १९२५ इलाहाबाद) भारत के भूतपूर्व विधिमन्त्री एवं सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वे मोरारजी देसाई सरकार में विधि, न्याय एवं कम्पनी कार्य मन्त्री थे। सन् २००९ में इंडियन एक्सप्रेस द्वारा उन्हें विश्व के सबसे शक्तिशाली भारतीय लोगों की सूची में ७४वें स्थान पर रखा गया था।[1] वे भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष करने वालों में अग्रणी हैं।
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राजनीतिक जीवन[संपादित करें]
शान्ति भूषण कांग्रेस (ओ) पार्टी और बाद में जनता पार्टी के एक सक्रिय सदस्य थे। वे १४ जुलाई १९७७ से २ अप्रैल १९८० तक राज्य सभा के सदस्य रहे। वे मोरारजी देसाई की सरकार में १९७७ से सरकार के पतन तक विधि, न्याय एवं कम्पनी कार्य मन्त्री रहे। सन् १९८० में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये। परन्तु १९८६ में जब भारतीय जनता पार्टी ने एक चुनाव याचिका पर उनकी सलाह नहीं मानी तो उन्होंने भाजपा से त्यागपत्र दे दिया।
तत्कालीन विधि मन्त्री के रूप में, उन्होंने १९७७ में लोकपाल बिल प्रस्तुत किया था जो मोरारजी देसाई की सरकार गिर जाने के कारण पारित नहीं हो सका[2]। सम्प्रति वे अप्रैल २०११ में गठित जन लोकपाल विधेयक की संयुक्त समिति के सह-अध्यक्ष हैं।
इन्हें भी देखें[संपादित करें]
बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]
- शान्ति भूषण – कानून के माहिर खिलाड़ी
- नोएडा जमीन विवाद भ्रष्ट लोगों का दुष्प्रचार: शान्ति भूषण
- रद्द कर दीजिए प्लॉट, नहीं चाहिए : शान्ति भूषण
- माफी नहीं, जेल जाने को तैयार : शान्ति भूषण
- देश के आठ प्रधान न्यायाधीश भ्रष्ट थे : शान्ति भूषण का सनसनीखेज आरोप
- शान्ति भूषण के पक्ष में आये एन०ए०सी० के सदस्य
- प्रशांत भूषण – अन्ना की लड़ाई के अहम सिपाही
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